सोमवार, 25 अप्रैल 2011

मुस्लिम ब्लोगरों से : क्या यही इस्लाम है...?

जब मैं प्रेम और इंसानियत की बात करता हूँ तो कुछ ब्लोगर हम पर गालियों से प्रेम बरसाते हैं. पर मैं बुरा नहीं मानता, मुसलमान हमें हिन्दू मानता है, और कुछ हिन्दू ब्लोगर मुसलमानों का समर्थक ही नहीं बल्कि मुसलमान ही मानते हैं वे समझते हैं की मैं छाद्म्वेशधारी हूँ, कुछ लोंगो ने यह भी कहा की मैं अपने ब्लॉग की टीआरपी बढ़ाने के लिए विवाद खड़ा करता हूँ ......
बंधुओ मैं विवाद चाहता ही नहीं, बल्कि उसे जड़ से ख़त्म करना चाहता हूँ. मैं कोई साधू-संत या मौलवी नहीं की फूंक मारू और सब बदल जाये. मैं तो समझता हूँ मुझे छद्म वेशधारी बाबाओ और दकियानूसी विचारधारा के मुल्लाओ से दूर हो जाना चाहिए. धार्मिक ग्रन्थ जिन परिश्तिथियो में लिखे गए जब आदि मानव रहा करते थे. पूजा पद्धतियाँ वही हैं जिनका हम पालन करते हैं और उत्सव मनाते हैं. पर हिन्दू धर्म में ऐसा कही नहीं लिखा की जो इसे न माने उस पर अत्याचार करो. हा समाज के विरुद्ध और मानवता के विरुद्ध कार्य करने वाले के लिए दंड का प्राविधान अवश्य है.  
पर इस्लाम का हाल कुछ जुदा है. उसमे लिखी कई बाते विवादित हैं जो मानवता के विरुद्ध जाती है. इस्लाम को न मानने वाले मुशरिक यानि मूर्तिपूजक, काफ़िर जैसे शब्दों से नवाजे जाते हैं. आज कुरान के बारे में बोलने से हर कोई कतराता है. आखिर क्यों ..? किसी भी धर्म ग्रन्थ को पढ़कर यदि हमारे मन में सवाल उठते हैं तो उस धर्म के अनुयायियों का कर्तव्य बनता है की हमारी शंका का समाधान करें. न की उसे शरियत के खिलाफ कहकर बचते रहे,  कुरान में लिखी कई बातों पर आज भी सवाल उठाये जाते हैं. कुरान भी उस वक्त लिखा गया जब परिस्तिथिया आज से बिलकुल जुदा थी.  यदि आज के युग में उन सारी बातों का आचरण करेंगे तो उसका वही रूप होगा जो आशुतोष जी पोस्ट में है. यदि हमें स्वच्छ समाज बनाना है तो पहले मन को स्वच्छ बनायें. स्वच्छ्संदेश बनाने से क्या होगा. 
निचे दिए गया पोस्ट का लिंक भी देंखे. ..

एक ब्लॉग से लौट कर बिना किसी क्षमायाचना के......!!

यह पोस्ट राजीव ठेपदा   जी ने " भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" पर लिखी है, उसे भी पढ़े.

