बुधवार, 19 दिसंबर 2012

क्या सचमुच रेहान दोषी है ... ?

होली के रंग में सराबोर रेहान, शमसुद्दीन, दानिश और अन्य 
मुहर्रम पर्व पर एक बार फिर दो दिलो में दरार पैदा करने का असफल प्रयास किया गया। किन्तु भदोही की गंगा जमुनी तहजीब और भाईचारे को कलंकित करने का जो मंसूबा लोग पाले बौठे थे उन्हें मुह की खानी पड़ी। भदोही की अवाम ने बता दिया की हम लोग कालीन के ताने बाने  की तरह हमेशा एक दुसरे  गुंथे रहे हैं और गुंथे रहेंगे। हमें तोडं पाना किसी के बस की बात नहीं है। कुछ लोंगो ने यहाँ पर दंगा होने की अफवाह फैलाई की किन्तु यह कदापि दंगा नहीं था। चंद  सिरफिरों की कारगुजारियों को हम दंगा कहा भी नहीं सकते। बवाल करने में जो भीड़ देखि गयी उसमे अधिकतर नए उम्र के बच्चे थे जो आवेश में आ गए और बवाल खड़ा हो गया। इसमें समाज का बुद्धिजीवी तबका नहीं बल्कि अनपढ़ और जाहिल लोग थे।
मुशायरे में रेहान को सम्मानित करते आयोजक 
हालाँकि प्रशासन और यहाँ के लोंगो को धन्यवाद देना होगा की उन्होनो सूझबूझ दिखाई और दो दिन में ही माहौल ऐसे परिवर्तित हुआ जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। यदि मामले की शुरुआत में ही पुलिस ने सख्ती दिखाई होती तो शायद मामला शुरू में ही शांत हो गया होता पर ऐसा हो नहीं पाया।
मुझे झटका तब लगा जब आरोपियों में रेहान हाशमी  का नाम सामने आया। रेहान हासमी एक ऐसा युवा है जो अपनी शायरी के चलते पूरे देश में वाहवाही लूट रहा है। वह मुशायरे की शान बन चूका है। उसने भदोही में अपनी पत्रकारिता व समाजसेवा के चलते भी अलग पहचान बनायीं है।
आप सोच रहे होंगे की विवाद के इतने दिनों बाद मैं यह क्यों लिख रहा हूँ। दरअसल आज नगर के कुछ स्थानों पर मैं गया। कई जगह ठण्ड के कारन लोग कांप रहे थे। अलावा नहीं जल रहे हैं। लोग रेहान को याद कर रहे थे। जब ठण्ड शुरू होती थी तो रेहान लोंगो से सहयोग लेकर ठेले पर लकडिया लादकर जगह जगह अलाव जलाया करता था। लोंगो की दुआये लेता था। यही वजह रही की लोग उसे याद कर रहे हैं। आज आरोपी बनाये जाने से वह गायब है। उसका पता नहीं है। पता नहीं वह कहा होगा। लोग उसे याद कर रहे हैं।
रेहान ने बताया था मुझे जब दरोपुर में विवाद हुआ तो वह घर पर था। सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर एक अधिकारी का फ़ोन आया और वह बुलाने पर गया ताकि वह लोंगो को समझा सके।
उस वक्त मैं ऑफिस में था जब फ़ोन आया मेरे पास और बताया गया की दरोपुर में विवाद हुआ है। ऑफिस से निकल कर कोतवाली पहुंचा। वह पर हलचल मची थी। पैदल दरोपुर की तरफ भगा। वह जाकर देखा तो हालात बेकाबू थे लोग तनाव में थे। अधिकारीयों के पसीने छूट रहे थे। विधायक जाहिद बेग का  सर फुट चूका था। भीड़ बेकाबू हो गयी थी। रेहान भीड़ को संभल रहा था। यह भीड़ रेहान के समझाने पर भी मानने को तैयार नहीं थी। वह लोंगो की गलिया सुन रहा था। कई लोंगो ने उसे भी इट पत्थर से मारे। पर वह डटा था। पोलिस भले ही पीछे थी किन्तु वह लोंगो को संभाल रहा था। माहौल ख़राब हो चूका था। लोंगो में भय था। अराजक तत्व अपने गंदे मंसूबो को अंजाम देने पर तुले थे। प्रशासन के लिए यह संकट का समय था। सुबह लोंगो ने बताया की रेहान रात भर अधिकारीयों के साथ मोहल्ला दर मोहल्ला जाकर ताजियादारो का अनुनय विनय किया। लोंगो से ताजिया दफ़न करने की मिन्नते की। किसी तरह ताजिया दफ़न हुआ।
घटना के लगभग एक सप्ताह बाद मामला उभर कर सामने आया की रेहान भी अराज़क तत्वों में शामिल है। ऐसा पुलिस का कहना रहा।
मैं बड़े अचरज में पड़ा। आखिर जो युवक  अधिकारी के बुलावे पर ही घटना स्थल पर गया और रात भर अधिकारियो के साथ ही रहा उसे विवाद भड़काने का मौका कब मिला। यदि यह सही है तो वह निश्चय ही बहुत चालाक है जो अधिकारियो को चकमा देकर विवाद भड़काने में भी लगा रहा।
होली के दिन मुझे रंगों से बहुत डर लगता है, पर रेहान रंगों में सराबोर हो जाता है। होली दीपावली पर जो मस्ती वह करता है शायद मैं भी नहीं कर पाया था। जो युवक अपनी शायरी से भदोही का नाम देश के जगहों पर जाकर रोशन कर रहा है। जो आने वाले दिनों में भदोही की पहचान बनने  वाला है। यदि वह वास्तव में वह दोषी है तो उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए। क्योंकि यदि उसने ऐसा किया तो  उसने मेरा भी विश्वास तोडा है। किन्तु इस मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उसका दोष क्या है, उसने कहा पर गलती की यह जानकारी मीडिया को भी मिलनी चाहिए। प्रशासन को चाहिए की उसकी गलतियों को उजागर करे और साक्ष्य के साथ सबके सामने रखे। पर उसका दोष नहीं है तो क्या वह जिस मानसिक दबाव से गुजर रहा है उसकी भरपाई कौन करेगा ...? 

