शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

ब्लॉग से प्यार और फेसबुक पर मस्ती


क्या डिम्पल और अंचल को अपना हक़ मिलेगा।।।।।?
हम सभी लोग जब भी घरेलु हिंसा की बात आती है, तो सभी एकजुट होने की बात करते है, सभी विरोध करने की बात कहते है, मित्रो अपनी बात को गंभीरता पूर्वक कहने और समझने का सबसे बेहतरीन जगह सिर्फ और सिर्फ ब्लॉग है, यही एक दुनिया नेट पर ऐसी है  जहा पर एक दुसरे से परिपूर्ण प्यार और सम्मान की कामना करते है, मैंने जो महसूस किया है, उसका सार यही है की यहाँ मोहब्बत  है जबकि फेसबुक पर मस्ती के सिवा गंभीरता का नामोनिशान नहीं है, मैंने देखा की फेसबुक पर गंभीर से गंभीर बात कह दीजिये तो उसे सुनने वाला कोई नहीं है, चाहे वे मीडिया के भाई बंधू हो या फिर राजनितिक व सामाजिक कार्यकर्ता सभी बस हाजिरी लगते है,
जबकि ब्लॉग पर गंभीर बातो पर ही बहस होती है, मैं कहना चाहता हु कई दिन पहले किसी डिम्पल मिश्रा ने मुंबई से मित्रता के लिए निवेदन भेजा तो मैं यह सोचकर एक्सेप्ट कर लिया की चले हमारी मित्रता सूची में महिला मित्र भी होनी चाहिए, जबकि हमारे यहाँ अधिकतर लोग समाजसेवी, अधिकारी,पत्रकार और ब्लोगर मित्र है, जब डिम्पल जी का चित्र देखा और प्रोफाइल चित्र देखा तो समझा यह मुमबई में रहने वाला कोई सुखी संयुक्त परिवार है, पर डिम्पल जी की दस्ता सुनी तो बहुत अफ़सोस हुआ, विपिन ने जब प्रेम किया था तो उसे निभाना चाहिए था, पर उसने ऐसा न करके सिर्फ डिम्पल जी को धोखा नहीं दिया बल्कि पूरे उत्तर भारत का अपमान किया है, ऐसे ही उत्तर भारतीयों ने अपनी नीचता का परिचय देकर यह साबित करते है की उत्तर भारतीय धोखेबाज़ होते है, जो भी हो जब डिम्पल जी अपनी बात लोंगो तक पहुंचा रही है तो यह बात विपिन मिश्रा के पास क्यों नहीं पहुंची क्यों नहीं वह समाज के सामने आ रहा है क्यों वह समाज से मुह चुरा रहा है, क्यों पुलिस विपिन के पक्ष में बोल रही है, सिर्फ इसीलिए की उसके पास पैसा है और डिम्पल अपनी मासूम बेटी अंचल  के साथ दाने दाने को मोहताज़ है वह दुसरे की दया पर पल रही है, जबकि उसका पति है, सास है, ससुर है सभी है, पर उसमे जो सबसे बड़ी कमी है वह है की वह गरीब है लिहाजा उसका कोई नहीं है, न कानून उसके साथ है  और ही समाज के वे लोग उसका साथ नहीं दे रहे है, जो समाज सेवा का दंभ भरते है, जो न्याय अन्याय की बात करते है, जो कहते है हम कानून के रखवाले है, सब है फेसबुक पर, पर किसी को कुछ दिखाई नहीं देता ...........?
हम बहुत दिन बाद अपने ब्लॉग परिवार में वापस आये  है, मित्रो हम चाहे फेसबुक से जुड़े हो या अख़बार से  पर, जहा तक हो सके हमें इस बात को अपने अपने तरीके से फैलाना है ताकि सच सामने आ सके और कोई भी महिला उत्पीडन का शिकार न हो सके, इसके लिए हम सभी को जागना होगा, समज को जगाना होगा, ब्लॉग परिवार को चाहिए की हम लोंगो को सन्देश दे को इस नयी मीडिया के माध्यम से हम भी सच की जंग  लड़ सकते है,
यहाँ पढ़े डिम्पल की व्यथा .... http://www.facebook.com/dimple.misra.7

1 टिप्पणी:

Dr. Ayaz Ahmad ने कहा…

बेहद उपयोगी आलेख ..
सादर !!!