शनिवार, 16 अप्रैल 2011

मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

मेरी सोच हमेशा यह रही है की प्रेम और इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता. पर कुछ लोग धर्म के प्रति इतने कट्टर होते हैं की उनकी कट्टरता खुद उन्ही के धर्म को बदनाम करती है. अभिव्यक्ति की स्वंत्रता सभी को है, पर यही स्वंत्रता जब दूसरे के धर्म को बदनाम करने का हथियार बने तो यह अत्यंत निंदनीय है. और ऐसे ब्लोगर हर कौम में है. ईश्वर के बनाये हर इन्सान से मैं प्रेम करता हूँ. पर गलत विचारों का समर्थन कभी नहीं करता. 
इससे पहले मेरी पोस्ट "माफियाओं के चंगुल में ब्लागिंग" में अनवर भाई ने यह कहा यदि मैं शिव जी बारे में गलत लिखा है तो माफ़ी मांग लेंगे. नीचे जिस पोस्ट का उल्लेख किया जा रहा है वह अनवर भाई ने दुसरे के ब्लॉग से अपने सामुदायिक ब्लॉग पर लगायी है, जिसका लिंक भी दिया गया है.  क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर चोट नहीं करती, खुले दिल से अपने विचार व्यक्त करें. अनवर भाई यह बताएं की यह गलत है या सही......... क्या वे माफ़ी मांगेंगे./ 
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एक अनुत्तरित सवाल जो हरेक शिवरात्रि पर पूछा जाता है .

क्या लिंग पूजन भारतीय संस्कृति है ?

           आज 'शिवरात्री' है। एक ऐसे भगवान की पूजा आराधना का दिन जिसे आदि शक्ति माना जाता है, जिसकी तीन आँखें हैं और जब वह मध्य कपाल में स्थित अपनी तीसरी आँख खोलता है तो दुनिया में प्रलय आ जाता है। इस भगवान का रूप बड़ा विचित्र है। शरीर पर मसान की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटा में गंगा नदी तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल को उन्होंने अपना वाहन बना रखा है।
          भारत में तैतीस करोड़ देवी देवता हैं, मगर यह देव अनोखा है। सभी देवताओं का मस्तक पूजा जाता है, चरण पूजे जाते हैं, परन्तु इस देवता का 'लिंग' पूजा जाता है। बच्चेबूढ़ेनौजवान, स्त्रीपुरुष, सभी बिना किसी शर्म लिहाज़ के , योनी एवं लिंग की एक अत्यंत गुप्त गतिविधि को याद दिलाते इस मूर्तिशिल्प को पूरी श्रद्धा से पूजते हैं और उपवास भी रखते हैं।
          यह भगवान जिसकी बारात में भूतप्रेतपिशाचों जैसी काल्पनिक शक्तियाँ शामिल होती हैं, एक ऐसा शक्तिशाली देवता जो अपनी अर्धांगिनी के साथ एक हज़ार वर्षों तक संभोग करता है और जिसके वीर्य स्खलन से हिमालय पर्वत का निर्माण हो जाता है। एक ऐसा भगवान जो चढ़ावे में भाँगधतूरा पसंद करता है और विष पीकर नीलकण्ठ कहलाता है। ओफ्फोऔर भी न जाने क्याक्या विचित्र बातें इस भगवान के बारे में प्रचलित हैं जिन्हें सुनजानकर भी हमारे देश के लोग पूरी श्रद्धा से इस तथाकथित शक्ति की उपासना में लगे रहते है।
          हमारी पुरा कथाओं में इस तरह के बहुत से अदृभुत चरित्र और उनसे संबधित अदृभुत कहानियाँ है जिन्हें पढ़कर हमारे पुरखों की कल्पना शक्ति पर आश्चर्य होता है। सारी दुनिया ही में एक समय विशेष में ऐसी फेंटेसियाँ लिखी गईं जिनमें वैज्ञानिक तथ्यों से परे कल्पनातीत पात्रों, घटनाओं के साथ रोचक कथाओं का तानाबाना बुना गया है। सभी देशों में लोग सामंती युग की इन कथाओं को सुनसुनकर ही बड़े हुए हैं जो वैज्ञानिक चिंतन के अभाव में बेसिर पैर की मगर रोचक हैं। परन्तु, कथाकहानियों के पात्रों को जिस तरह से हमारे देश में देवत्व प्रदान किया गया है, अतीत के कल्पना संसार को ईश्वर की माया के रूप में अपना अंधविश्वास बनाया गया है, वैसा दुनिया के दूसरे किसी देश में नहीं देखा जाता। अंधविश्वास किसी न किसी रूप में हर देश में मौजूद है मगर भारत में जिस तरह से विज्ञान को ताक पर रखकर अंधविश्वासों को पारायण, जपतप, व्रतत्योहारों के रूप में किया जाता है यह बेहद दयनीय और क्षोभनीय है।
          देश की आज़ादी के समय गाँधी के तथाकथित 'सत्य' का ध्यान इस तरफ बिल्कुल नहीं गया। नेहरू से लेकर देश की प्रत्येक सरकार ने विज्ञान के प्रचार-प्रसार, शिक्षा और भारतीय जनमानस के बौद्धिक विकास में किस भयानक स्तर की लापरवाही बरती है, वह इन सब कर्मकांडों में जनमानस की, दिमाग ताक पर रखकर की जा रही गंभीरतापूर्ण भागीदारी से पता चलता है। आम जनसाधारण ही नहीं पढ़े लिखे शिक्षित दीक्षित लोग भी जिस तरह से आँख मूँदकर 'शिवलिंग' को भगवान मानकर उसकी आराधना में लीन दिखाई देते हैं, वह सब देखकर इस देश की हालत पर बहुत तरस आता है।
          यह भारतीय संस्कृति है! अंधविश्वासों का पारायण भारतीय संस्कृति है ! वे तथाकथित शक्तियाँ, जिन्होंने तथाकथित रूप से विश्व रचा, जो वस्तुगत रूप से अस्तित्व में ही नहीं हैं, उनकी पूजा-उपासना भारतीय संस्कृति है! जो लिंग 'मूत्रोत्तसर्जन' अथवा 'कामवासना' एवं 'संतानोत्पत्ति' के अलावा किसी काम का नही, उसकी आराधना, पूजन, नमन भारतीय संस्कृति है?
          चिंता का विषय है !! कब भारतीय जनमानस सही वैज्ञानिक चिंतन दृष्टि सम्पन्न होगा !! कब वह सृष्टी में अपने अस्तित्व के सही कारण जान पाएगा!! कब वह इस सृष्टि से काल्पनिक शक्तियों को पदच्यूत कर अपनी वास्तविक शक्ति से संवार पाएगा ?
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क्या यह लेख नही बताता  की प्रेम मोहब्बत की बात करने वाले अनवर भाई अपना व्यक्तित्व खुद ही गिरा रहे हैं. 
यदि अनवर भाई के समर्थक है तो भी अपनी टिपण्णी दे. पर यह साबित करें की यह पोस्ट उचित है. मैं सभी मुस्लिम व हिन्दू ब्लागरो से निवेदन करूँगा की अपने विचार अवश्य रखें. 