12 टिप्‍पणियां:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

बेहतर लेखनी !!!

suresh yadav ने कहा…

bhadohi me daropur vivad me jis prakar ek udayiman kavi evam p;atrakar ke naam ko galat tareeke se fansaya gaya woh vastav me sthaniya prashasan ki galat mansikta ka parichayak hai , mai ghatnasthal par hi tha aur maine us waqt rehan hashmi ko ghayal awastha me unmadi bheed se hath jodte hue dekha , ye bhut galat parampara ki suruvat hai jis prakar use fansaya gaya aur sthaniya media ki chuppi bhi sandeh ke ghere me hai

utkarsh bhatt ने कहा…

rehan hashmi wo musalman hai jisne mehilal building me lagi bheeshan aag me fanse hindu parivaro ko nikalne ke liye apni jaan ki parvah nhi ki aur chaar manjila building me chadh gaya , aise vyakti par jhoota laanchan laga kar fasana bhut nindaniya hai

manoj yadav ने कहा…

rehan hashmi ji bilkul nirdosh hain , pata nhi prashasan ne aisa kyun kiya ye samajh ke pare hai

हरीश सिंह ने कहा…

ap sabhi ko dhanywad, sach bolne ki himmat ki apne..

Sabir Khan ने कहा…

Allah insaaf kare...
Itihaas gawah hai ki mazloomon pe zulm hote rahe hai...par jeet hamesha sachayi,insaaniyat aur imanwaalon ki hui hai hai...sabhi cheezo se upar uthkar hamara desh aur sanwidhan hai aur jo use zinda rakhega wohi sacha deshbhakt aur insaan hai..

Dua e khair...
Ya ilaahi har jaga teri ataa ka
saath ho
Jab pare mushkil sha'e mushkil
kusha ka saath ho
Ya ilaahi bhool jawu naza'ki
takleef ko
Shaadiye deedare husne Mustafa
ka saath ho
Ya ilaahi gor teera ki jab aayeh
sakht raat
Unke pyaare mu ki subha jaa fiza
ka saath ho
Ya ilaahi jub pare mahshar me
shore daar-o-geer
Amn dene waale pyaare peshwa
ka saath ho
Ya Ilaahi Jub Zabaane Baahar
Aayey Pyaas Se
Saahib-e-Kauthar Sha'e Jood-o-
ataa Ka Saath Ho
Ya ilaahi sard-e-mehri par ho jab
khurshid-e-hashr
Sayyad-e-besaaya ke zille-e-liwaa
ka saath ho
Ya ilaah garmi-e-mahshar seh jub
bharke badan
Daaman-e-mahboob ki thandi
hawaa ka saath ho

anand dubey ने कहा…

rehan hashmi ke saath anyay hua hai , harish ji ko badhai jo ki unhone is anyay ke viruddh apni awaz uthaee hai ....... anand dubey . sonbhadra

ashish jayswal ने कहा…

rehan hashmi bhai ke saath jo hua hai wo bhadohi polis ki hitlershahi hai jise bhadohi ka hindu samaj sahan nahi karega , ham bhadohi me hindu muslim ekta ke saath rahte hain , aur rehan hashmi bhai ne hamesa hindu muslim ekta ke liye kaam kiya hai ,, bhadohi polis ko unko clean chit dena padega
ashish jayswal , nai bazar bhadohi

deependra singh solanki ने कहा…

ye kaisa qanoon hai

SANIDHYA TIWARI ने कहा…

BILKUL DOSI NHI HAIN

sanjeev dixit ने कहा…

its not fair

vijay singh ने कहा…

rehan hashmi ji aapke saath insaaf zarur hoga