सोमवार, 24 दिसंबर 2012

क्या यू पी को है किसी बलात्कार का इंतजार

क्या यू  पी को है किसी बलात्कार का इंतजार
दिल्ली में हुए बलात्कार की घटना के बाद हुए आन्दोलन को लेकर पूरे देश में एक उबाल सा आ गया। पीडिता के पक्ष में हुए धरना प्रदर्शन की जो शुरुआत दिल्ली में हुयी उसका असर पूरे देश में देखा गया। चाहे मीडिया में चेहरा दिखने की ललक हो या घटना के बाद उपजे आक्रोश का परिणाम किन्तु इसे एक सुखद शुरुआत कही जा सकती है की लोग जागरूक हुए और पीडिता के पक्ष में अपनी आवाज़ बुलंद की। इसका असर भी देखने को मिला। राज्यपाल ने कहा है की अब ऐसे मामलो को अनदेखा नहीं किया जायेगा। हालाँकि उनके शब्द अवश्य अलग हैं किन्तु भाव यही है। उन्होंने स्पेशल कमिश्रनर सुधीर यादव का नंबर (09818099012) और ईमेल (splcptraffic@gmail.com) आईडी दी। कहा है  कि पीड़ित लड़कियां या महिलाएं कभी भी इस नंबर और ईमेल आईडी पर अपना कंप्लेंट दर्ज करवा सकती हैं। पुलिस तुरंत हूबहू पीड़ित के शब्दों में कंप्लेंट दर्ज करेगी। टालमटोल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, पुलिसवालों को महिलाओं के साथ सभ्य तरीके से पेश आने की ट्रेनिंग दी जाएगी। एयरपोर्ट के प्राइवेट कैब्स के ड्राइवरों, बसों और ऑटो ड्राइवरों के लिए फोटो आईडी कार्ड जरूरी कर दिया गया है। ये आई कार्ड पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही ड्राइवरों को जारी किए जाएंगे।
यह एक अच्छी शुरुआत है। किन्तु यही शुरुआत अगर इस घटना से पहले हुयी होती शायद आज ऐसी परिस्थितियां नहीं बनती। या फिर लोग धरना प्रदर्शन नहीं करते तब भी न तो किसी अधिकारी के ऊपर कार्यवाही होती और न ही फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जाने की पहल होती।

ऐसा नहीं है की देश के और भी जगहों में ऐसी घटनाये नहीं होती है। महिलाओ के ऊपर अत्याचार और बलात्कार की घटनाये आम बात हो गयी है। उत्तरप्रदेश भी इन मामलो में पीछे नहीं है। स्कूल जाते समय लडकियों की छेड़खानी जैसी घटनाये आम बात बात हैं। यदि कोई लड़की या उसके अभिभावक थाने  में जाते हैं तो उनकी बाते नहीं सुनी जाती। लोग एकजुट होकर मांग करें की उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में महिलाओ से जुड़े मामले की सुनवाई तुरंत हो। इश्वर न करे की कोई ऐसी घटना किसी की बहन बेटी के साथ घटे किन्तु महिला उत्पीडन और बलात्कार जैसी घटनाओ के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बने और मामलो की सुनवाई त्वरित हो। 

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