गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

भदोही की पत्रकारिता का युगपुरुष पुरुष मिथिलेश द्विवेदी

 युवा पत्रकार मिथिलेश जी 
जनपद निर्माण के पुर्व से ही भदोही की पत्रकारिता ने हमेशा अपनी लेखनी के माध्यम से विभिन्न मुद्दों को उठाकर विकास व सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किन्तु पिछले कई वर्षो में जिस तरह पत्रकारिता का व्यवसायी कर्ण हुआ है और संस्कारविहीन लोग इस क्षेत्र में भागीदारी निभाने की शुरुआत किये है। उससे पत्रकारिता का स्तर दिनोदिन गिरता दिखाई दिया है। वही कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से पत्रकारिता और पत्रकारों का सम्मान बढाने व  बचाने  में महती भूमिका निभाई है। अभी तक वरिष्ठ पत्रकार  हरीन्द्र नाथ उपाध्याय, लक्ष्मी शंकर पाण्डेय, प्रभुनाथ शुक्ला, सुरेश गाँधी, नागेन्द्र सिंह  जैसे कुछ  पत्रकार हैं जिन्होंने  अपनी निष्पक्ष लेखनी का लोहा मनवाया है। इनमे से कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सामाजिक व प्रशासनिक स्तर पर धमकियाँ दी गयी या फिर फर्जी मामलो में फंसने का दुष्चक्र रच गया।
इन्ही में पत्रकारों में जनपद के एक ऐसी पत्रकार का नाम भी शामिल है जिसने अपनी उत्क्रिस्ट लेखनी का परचम जनपद ही नहीं वरन राष्ट्रिय स्तर तक लहराया है। जिसकी लेखन शैली पठनीय होने के साथ समाज को एक सन्देश भी देती है। सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दे को यह युवा पत्रकार जिस गंभीरता से प्रस्तुति करता है। वह निश्चय ही काबिले तारीफ होता है। कुछ दिनों पहले फेसबुक के माध्यम से अपनी बेटी को पिता का नाम दिलाने का प्रयास करने वाली डिंपल मिश्र नामक महिला की बात को जब उक्त पत्रकार ने अपनी लेखनी के माध्यम से उठाना शुरू किया तो वह आवाज़ इस गूंजी की जिसने भी सुना वही एक पिडित महिला की आवाज़ बन गया और जनपद के इतिहास में यह मामला दर्ज हो गया। जी हां हम बात कर रहे हैं युवा पत्रकार मिथिलेश द्विवेदी की जो सिमित संसाधनों में भी अपना लोहा मनवाने के लिए लोंगो को विवश कर दिया।
मिथिलेश द्विवेदी भदोही जनपद के महुआरी जंगीगंज निवासी व वरिष्ठ पत्रकार बलराम दुबे व हीरावती देवी  के पुत्र है। इनका जन्म 8 जनवरी 1978 को हुआ। इन्होने 1993 में हाईस्कूल  की शिक्षा बैरीबिसा और 1995 में  इंटर की शिक्षा सागरपुर बवाई से ली। 1998 में ज्ञानपुर से स्नातक करने के बाद इलाहाबाद से पत्रकारिता में डिप्लोमा लिया। लेखन का शौक इन्हें पढाई के दौरान से ही था। पत्रकारिता की शुरुआत श्री द्विवेदी ने मुंबई से की। वहा पर उत्तरभारतीयो में लोकप्रिय समाचार पत्र यशोभूमि के साथ कई अखबारों में काम  किया। तत्पश्चात भदोही लौट आये और वाराणसी से प्रकाशित हिंदी दैनिक अख़बार आज में लेखन शुरू किया। इसके बाद अमर उजाला  में काम  करने के पश्चात् 2006 में दैनिक  जागरण में काम  करना शुरू किया। आज तक अनवरत दैनिक जागरण में ही कार्यरत हैं। मिथिलेश जी की लेखन शैली का ही कमाल  है की किसी न किसी मुद्दे को लेकर वे चर्चित होते रहे। गत वर्ष ज्ञानपुर में एक कैदी की बर्बर पिटाई का मुद्दा उठा कर जेल में चल रहे तालिबानी कानून की पोल खोलकर सनसनी मचा  दी। यह मुद्दा भी राष्ट्रिय स्तर पर चर्चित हुआ। इस वर्ष के नवम्बर माह में डिंपल मिश्र प्रकरण को इन्होने जिस गंभीरता से उठाया वह सामाजिक सरोकार से जुड़ा  एक ऐसा मुद्दा था। जिससे तमाम महिलाये पीड़ित हैं। मिथिलेश जी ने प्रिंट मीडिया के साथ चैनलों को भी मजबूर कर दिया और सभी ने डिंपल के मुद्दे को प्राथमिकता दी ।उन्होंने पंचायतो को भी जागरूक किया।  यह मामला यदि राष्ट्रिय स्तर पर चर्चित हुआ तो वह मिथिलेश और दैनिक जागरण की देन रही।
इस दौरान उन्हें कई विषम परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा। एक तरफ दबंगों की धमकियाँ मिली तो दूसरी तरफ उन्हें खरॆएदने का प्रयास भी किया गया किन्तु स्वच्छ पत्रकारिता को समर्पित हो चूके इस शख्स को न तो भय विचलित कर पाया और न ही  लालच।
दूसरी तरफ  इस प्रकरण को लेकर पत्रकारिता का एक विकृत रूप भी सामने आया। चंद रूपये की लालच में कुछ पत्रकार बिक भी गए। जिसे जनपद के लोंगो ने महसूस भी किया। वही एक समाचार पत्र के संवाददाता ने फर्जी फायरिंग और पथराव की झूठी खबर फैलाकर मिथिलेश के मनोबल को तोड़ने का प्रयास किया। किन्तु समाज और पत्रकारिता के लिए समर्पित हो चुके इस युगपुरुष का मनोबल इतना अडिग है की उसे तोडना असंभव है। 

1 टिप्पणी:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

शानदार लेखन,
जारी रहिये,
बधाई !!