71 टिप्‍पणियां:

आशुतोष ने कहा…

हरीश जी,
इस वाहियात लेख को मुझे लगता नहीं अनवर जमाल जैसा व्यक्ति लिखेगा..अगर उन्होंने लिखा है तो उनके मानसिक दिवालियेपन का परिचायक है...
कौन सा धर्म वैज्ञानिक दृष्टी से सही है इसका सबूत देने की जरुरत नहीं समझता...कहाँ जैव विविधता को मान्यता दी जाती है कहाँ घर में ही विवाह कर दिए जाते हैं बताने की जरुरत नहीं..मगर में यहाँ किसी और की पूजा या समाज पद्धति को गलत ठहराने नहीं आया हूँ..सुन्नी मुसलमान भाइयों के कुछ वक्तव्य रंगीला रसूल में लिखे है मगर मैंने कभी नहीं सार्वजानिक रूप से लिखा..क्यूकी वो क्या थे वो इस्लाम निर्णय करे..
अब मैं शिव का इतहास,शिवलिंग पूजा क्यों, और हिन्दू धर्म और विज्ञानं... पर लिखूंगा तो इस कूड़े करकट सदृश लेख की महत्ता बढ़ जाएगी...और ऐसे निरर्थक वाहियात और दुर्भावना से भरे निंदनीय लेख पर ज्यादा लिखकर लेख को महत्ता नहीं दे सकता..
अफ़सोस है अनवर जमाल जैसे जिम्मेदार दिखने वाले व्यक्ति ने इसे लिखा.
ॐ नमः शिवाय.....इश्वर उन्हें सद्बुद्धि दे

योगेन्द्र पाल ने कहा…

हमें चाहिए ही नहीं अनवर की माफी, इंसानों से गलती होने पर माफी की उम्मीद करते हैं|

@आशुतोष जी:

आपने अनवर जमाल क्यूँ लिखा है? क्या आपको लगता है कि यह व्यक्ति किसी धर्म से जुड़ा हुआ है? यह एक अधर्मी है इसलिए सिर्फ अनवर का प्रयोग किया जाए, ये मुसलमानों और इस्लाम को बदनाम करने के लिए पैदा हुआ है, इस जैसे लोगों की वजह से ही हिंदू-मुस्लिम दंगे होते हैं|

जिस प्रकार एक मछली सरे तालाब को गन्दा करती है ठीक वैसे ही ये भी इस्लाम का नाम डुबा रहा है|

इसके इस लेख को पढ़ने के बाद मैंने इसको इज्जत देनी बंद कर दी है

एक बार जाकर अनवर के ब्लॉग पढ़िए, आपको पता चल जायेगा कि ये कितना बड़ा मनोरोगी है

Swarajya karun ने कहा…

अनवर जी कुछ भी लिखने से पहले ज़रा याद कीजिए डॉ.इकबाल ये पंक्तियाँ -
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना .
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोंस्ता हमारा !
सारे जहां से अच्छा हिन्दोंस्ता हमारा !

Mahesh ने कहा…

jo sach hai use kahne me kya burai?

Anvar jee ne sach hi kaha hai. agr vishwas na ho to ki achche prakand pandit se ja ke poochho ki kya ye galat hai ?

magar wo pandit sachcha hona chahiye.
agr wo sachcha shiv bhakt hoga to hi sahi jawab de payega. warna apne desh me karodo dhongi baba hain jo bas hinduon ko hindutva ki sachchai se door karte ja rhe hain taaki unko pooja jaaye...

ROHIT ने कहा…

हा हा हा
बेचारा अनवर जमाल या इसका कोई चेला अब हिन्दु नाम महेश की आड़ मे कमेन्ट कर रहा है.
बेटा महेश
पहले अपने असली नाम से लिख.
बुर्के मे छिपना गंदी बात है बेटा.
ही ही

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

मानसिक दिवालियेपन का परिचायक है...

हरीश सिंह ने कहा…

व्यक्तिगत दुश्मनी की बात कभी अच्छी नहीं होती, यदि किसी के विचार गलत हैं तो उन्हें बदला भी जा सकता है. अफ़सोस यह है की हम किसी के गलत विचारों का विरोध भी गलत तरीके से करते हैं. भाषा पर नियंत्रण रखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराएँ, क्योंकि हमारा हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति कभी गलत शिक्षा नहीं देता. हमें हमेशा अपने संस्कारों पर ध्यान देना चाहिए.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

मैं आशुतोष जी का शुक्रगुज़ार हूं कि उन्होंने कहा कि ‘यह लेख मेरे द्वारा लिखित नहीं हो सकता।‘
और सचमुच ही यह लेख मेरे द्वारा लिखित नहीं है।
यह लेख दृष्टिकोण ब्लॉग वाले भाई साहब द्वारा रचित है। इसका उल्लेख भी मैंने कर दिया था और उस ब्लॉग का लिंक भी अपनी प्रस्तुति के साथ ही दे दिया था। अगर लेख को ढंग से पढ़ा होता तो आप लोग जान लेते कि इसका लेखक मैं नहीं हूं।
ऐसी ही एक और पोस्ट पर आप आए हैं और उसे एक अच्छी पोस्ट क़रार दिया है। लिंक नीचे है:

नीलकंठी ब्रजः वृंदावन की विधवाओं की दुनिया -राजेन्द्र सहगल

ROHIT ने कहा…

हरीश सिँह जी
आपकी सोच गलत है
आप राक्षसो को सुधारना चाहते है जब कि मेरी सोच राक्षसो के विनाश की है.
राक्षसो को सुधारने की सोच के कारण आज हम लोगो का ये हाल हो गया.
इतिहास केवल सजा के रखने के लिये नही होता है.
इतिहास इसलिये होता है ताकि आने वाली पीढ़िया उससे सबक ले और भविष्य मे ऐसी गलती न करे.
जरा याद करिये
अगर प्रथ्वीराज चौहान ने उस राक्षस मोहम्मद गौरी को 16 बार जीवनदान न दिया होता तो क्या आज देश का ये हाल होता.
लेकिन वो भी आपके जैसी राक्षसो को सुधारने वाली सोच से ग्रसित था.
और उसने गोरी को 16 बार ये सोच के छोड़ा कि ये सुधर जायेगा.
और आखिरकार यही मूर्खता उसको ले डूबी
और मुगलो का साम्राज्य दिल्ली मे स्थापित हो गया.
और उसके बाद इस देश मे क्या क्या हुआ बताने की जरुरत नही है. और जिसका दुष्परिणाम आज तक ये देश भोग रहा है.

