शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

परदेश का दर्द

मित्रो, आप सोच रहे होंगे की मैं परदेश की कोई घटना बयान करने जा रहा हु, या फिर कोई कविता लिखने जा रहा हु. जी नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है. अच्छा आप लोग बताये क्या कभी आप अपने घर में रहते हुए परदेशी होने का दर्द सहा है, नहीं न , चलिए यह रही आपकी बात. पर मैंने सहा है.. आप जानते है इधर काफी दिनों से मैं आप लोंगो से दूर रहा . आप लोग भले सोचे की मैं आप सब को भूल चूका हूँ,पर नहीं आपसे मिलने और बात करने के लिए मेरा दिल मुझे कचोटता रहता, पर क्या करे वही बात हो गयी कुछ तो मजबूरियां रही होगी यु ही कोई बेवफा नहीं होता......... ब्लोगिंग भी मेरा एक घर है और आप सभी लोग मेरे परिवार के सदस्य, पर शायद मुझे आप लोग भूल गए है,... भाई तभी तो किसी ने खोज खबर लेने की कोशिश नहीं की. बहुत दिनों के बात आज नेट पर बैठा हूँ तो सोचा क्यों न आप लोंगो को एक पाती ही लिख दी जाय. देखिये आप मने या न मने पर मैं आप लोंगो से दूर रहकर .... ऐसा प्रतीत कर रहा था जैसे घर छोड़कर परदेश में रहने आ गया हूँ. चलिए कोई बात नहीं अब तो रोजाना ही मुलाकात होगी.
देश -विदेश में काफी उठापटक हुयी. तो ब्लोगिंग की दुनिया में भी हुयी होगी. पहले तो मैं दो चार दिन बाकायदा अवलोकन करूँगा. फिर बारी-बारी सबके घर आऊंगा. अरे आप घबरा गए. डरिये मत भाई मैं आपके घर चाय पिने नहीं आ रहा हूँ. बल्कि आप सभी के ब्लोगों पर आऊंगा. अवलोकन करूँगा. कुछ विचार दूंगा.
ऐसा तो नहीं है न की मेरे आने से कुछ लोग परेशान हो गए हो. अरे भाई वही जो राहत महसूस कर रहे थे. नहीं भाया किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है. मैं अब काफी सुधर गया हूँ. किसी को परेशान नहीं करूँगा. बस एक को छोड़कर, अरे वाह  आप तो समझ गए,

4 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

स्वागत है आपका .......

आशुतोष की कलम ने कहा…

हरीश भाई हालाकी मैं भी स्वस्थ्य कारणों से कुछ दिन ब्लॉग से दूर था मगर आप की हालचाल तो
ले ही लेता था ..ये सरासर अत्याचार मेरे ऊपर ..आप ने लिखा है किसी ने भी खबर लेने की कोशिश नहीं की?????


दीपो का ये महापर्व आप के जीवन में अपार खुशियाँ एवं संवृद्धि ले कर आये ...
इश्वर आप के अभीष्ट में आप को सफल बनाये एवं माता लक्ष्मी की कृपादृष्टि आप पर सर्वदा बनी रहे.

शुभकामनाओं सहित ..
आशुतोष नाथ तिवारी

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

यहाँ लोग बहुत जल्द भूल जाते हैं हरीश जी .....:))

स्वागत है पुन :

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

अद्भुत अभिव्यक्ति