मेरी पोस्ट का मतलब किसी धर्म पर अंगुली उठाना नहीं होता बल्कि एक प्रश्न समाज के सामने रखना है. जिस पर लोग चर्चा करें की यह ख़त्म होनी चाहिए की नहीं. 
पिछली पोस्ट "मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती."
पर मुस्लिम ब्लोगरो को बोलना था पर कोई नहीं बोला और यह चुप्पी ही हमें दूर ले जा रही है, इसी चुप्पी के कारण आज हिन्दू मुसलमान के बीच दूरी है. जब तक एक दूसर के सवालो का जबाब हम नहीं देंगे तब तक शक के घेरे में रहेंगे.  अब एक प्रश्न और मुस्लिम ब्लोगरो से ..........
इस पोस्ट पर की गयी मेरी टिपण्णी.........
मैंने कब कहा आशुतोष जी की यह बात सही है, मैंने पहले ही कहा था की इस ब्लॉग के नियम सही है. कब गलत कहा. आज ऐसे ही कट्टर मुसलमान पूरे इस्लाम को बदनाम कर रहे है, ऐसे मुसलमान राष्ट्रद्रोही है ऐसे लोंगो को सरेआम बीच सड़क पर जूते से पीट कर मार देना चाहिए. राष्ट्रद्रोही और इंसानियत की हत्या करने वाले मुसलमानों को मैं कत्तई पसंद नहीं करता. और जो लोग इनका समर्थन करते हैं. ऐसे सभो लोंगो को मैं गद्दार समझता हूँ चाहे वे हिन्दू हो या मुसलमान,
आपने देखा यह भारत को औरंग की जमी बता रहा है और चाँद सितारा लहराने की बात कर रहा है. और वह किसके टिकट पर चुनाव लड़ रहा है. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस पार्टी के...... जो ऐसे लोंगो को बढ़ावा दे वे सभी गुनाहगार हैं. चाहे वे हिन्दू हो चाहे मुसलमान,, उसके लिए वे मतदाता भी दोषी हैं जो ऐसे पार्टी को वोट करते हैं जो इंसानियत की हत्या की बात करने वाले को बढ़ावा दे रहा है. जिन कुत्तो को सरेआम फंसी पर लटका देना चाहिए उसे चुनाव लडवाया जा रहा है. जो देश के मान-सम्मान और शान तिरंगे झंडो को जला रहा है उसे गोली से उड़ा देना चाहिए. चाहे वह किसी भी कौम का हो.. इस्लाम के नाम यह गंदगी खुद इस्लाम को बदनाम कर रही है.
मैं सभी मुसलमान भाइयों से अपील करना चाहूँगा. हमें यह बताएं........ क्या उनका इस्लाम ऐसा कहता है, यदि हां तो इस्लाम अच्छा कैसे. ...... ?
यह विवादित मसला नहीं बल्कि मानवता के लिए अति आवश्यक चर्चा का विषय है. यदि यही इस्लाम है तो इससे बुरा और कोई धर्म हो ही नहीं सकता.... ----------------------------
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मैं यह सवाल पूछना चाहता हूँ मैं हर उस ब्लोगर से जो ऐसे मसलो को विवादित कह विचार व्यक्त करने से इंकार कर देता है आखिर क्यों..?  . हम इसे कायरता मानते हैं, गीत, ग़ज़ल, कविता और कहानियां लिखकर साहित्यकार बने रहे और उन मसलो पर चर्चा करना ही बंद कर दे. जो मसले आज भी समाज के लिए घातक  बने हैं.  जरुरत इस बात की है कि हम उन सारे सवालों पर खुलकर एक दूसरे
से चर्चा करें. जब देश में इस्लाम के नाम पर, शरियत के नाम पर आतंक फैलाया जा रहा है, मानवता की हत्या की जा रही है, देश में तिरंगे जलाये जा रहे हैं, इस्लामिक झंडे फहराए जा रहे है तो हिन्दू निश्चित ही मुसलमानों को शक की दृष्टि से देखेगा. और इसका जवाब हर उस मुसलमान और उस कट्टरता के पोषक हिन्दुओ को भी देना होगा जो देश में अमन और शांति चाहता है,  नहीं तो कभी कश्मीर जैसे हालात  कही भी हो सकते हैं. गुजरात जैसी घटनाये कही भी हो सकती हैं.  जरुरी नहीं कि यह काम  मुसलमान ही करे. हालात पैदा होते है तो क्रांति के कारण ही बनते है.  जरुरत क्रांति की नहीं - शांति की है. धर्म के नाम पर आतंक की नहीं, मानवता और इंसानियत की रक्षा की है.....

अनुरोध -- इस चर्चा में अवश्य भाग ले....