अरे भगवान ने भी शिशुपाल को 100 गालिया देने तक माफ किया था
और उसके बाद उसका बध कर दिया था.
आप क्या अपने आपको भगवान से भी बड़ा समझते है
कि राक्षस जमाल और सलीम आपके धर्म को आपके भगवान को हजार गालिया दे रहे है और आप उनको अपने सीने से चिपकाये घूम रहे है.
इतनी सज्जनता मत दिखाइये कि वो कायरता बन जाये.निसन्देह
इस देश मे बहुत अच्छे मुसलमान भी है
उनसे किसी को कोई शिकायत नही.
लेकिन इसका मतलब ये नही है कि साँप को भी पाला जाये.
और आप दो ऐसे जहरीले साँप को पाल रहे है जो बार बार काट रहे है और आप उनका फन कुचलने के बजाय ये सोच कर गले मे टांगे फिर रहे है कि शायद ये काटना छोड़ दे.
तो टांगे रहिये .मुझे क्या फर्क पड़ता है. आपका जो मन आये वो करो
लेकिन हाँ दूसरो को भी ये मत समझाओ कि वो भी इन्हे पाले.
क्यो कि दूसरे आपके जैसी सोच नही रखते है.
दूसरो को साप का फन कुचलना अच्छी तरह आता है.

ROHIT ने कहा…

अनवर जमाल
मुझे पता था तुम ऐसा ही कहोगे.

वैसे मै तुम्हारी नस नस से वाकिफ हूँ
फिर भी पूछता हूँ

कि तुमने ये पोस्ट द्रष्टिकोण वाले ब्लाग से उठा कर अपने ब्लाग पर क्यो चिपकायी?

और तो और तुमने इसे जानबूझ कर अपने साझा ब्लाग पर लगाया.
ताकि ज्यादा से ज्यादा हिँदुओ की नजर इसपे पड़े.

तुम भंडाफोड़ू ब्लाग की तो कोई पोस्ट नही चिपकाते हो अपने ब्लाग पर.
केवल ढूंढ ढूंढ कर ऐसे ही ब्लागो की पोस्ट चिपकाते हो जिसमे हिँदु धर्म के बारे मे गलत लिखा हो.

क्यो कि तुम्हारी खुद की सोच भी ऐसी ही है.
खैर लगे रहो
तुम्हारे जैसे हजार आये और गायब हो गये
लेकिन सनातन धर्म का बाल भी न उखाड़ पाये.

एम सिंह ने कहा…

this is kind to got publicity, nothing else.

सारा सच ने कहा…

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

Smita ने कहा…

harish ji....dhanyawad...sach kahoon to mujhe is taraha ki bahs me koi dilchaspi nahi....bas yahi hai ki main hindu hoon aur apne dharm ke prati samarpit hoon.....shayad muslim hoti to bhi yahi karti....haan ye bhi sach hai ko koi itni abhdra bhasha ka prayog karta hai vo bhi kisi ki dharmik bhavnao k prati....vo atyant nindneey hai....

हरीश सिंह ने कहा…

जो लोग यहाँ पर अपने विचार रख रहे है. उन सभी का स्वागत है. ध्यान रखें हर व्यक्ति के अन्दर अच्छाई बुराई संयुक्त रूप से रहती है. गालियाँ देने या अपशब्दों का प्रयोग करने से हम सिर्फ दुश्मन ही बनाते हैं. दोस्त नहीं. हिंदी ब्लोगिंग को बढ़ावा देना है तो आप स्वयं अच्छे बने. साहित्यिक व्यक्ति को कभी भी नियंत्रण नहीं खोना चाहिए. हालाँकि मैं कोई भी कमेन्ट हटाऊंगा नहीं क्योंकि किस व्यक्ति की क्या मानसिकता है यह सभी लोग जाने. अनवर भाई ने कहा की यह पोस्ट दूसरी जगह से उठाई गयी थी, पर क्या वह बताने का कष्ट करेंगे की बुरी बातों को संगृहीत करना किस मानसिकता का परिचायक है. नेट पर बहुत सी अच्छाईयां भी भरी पड़ी हैं. साथ ही अत्यंत गंदे लेख भी हैं उन्हें क्यों नहीं लगते क्या धर्म के बारे में इतनी गन्दी बातें लिखना उचित है.

हरीश सिंह ने कहा…

रोहित जी मैं भगवान से बड़ा क्या उनकी पांव के धूल के बराबर भी नहीं हो सकता, पर हमारे उन्ही अवतारों या महापुरुषों ने ही सिखाया है की हिन्दू संस्कृति माफ़ करना भी सिखाती है. आपने खुद ही उदाहरण दिया है.

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

यही कारण है कि मैं ऐसे ब्लाग्स और ब्लाग लेखकों का कभी भी समर्थन नहीं कर पाता ।

ज्योति सिंह ने कहा…

dharm ko lekar koi vivad sahi nahi ,itne vichar hai ,alag alag aastha ke dhang hai ,shaanti banaye rakhna jaroori hai ,kisi ko thesh na pahunchaye yahi uchit hai ,insaaniyat se upar kuchh nahi .

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ हरीश जी ! यह सवाल आपने ठीक उठाया है कि मैंने यह लेख क्यों आप लोगों के सामने रखा है ?
मैं आपको जवाब दूं उससे पहले आपको शिव के वास्तविक रूप से परिचित होना ज़रूरी है और शिव के प्रति मेरी मान्यताओं से भी, तभी आप जान पाएंगे कि जो हमारा ईश्वर है और जो उसके द्वारा रचित हमारे आदिमाता-आदिपिता हैं, उनका निरादर नित्य कौन और कैसे कर रहा है ?
देखिए मेरी लेख-श्रृंखला और सोचिए कि आपके आरोप सही हैं या ग़लत ?
हमारे पूर्वज हमें परमेश्वर शिव से जोड़ते हैं जो कि कल्याणकारी है The Lord Shiva and First Man Shiv ji

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

क्या लिंग पूजन भारतीय संस्कृति है ?
...इस प्रश्न का उत्तर भारतीय इतिहास में सैंधव काल से पुरावशेषों के रूप में भी मौज़ूद है.प्रश्नकर्ता को भारतीय इतिहास का अध्ययन करना चाहिए.

