रविवार, 22 जनवरी 2012

ब्लॉग परिवार में जो प्रेम है वह कही नहीं

आज कल व्यस्तता के चलते अधिक समय नहीं दे पाता, पर २० वर्ष के पत्रकारिता के जीवन में जितना मजा मुझे ब्लॉग जगत में आने के बाद मिला वह कभी नहीं मिला. वास्तव में बिना किसी से मिले भी लगता है जैसे है हम एक दुसरे को भलीभाती जानते है. जो प्यार और अपनापन यहाँ है कही नहीं है.   पिछले दिनों लखनऊ जाने का मौका मिला, कुछ आवश्यक कार्य वश गया था, दूसरे दिन ही लौटना था, मिथिलेश जी मिले सोचा लगे हाथ सलीम खान से भी मिल लू, दरअसल सलीम मुझे अधिक प्रिय इसलिए भी है क्योंकि सबसे अधिक लड़ाई उन्ही से हुई है और जिससे लड़ाई अधिक होती है वही सबसे ज्यादा प्रिय भी हो जाता है. दूसरी बात ब्लॉग जगत में आया भी उन्ही की वजह से हूँ, नावेल्टी सिनेमा के नजदीक उनकी आफिस है जहा वे ट्रावेल्स का कम करते है. अरे भाई वही टिकट वाला काम, मिलते ही हम दोनों गले लग गए, हमें यह महसूस ही नहीं हुआ की हम पहली बार मिल रहे है. ऐसा लग रहा था जैसे बहुत पुरानी जान पहचान हो. खैर जान पहचान तो पुरानी ही है पर मुलाकात पहली बार हुई थी, हम, मिथिलेश और सलीम भाई के बीच काफी बाते हुयी. हम लोंगो ने चाय पी फिर मिलने का वादा करके हम निकल गए, 
वास्तव में ब्लॉग परिवार एक सशक्त परिवार है. लेखनी की एक अनजानी सी शक्ति हम सभी को बांधे हुए है. हमारी सोच है की वर्ष का एक दिन ऐसा निर्धारित किया जाय जहाँ हम लोग अधिक से अधिक संख्या में मिले और आपस में विचार विमर्श करे. ऐसा नहीं है की ब्लोगरो के सम्मलेन नहीं हुए है, पर ऐसे सम्मलेन मेरी निगाह में सार्थक नहीं होते जहा पर उसे राजनितिक रंग दे दिया जाता है. किसी राजनेता या अधिकारी को मुख्या अतिथि बना देने से वह मजा नहीं आता जो आना चाहिए, यदि कोई ब्लोगर सम्मलेन करे और यह आयोजन लखनऊ में आयोजित हो तो शायद वर्ष में एक बार हम सभी को एक दूसरे से मिलने का सुनहरा मौका मिलेगा. 

5 टिप्‍पणियां:

तेजवानी गिरधर ने कहा…

really true

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Suhana safar mubarak ho apko .

Pallavi ने कहा…

आपकी बातों से सहमत हूँ ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

Patali-The-Village ने कहा…

सही कहा आपने । धन्यवाद।

हरीश सिंह ने कहा…

आप सभी को धन्यवाद