7 टिप्‍पणियां:

तीसरी आंख ने कहा…

आपने वाकई मौलिक बात उठाई है

poonam singh ने कहा…

सौ प्रतिशत सही चिंतन, चुप रहने से ही विवाद बढ़ते हैं. हमारे दिल में जो सवाल हैं उन्हें पूछना ही चाहिए. निश्चित रूप से आप ज्वलंत मुद्दों पर बहस छेड़ रहे है जबकि इन मुद्दों से लोग बचना चाहते हैं. समयानुकूल चिंतन के लिए आभार. हमें भी जवाब चाहिए.

आशुतोष ने कहा…

हरीश जी
मैं आप जैसा ज्ञानी नहीं हूँ न ही बनना चाहता हूँ..
इतना जनता हूँ की जहाँ हिन्दू पर अत्याचार होगा मेरे यथासंभव लेखनी विरोध करेगी ही..
आप मानते क्यूँ नहीं की एक धर्मविशेष ऐसा है जो मार काट बचपन से ही सिखाता है..पहले बकरा फिर गाय...धीरे धीरे इन्सान को हलाक करो (उदाहरण तालिबान)
मानते क्यों नहीं की हिन्दू धर्म विस्तारवादी नहीं है अतः उसपर कुछ लोग जुल्म कर रहें है..
और हिन्दू धर्म के कुछ सेकुलर श्वान उनकी दलाली में लगे हुए है..मगर अब नहीं होगा ये..
याचना नहीं अब रण होगा
जीवन जय या की मरण होगा...

पहले जाइये उनकी सोच बदले..क्या कारण है की मुश्लिम बहुल इलाकों में हिन्दू ख़तम होता जा रहा है..
जरा इसका सेकुलर हरीश सिंह जी जबाब दें..

Abhi ने कहा…

लेख अच्छा है किन्तु इसमें गुजरात का नाम लेने से पहले गोधरा का नाम लेना चाहिए था. जो भी गुजरात का नाम लेता है उस पर मुझे गुस्सा आता है. जैसा गुजरात में हुआ अगर कशमीर में हुआ होता तो शायद वहा के हालात ऐसे न होते. गुजरात में शायद पहली बार हिन्दुओ ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया है. और आज जो कुछ हो रहा है उसे देखते हुए गुजरात जैसा प्रति-उत्तर देना अनिवार्य हो गया है. वरना गोधरा जैसा कांड होता ही रहेगा.

एम सिंह ने कहा…

इस सब हल्ले के पीछे मुझे एक चीज नजर आती है. अगर मेरे देखने का नजरिया सही है तो वह चीज है सियासत. गंदी सियायत ही हमें आपस में लड़ा रही है.
मेरे ब्लॉग पर इसी विषय में एक गीत-
समझो : अल्लाह वालो, राम वालो
http://mydunali.blogspot.com/2011/04/blog-post_22.html

Dr. shyam gupta ने कहा…

--यह तो सही है कि सही समय है हल्ला बोलने का...चुप रहने का समय चला गया जब हिन्दू चुप-चाप अत्याचार सह्ते थे --अब वे खुल कर ईंट का ज़बाव पत्थर से देंगे....

--हां,मुझे लगता है हरीश जी का मतलब यह है कि वे हिन्दू भी जो स्वयं को सेक्यूलर बता कर इन घटनाओं को नज़र अन्दाज़ कर रहे है..वे भी दोषी हैं ---सभी को जानना चाहिये कि ..अपने यहां अपने गद्दार भाई की गद्दारी के बिना कोई भी दुश्मन कुछ नहीं कर सकता ...अतः जो हिन्दू चाहे सरकार हो, बुद्धिजीवी, कोई भी जो एसी घटनाओं पर संग्यान लेकर उचित कठोर दन्डात्मक/
निन्दात्मक कार्यवाही नहीं करते वे भी दोषी ही नहीं गद्दार भी हैं उन्हें भी सबक सिखाया जाना चाहिये.......
---दुश्मन तो सामने दिखाई देता है उस से तो लडना है ही परन्तु अपने अन्दर छुपे गद्दार, दुश्मन अधिक खतरनाक होते हैं......

Abhi ने कहा…

मुझे नहीं लगता कोई मुस्लिम यहाँ आके कोई चर्चा करेगा या स्पष्टीकरण देगा.