बेनामी ने कहा…

भाई लोगो अगर आप अच्छे लेख पढ़ना चाहते हो तो
पधारे
bhandafodu.blogspot.com

Ram Kishore ने कहा…

देवाधिदेव शिव के प्रति लेख पढ कर दुख हुआ लेकिन सवाल करना चाहता हूं ऐसे लोगो से जो कि साम्प्रदायिकता का जहर घोलते हैं। एक कडवी जुलाब सी बात यह है कि अनवर भाई यह बता सकते है कि इस्लाम मूर्ति पूजा का विरोधी हैं तब वह उस काबा शरीफ को सिर्फ चुमने के लिए उसके चक्कर लगाने के लिए हज के नाम पर क्यों जाता है। हिन्दू सहनशील हैं इसलिए उसकी सहनशीलता का फायदा न तो उठाए और न किसी को उठाने दे। अब मैं कहता हूं वह भी सुने और गांठ बांध कर रख ले। मैने अपने ही मुसलीम भाईयों से तकरीर में सुना हैं कि जन्नत क्या है....! यदि मन पवित्र हो तो मां की योनी को चुमने से जन्नत नसीब होती है। शिव स्वरूप हैं नर का और शक्ति स्वरूप है नारी की ऐसे में शिव लिंग और शक्ति योनी हैं। वह इस बात का संकेत देती हैं कि बीज और खेत की तरह है; जब तक खेत में बीज नहीं डलेगा तब तक खेत में फसल पैदा नहीं होगी। माता - पिता के बिना संभोग के संतान की प्राप्ती नहीं होगी। शिव निराकार है और शक्ति भी उन्हे प्रतिक स्वरूप अर्धनारीश्वर इसलिए कहा जाता हैं कि वे ही जनक और जननी हैं। शिव लिंग भी है और योनी भी इसलिए शिवलिंग को ज्योर्तिलिंग कहा जाता है। शिव को समझने के लिए शिव के स्वरूपो को अच्छी तरह से पहचानों और फिर बात करों। हम भी सवाल उठा सकते हैं कि पहले कौन आया आदम या हौवा , खुदा या पैगम्बर लेकिन सवाल उठाने से पहले समझना जरूरी हैं कि इस्लाम कब आया; बिना सुन्नत के कोई मुसलमान बना हैं। बच्चे के जन्म लेने के बाद ही उसे मुसलमान बनाया हैं जन्म लेने से पहले वह मुसलमान नहीं था। ईसा और मूसा के पहले ही शिव इस संसार की रचना कर चुके थे। ऐसे में शिव को समझना हैं तो पहले आंनद को समझो क्योकि शिव परमानंद हैं। रजनीश कहते हैं कि संभोग से समाधी का रास्ता ही परमानंद तक पहुंचाता हैं ऐसे मे साधना जरूरी हैं। किसी भी धर्म के बारे में या देवी - देवता के बारे में कुछ भी कह देना ओझी और घटिया मानसिकता हैं। सोच को बदलो जिस दिन सोच बदल जाएगी उस मक्का - मदीना जाकर उस काबा शरीफ को चुमने के बजाय या उसकी परिक्रमा लगाने के बजाए किसी शिवालय की खैखट पर स्वंय को पाओगें। शिव का अनादर करना बंद करे इसी में भलाई हैं। इसे धमकी या चेतावनी न समझे यह सीख है। मैं भी 27 वर्षो से लेखन एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं । मैने बहुंत कुछ लिखा है उससे ज्यादा सीखा हैं। शिव का समझना है तो बारहलिंग आना यहां पर दुनिया का एक मात्र अजुबा है वे पत्थरो पर ऊकेरे गए बारह ज्योर्तिलिंग जिनके दर्शन से हो सकता हैं कि अनवर भाई की ओझी मानसिकता में परिवर्तन आ जाए। भगवान शिव उन्हे बुद्धि दे और मां सूर्यपुत्री ताप्ती सुबुद्धि ताकि अनवर कोई ऐसी दुबारा गलती न करे जिससे किसी की भावना को आहत पहंुचे।

Ram Kishore ने कहा…

हरीश जी
आपकी फोटो को देख कर नहीं लगता कि आप मेरे से बडे हो सकते है। 23 मई 1964 का जन्म वह भी बैतूल जिले के एक छोटे से गांव रोंढा में जहां पर मेरा बचपन का साक्षी चम्पा का पेड और मेरी कुल देवी खेडापति माता मैया हैं।
आपके ब्लाग पर कोई भी व्यक्ति यदि छदम नाम से कुछ भी लिख दे आप और चुपचाप सहन कर ले यह अच्छी बात नहीं हैं। मेरा एक मित्र बिन्देश तिवारी का तकीया कलाम है कि कायरता जिस चेहरे का श्रंगार करती हैं उस पर मख्खी भी बैठने से इंकार करती हैं। दोस्त सबसे अच्छी सीख यह हैं कि पढने योग्य लिखा जाए और ऐसा पढे जो लिखने योग्य हो। मुझे अनवर का लेख काफी पीडा जनक लगा। मेरी पत्रकारिता में कम से दस हजार से अधिक मेरे लेख , कहानी , रिर्पोट , सत्यकथाएं , भारतीय गंगा - जमुना संस्कृति एवं हिन्दु - मुस्लीम एकता पर आधाति देश भर में छपे है। शिव आलोचना निदंनीय कृत्य हैं और जिसने भी शिव निंदा या उनका उपहास उडाया है उनका अंत जल्द आया हैं। शिव के बारे में अनवर क्या जानता है उसे तो अपने वालिद के वालिद का नाम भी सही ढंग से याद नहीं होगा। हमारे पास हर बात के प्रमाण है चाहे कैलाश की बात हो या फिर अमरनाथ की या फिर महाकाल की हर जगह शिव प्रमाण है उसके निराकार स्वरूप के जिसे कोई आज तक समझ नहीं सका है।
मुझे दुख है कि हम आज भी आस्तीन में सांप पाल क्यों रखे है। शिव की तरह हमे सांपो को गले में रखना चाहिए लेकिन हम बेवजह सांपो को आस्तीन में पाल कर रखे हैं वह भी ऐसे पनियल सांपो को जिनमें जहर होता ही नहीं है।
हरीश जी आप स्वंय इस देश से माफी मांगे क्योकि आपको ऐसे विवादो मे पडना ही नहीं चाहिए था। मुझे तो आपके सिंह होने पर भी शक होने लगा। सिंह तो शिकार करने से पहले गर्जना करता है कायरो एवं सियारो की तरह किसी का जूठन नहीं खाता। आपको स्वंय लिखना था जो आप की मंशा है लेकिन अनवर का नाम लेकर यदि आपने अपने मन की बात लिखी है तो मुझे शर्म आ रही हैं कि हम आज भी अपने बीच दानवो को पहचान नहीं पा रहे हैं।

Dr. shyam gupta ने कहा…

मुझे लगता है यह पोस्ट पहले भी आचुकी है और मैं इसका जवाब दे चुका हूं....शरारत के तौर पर वही बार-बार दोहराई जा रही है...

१- जमाल को सोचना चाहिये कि जो वस्तु दुनिया की सबसे महत्व पूर्ण कर्म के लिये है...सन्तानोत्पत्ति..क्या उससे बढकर पूजनीय कुछ और हो सकता है.... यदि इतने महत्वपूर्ण वस्तु को नहीं पूजें तो क्या उस ’काले पर्दे वाले..’ को पूजें जो किसी काम का नहीं...
२- आदि-शिव ने ब्रह्मा की समस्या, कि विश्व में स्वतः स्वचालित सन्तानोत्पत्ति व्यबस्था कैसे हो ताकि श्रष्टि का कार्य सम्पूर्ण हो,को सुलझाने के लिये अर्ध्नारीश्वर रूप में प्राकट्य किया और स्वयं को दो भागों मे विभक्त करके--स्त्री-पुरुष के विभिन्न भाव रूप उत्पन्न किये जो प्रथम मानव मनु व शतरूपा सहित प्रत्येक प्राणि संसार में प्रविष्ठ हुए और ...नर नारी भाव समास्त संसार में अवतरित हुआ , जिसके बिना आगे श्रष्टि नही चल सकती थी...
--तो हुए न शिव व शिवलिन्ग आदि-देवाधिदेव ..और लिन्ग पूजन वैग्यानिक चिन्तन द्रष्टि....
---सिर्फ़ भारत में नहीं विश्व के अन्य तमाम देशों में भी लिन्ग-पूजन किसी न किसी रूप में होता है..

Dr. shyam gupta ने कहा…

१--महेश जी सही कहा आपने--मनवर ने लिखा तो ठीक है पर बच्चों की रटन्त इमला की भांति अर्थ जाने/ समझे बिना...क्या सचाई को कोई कभी छिपा पाता है...हिन्दू-सनातन धर्म की इतनी बढी सचाई व वैग्यानिकता/सामाजिकता यही है कि लिन्ग पूजा को भी उसने छिपाया नहीं...जबकि काले पर्दे के पीछे वाले कमरे में किसी को झांकने भी नहीं दिया जाता ..किसी को पता ही नही वहां क्या है...
२--स्मिता जी...बहस से स्पषता आती है...सारी मुश्किल यही तो है कि हिदू धर्म के बारे में हिन्दू ही अग्यानी रहते हैं और विधर्मी, विदेशी उसका फ़ायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं...कुछ ग्यान बढाइये और बहस में भाग लीजिये ..
३-राम किशोर जी ने बहुत सही कहा ..पैदा होते समय हर इन्सान हिन्दू होता है, सुन्नत व बप्तिस्मा से वह मुस्लिम व ईसाई बनता है...तो अन्य सब दो नम्बर के हुए....इसीलिये हिन्दू शिवलिन्ग को पूजते हैं...

हरीश सिंह ने कहा…

डॉ. गुप्ता जी, अनवर ने कहा था किओ अगर मैं कोई गलत पोस्ट शिव जी के बारे में लगाया था तो माफ़ी मागुंगा. लिहाजा मैंने यह पोस्ट लगाई, मुझे पता है आप जवाब दे चुके हैं. पर रामकिशोर की बात का जवाब नहीं दूंगा क्योंकि उन्हें पूरी बात नहीं मालूम.

Swarajya karun ने कहा…

यह सच है कि जिस किसी ने भी यह विवादास्पद आलेख लिखा है, या ब्लॉग पर पोस्ट किया है, उसे भारतीय संस्कृति और आध्यात्म के बारे में ज़रा भी ज्ञान नहीं है. कोई भी धर्म इंसान की निजी आस्था का मामला होता है. किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत है.कलम और विचारों का उपयोग समाज में प्रेम और सदभावना के विकास के लिए होना चाहिए. धार्मिक झगडों में समय नष्ट करने के बजाय हम सबको अपनी लेखनी का उपयोग देश में व्याप्त गरीबी , बेरोजगारी , महंगाई ,और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं पर जन-जागरण के लिए भी करना चाहिए .

Mithilesh dubey ने कहा…

समझ में नहीं आ रहा कि क्या कहूं , अब चूंकि लेख पढ‌ लिया तो कुछ तो जरुर कहूंगा । पहली बात ये कि अगर अनवर भाई ने ये लेख लिखा है तो उनको जल्द ही किसी अच्छे डाक्टर से ईलाज की जरुरत है। दूसरी बात ये कि इस लेख को लिखने में जितना दोषी वह लेखक है उतने ही हरीश जी भी हैं । इसलिए आप लोगों से निवेदन है कि इस तरह के लेखों को ज्यादा तवज्जो मत दीजिए ।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

ईश्वर, जिसका एक नाम संस्कृत-हिंदी में शिव भी है , मैं उसकी उपासना करता हूं
जो लेख हरीश जी ने यहां पेश किया है, वह मेरा नहीं है। इसलिए मुझ पर ऐतराज़ फ़िज़ूल है। ईश्वर, जिसका एक नाम संस्कृत-हिंदी में शिव भी है , मैं उसकी उपासना करता हूं और शिव जी जो कि प्रथम पुरूष हैं वे आदि पिता हैं। ऐसा मैं मानता हूं और उनका आदर करता हूं। आप लोग यह अच्छी तरह जान लें, इसीलिए मैंने आपको अपने लेख का लिंक भी दिया था। इसके बावजूद यहां जो भी आ रहा है, मुझे बुरा-भला कहता हुआ ही आ रहा है।
राम किशोर, कौन हैं आप ?
क्या आपने मेरे लिखे लेख पढ़े ?
किस मुसलमान आलिम की तक़रीर में आपने वह बेहूदा बात सुनी ?
किसी की भी नहीं, केवल अपने मन से ही बना कर कह डाली। नफ़रत और जहालत आपके दिलों में कूट-कूट कर भरी हुई है।
एक डाक्टर श्याम गुप्ता जी और आ गये। दोनों मिलकर बता रहे हैं कि लिंग ये करता है और योनि ये करती है। शर्म आनी चाहिए दोनों को।
माता-पिता संभोग करते हैं। यह बात औलाद खूब जानती है लेकिन मैंने आज तक एक भी लड़का-लड़की ऐसी नहीं देखी, जिसने अपने मां-बाप की यौन क्रीड़ा के चित्र या मूर्ति बनाई हो। हरेक आदमी इसे एक ज़लील हरकत समझता है। मां-बाप को आदर देने के लिए उन्हें नंगा करने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें नंगा करना, उनका निरादर और अपमान करना है।
हिंदू समुदाय शिव जी और माता पार्वती का अपमान नित्य कर रहा है और कह रहा है कि हम पूजा कर रहे हैं, हम उन्हें आदर दे रहे हैं।
ग़लत हरकतें और अपमान खुद कर रहे हैं और जो ऐसी हरकतें करने से रोक रहा है, उसे कह रहे हैं कि आप अपमान कर रहे हैं।
हमें लिंग-योनि के रहस्य समझाए जा रहे हैं।
ज़ुबान बंद करने के लिए इस्लाम पर बेबुनियाद ऐतराज़ गढ़े जा रहे हैं।
जाहिल आदमी, न इंसानियत का पता है और न ही अदब-लिहाज़ का पता।
कहीं से चार हरफ़ लिखना सीख लिया तो हमें पनियाली सांप बता रहा है, फ़र्ज़ी प्रोफ़ाइल से।
क्या शिव जी पर हिंदुओं का कॉपीराइट है ?
शिव जी अगर हैं या हुए हैं तो उनका संबंध सभी से है या उनका संबंध केवल मूर्तिपूजक हिंदुओं से ही है ?
जो लेख ऊपर पेश किया गया है, जिसने भी यह लिखा है, उसकी शैली भी ग़लत है और शिव जी की बारात में भूत-पिशाच आदि जाने का ब्यौरा उसने जिन पुराणों से दिया है, उनमें भी डाक्टर श्याम गुप्ता जी मिलावट होना बताते हैं। अतः वे भी प्रामाणिक नहीं हैं।
शिव जी के बारे में, जिसके जी में जो ऊल-जलूल आ रहा है, बके जा रहा है।
जो बात आप अपने पिता जी और अपने राष्ट्रपति के बारे में नहीं कह सकते, उसे इतनी आदरणीय हस्ती के बारे में कैसे कह सकते हैं ?
मैंने यह लेख अपनी ‘हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल‘ में बहस की ग़र्ज़ से पेश किया था और चाहता था कि इस लेख का खंडन ज़ोरदार तरीक़े से किया जाए ताकि शिव जी की महिमा सबके सामने आ जाए और शिवरात्रि पर यह चर्चा बंद हो जाए कि वे भांग पिया करते थे आदि आदि।
जो आदमी शिव भक्ति में मुझसे बढ़कर होने का दावा करता हो, वह उनका ढंग से आदर ही करना सीख तो मैं यही बहुत समझूंगा।

तीसरी आंख ने कहा…

अनवर जी के स्पष्टीकरण के बाद विवाद समाप्त हो जाना चाहिए

Richa Srivastava ने कहा…

according to my view their are certain things on which we shouldn't raise questions as they are our old custom nd religon
we should respect the belief of all the religon as God is one but exist in different form

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है. मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता? अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं

ROHIT ने कहा…

अनवर जमाल
तुमसे अब क्या बात करु?
तुम्हारे कर्म और मानसिकता इतनी गँदी है कि कोई भी व्यक्ति तुमसे बात तो दूर तुम्हारी शक्ल भी नही देखना चाहता.
तुमसे इतना ही कहूंगा
कि तुम अपनी हद मे रहो उससे आगे मत बढ़ो.

तुमने कहा कि क्या शिव पर हिँदुओ का कापीराईट है.
तो मै कहता हूँ हाँ है.

शिव जी क्या है ? और सनातन धर्म क्या है?
अब हमे तुम्हारे जैसे लोगो से जानने की जरुरत नही है.
हमे अपने धर्म के बारे मे सब पता है.

अच्छा होगा कि तुम अपने इस्लाम के बारे मे लोगो को बताओ. ओर जो लोगो के मन मे इस्लाम के प्रति घ्रणा भरी है उसको दूर करो. ताकि लोग कुरान को जलाये नही.
जैसे अभी अमेरिका मे पादरी टेरी जोँस ने जलायी है.

गंगाधर ने कहा…

दुसरे के धर्म पर कीचड़ उछालना कई ब्लोगरो की आदत बन चुकी है, इसमें मुसलमान ही नहीं हिन्दू ब्लोगर भी शामिल है. यदि अनवर जमाल और सलीम खान इतने ही बुरे हैं तो मैं उन सभी कथित हिन्दुओ से पूछना चाहता हूँ. जो इन लोंगो का समर्थन करते हैं. हरीश भाई जब सच सामने लाते हैं तो उन्हें गालियाँ मिलती हैं. प्रेम भाईचारे की बात करते हैं तब गालियाँ मिलती है और गालियाँ देने वाले भी हिन्दू ही होते हैं. अनवर ने यह पोस्ट लगाकर बहुत ही गलत काम किया है. उनका कहना है की यह दुसरे के ब्लॉग की पोस्ट है. क्या ऐसा ही मैं करने लगू और भंडाफोडू ब्लॉग से पोस्ट उठाकर अपने ब्लॉग पर लगाना शुरू कर दू तो मुस्लिम ब्लोगर चुप रहेंगे. यह सवाल तो मुस्लिम ब्लोगरो से पूछा गया था फिर वे चुप रहकर ऐसी पोस्ट का समर्थन क्यों करते हैं.
अनवर को उतना बुरा नहीं मानता, उससे अधिक मैं सलीम को बुरा मानता हूँ. जो हिन्दू ब्लोगर उसके सामुदायिक ब्लॉग से जुड़े हैं. वे खुद को वह से हटा सकते हैं कदापि नहीं क्योंकि सब नाम के भूखे हैं. और हिन्दू बनते हैं. ऐसे दोगले हिन्दुओ से धर्म बदनाम हो रहा है.

गंगाधर ने कहा…

दुसरे के धर्म पर कीचड़ उछालना कई ब्लोगरो की आदत बन चुकी है, इसमें मुसलमान ही नहीं हिन्दू ब्लोगर भी शामिल है. यदि अनवर जमाल और सलीम खान इतने ही बुरे हैं तो मैं उन सभी कथित हिन्दुओ से पूछना चाहता हूँ. जो इन लोंगो का समर्थन करते हैं. हरीश भाई जब सच सामने लाते हैं तो उन्हें गालियाँ मिलती हैं. प्रेम भाईचारे की बात करते हैं तब गालियाँ मिलती है और गालियाँ देने वाले भी हिन्दू ही होते हैं. अनवर ने यह पोस्ट लगाकर बहुत ही गलत काम किया है. उनका कहना है की यह दुसरे के ब्लॉग की पोस्ट है. क्या ऐसा ही मैं करने लगू और भंडाफोडू ब्लॉग से पोस्ट उठाकर अपने ब्लॉग पर लगाना शुरू कर दू तो मुस्लिम ब्लोगर चुप रहेंगे. यह सवाल तो मुस्लिम ब्लोगरो से पूछा गया था फिर वे चुप रहकर ऐसी पोस्ट का समर्थन क्यों करते हैं.
अनवर को उतना बुरा नहीं मानता, उससे अधिक मैं सलीम को बुरा मानता हूँ. जो हिन्दू ब्लोगर उसके सामुदायिक ब्लॉग से जुड़े हैं. वे खुद को वह से हटा सकते हैं कदापि नहीं क्योंकि सब नाम के भूखे हैं. और हिन्दू बनते हैं. ऐसे दोगले हिन्दुओ से धर्म बदनाम हो रहा है.

गंगाधर ने कहा…

मैं सलीम खान के ब्लॉग स्वच्छ्संदेश पर गया था, यह व्यक्ति केवल इस्लाम का प्रचार कर रहा है. यह हमेशा हिन्दुओ को नीचा दिखता है. और इसके सामुदायिक ब्लॉग से जो भी हिन्दू जुड़ा है, वह गद्दार है, राष्ट्रद्रोही है. और हरीश भाई आपको भी मैं वही कहूँगा क्योंकि आप तो उसके संगठन में पदाधिकारी है. क्यों आप लोग उसके बनाये घर में जाकर बार-बार जूता खा रहे है.

rubi sinha ने कहा…

क्यों आप लोग उसके बनाये घर में जाकर बार-बार जूता खा रहे है.
bahut sahi kaha aapne. samman se samjhauta nahi karna chahiye.

vishwajeetsingh ने कहा…

किसी भी वाद को सम्पूर्णता से जाने बिना उसकी निन्दा करना व्यर्थ हैं ।
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com

vishwajeetsingh ने कहा…

किसी भी वाद को सम्पूर्णता से जाने बिना उसकी निन्दा करना व्यर्थ हैं ।
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com

बेनामी ने कहा…

anwar bhai ne achchhe lekh bhi likhe hai.

kirti hegde ने कहा…

यह पोस्ट दुसरे के ब्लॉग से उठाकर जब अनवर भाई ने लगायी होगी तो निश्चित ही उनकी मानसिकता सही नहीं रही होगी. पर हरीश भाई ने भी तो वही काम किया है. जिस पोस्ट के लिए अनवर को कोसा जा रहा है वाही काम इन्होने क्यों किया. किसी की पोस्ट पर आपत्ति जताने का यह कौन सा तरीका है. एक बात मैंने देखि है. हिन्दू ब्लोगरो से मुस्लिम ब्लोगर अच्छे हैं. कम से कम वे बहन बेटियों की इज्ज़त करते हैं. किसी अहसास की परतें समीक्षा ब्लॉग पर हमें जो गालियाँ दी गयी, उससे मैं मर्माहत हूँ. मैंने कब कहा प्रोफाइल में लगी फोटो मेरी है. बहुत सी महिला ब्लोगर ऐसी हैं जो किसी न किसी कारन वश अपना फोटो काल्पनिक लगाती है,.
यदि उन कट्टर हिन्दुओ की निगाह में मैं हिन्दू ही नहीं हूँ तो माफ़ करें मुझे ऐसी हिन्दू बननी भी नहीं है. जहाँ माँ-बहन-बेटी को गालियाँ दी जाती है... मैं आप सभी से पूछना चाहती हूँ. क्या भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म यही शिक्षा देता है.

kirti hegde ने कहा…

यह पोस्ट दुसरे के ब्लॉग से उठाकर जब अनवर भाई ने लगायी होगी तो निश्चित ही उनकी मानसिकता सही नहीं रही होगी. पर हरीश भाई ने भी तो वही काम किया है. जिस पोस्ट के लिए अनवर को कोसा जा रहा है वाही काम इन्होने क्यों किया. किसी की पोस्ट पर आपत्ति जताने का यह कौन सा तरीका है. एक बात मैंने देखि है. हिन्दू ब्लोगरो से मुस्लिम ब्लोगर अच्छे हैं. कम से कम वे बहन बेटियों की इज्ज़त करते हैं. किसी अहसास की परतें समीक्षा ब्लॉग पर हमें जो गालियाँ दी गयी, उससे मैं मर्माहत हूँ. मैंने कब कहा प्रोफाइल में लगी फोटो मेरी है. बहुत सी महिला ब्लोगर ऐसी हैं जो किसी न किसी कारन वश अपना फोटो काल्पनिक लगाती है,.
यदि उन कट्टर हिन्दुओ की निगाह में मैं हिन्दू ही नहीं हूँ तो माफ़ करें मुझे ऐसी हिन्दू बननी भी नहीं है. जहाँ माँ-बहन-बेटी को गालियाँ दी जाती है... मैं आप सभी से पूछना चाहती हूँ. क्या भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म यही शिक्षा देता है.

poonam singh ने कहा…

जिसने भी यह पोस्ट लिखी होगी निश्चित रूप से वह पागल होगा. और अनवर भाई ने यह पोस्ट अपने ब्लॉग पर लगाकर हिन्दू धर्म का और भगवन शिव जी का अपमान किया है उन्हें माफ़ी मंगनी चाहिए. मुस्लिम ब्लागर चुप क्यों है.
और कीर्ति जी आपका जो अपमान हुआ है वह निश्चित रूप से गलत है. हमें लगता है नकाब के पीछे छुपकर हिन्दू का ढोंग रचने वाले धर्म का मजाक उदा रहे हैं. वे हिन्दू तो क्या मुसलमान नहीं हो सकते या फिर यह कहिये की वे इन्सान ही नहीं हैं. सच कहने की हिम्मत सिर्फ हरीश भाई में हो सकती है.

बेनामी ने कहा…

Harish ji Namskar
aap apna email dekar sampark kareyn.
rajeevkumar905@gmail.com
0991850406
Delhi, CP

ROHIT ने कहा…

कीर्ती जी समीक्षा ब्लाग पर किसी बेनामी ने आपको गलत कहा था.
तो आपने ये भी देखा होगा कि मैने उस बेनामी का विरोध किया था . क्यो कि मुझे भी बहुत गलत लगा . क्यो कि आप हमारी बहन जैसी है और अपनी बहनो का अपमान मुझे किसी कीमत पर बर्दाश्त नही है.
और मैने समीक्षा जी से उस बेनामी का कमेँट को मिटाने के लिये भी कहा.
लेकिन कीर्ती जी आपने भी एक गलती की.
आपने उस पोस्ट को समझे बगैर ही समीक्षा जी को गंदा आदमी कह दिया.
जब कि वो पोस्ट सलीम के उस पोस्ट का जबाब थी जिसमे वो हिँदु धर्म का मजाक उड़ा रहा था.
हालाकि मै समझ गया था कि आपको कुछ गलतफहमी हो गयी थी. इसी वजह से आपने ऐसा कहा होगा.

ROHIT ने कहा…

साथ हि मैने आपकी तरफ से ये भी कहा था
ROHIT said...
@बेनामी
किसी महिला से इस तरह अपमान
जनक बात करना अच्छी बात
नही है.
कीर्ति हेगड़े अभी नयी ब्लागर है.
और
उनको अभी पूरा मामला पता नही है .
इसलिये गलतफहमी मे वो इस तरह
की बात कर रही है.
जैसे ही उनकी गलतफहमी दूर
होगी वो खुद ही सब समझ जायेँगीँ.
आखिर वो भी एक हिन्दु है
और हिन्दु धर्म का अपमान होने
पर उनका भी खून खौलेगा.और फिर
वो हिन्दु धर्म का अपमान करने
वालो पर खुद
ही रानी लक्षमीबाई की तरह टूट
पड़ेँगी.
April 16, 2011 2:21 AM

ROHIT ने कहा…

और उसके बाद मैने ये भी कहा
ROHIT said...
और कीर्ति से भी एक बात
कहना चाहूंगा.कि
तुम्हे भी किसी लेख
की प्रष्ठभूमि जाने वगैर इस तरह
के कमेँट नही देने चाहिये.
शास्त्रो मे कही गयी एक बात
को हमेशा याद रखो.
"शठे शाठयं समाचरेत"
मतलब दुष्ट्रो के साथ
दुष्टता का ही व्यवहार
करना चाहिये.
अगर तुम्हारे सामने कोई हिँदु धर्म
का मजाक उड़ाये,उसका अपमान
करे, देवी देवताओ को गालिया दे.
तो तुम क्या करोगी ?
जाहिर बात है उस पापी का मुँह
नोच लोगी.
तो वो ही काम अहसास भाई कर
रहे है.
सलीम और जमाल पिछले दो तीन
सालो से हिँदुओ को मुसलमान बनाने
की मानसिकता लिये इस ब्लाग
जगत मे हिँदु धर्म, और देवी देवताओ
का अपमान कर रहे है,
ग्रंथो की गलत सलत व्याख्या कर
रहे है.
उसी के जबाब मे अहसास जी और
शर्मा जी उन दुष्टो को मुहतोड़
जबाब दे रहे है.
और तुम्हे भी, बाकि हिँदुओ की तरह
उनका साथ देना चाहिये.
न कि इस तरह
उनका हौसला गिराना चाहिये.
मुझे उम्मीद है कि तुम्हे
अपनी गलती का अहसास
हो गया होगा.
April 16, 2011 6:04 AM

ROHIT ने कहा…

और फिर जिस बेनामी ने आपको गलत कहा था उसने भी माफी मांगी और कहा
Anonymous said...
@रोहित भाई ,
क्षमां चाहूँगा अपनी कठोर
प्रतिक्रिया के लिए लेकिन मुझसे ये
सब देखा नहीं गया, एक ओर
तो समीक्षा जी इतनी कठिनता से
इन दुष्टों को मुंह तोड़ जवाब दे रहे
हैं और दूसरी ओर अपने ही लोग
उनकी कब्र खोदने में लगे हैं, अगर
कीर्ति ने शालीनतापूर्वक
समीक्षा जी को अपने
असहमति दर्ज करवाई
होती तो मुझे कोई
आपात्ति नहीं होती क्यूंकि हम
इस्लाम के उन
कट्टरपंथी लोगों की तरह नहीं हैं
की जो हम कह रहे वही सही है ओर
तुम्हे इसे
मानना ही पड़ेगा वरना तुम्हारा सर
कलम कर दिया जाएगा,हमारे
तो यहाँ पर किसी भी विषय पर
विचार-विमर्श ओर शास्त्रार्थ
की परम्परा बहुत पुरानी है ,
लेकिन कीर्ति ने समीक्षा जी के
साथ जिस प्रकार की तू-तड़ाक ओर
अपमानजनक भाषा का प्रयोग
किया वो सचमुच असहनीय है, मैं
पूछता हूँ उसने कितनी बार
ऐसा सलीम खान के समक्ष करने
की हिम्मत की है?
April 16, 2011 7:23 AM

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ब्लागरों के नाम संदेश:-
मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता?

मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.
आपका अपना नाचीज़ दोस्त रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/ Dr. Purushottam Meena 'Nirankush' ने कहा…

मेरा साफ तौर पर मानना है कि हमें दूसरों के धार्मिक और निजी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, विशेषकर हिन्दू-मुसलमानों को तो कभी नहीं, क्योंकि इससे समाज एवं धर्म के ठेकेदारों को हमें आपस में लड़ाने का अवसर मिलता है| जहाँ तक इस आलेख में वर्णित तथ्यों की प्रस्तुति का सवाल है तो मेरा सवाल है कि ये सारी सामग्री क्या हमारे हिन्दू धर्म ग्रंथकारों ने ही अनवर या अन्य लोगों को उपलब्ध नहीं करवाई है? अनवर मुसलमान है तो हमारे गुस्से के शिकार हैं, लेकिन यदि यही बात हिन्दुओं द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में पढने को मिले तो क्या करेंगे? हमें बिना किसी पूर्वाग्रह के इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि आखिर ऐसी बातें क्यों लिखी जा रही हैं? क्या इनका लक्ष्य हिन्दुओं और हिन्दू धर्म को बदनाम करना है या वैज्ञानिक सच्चाई को सामने लाना है? हमें इस बात पर भी विचार करना होगा कि ये बातें हिन्दू धर्म ग्रंथों का हिस्सा क्यों हैं? मूल लेखकों का इन बातों को लिखने के पीछे क्या मकसद रहा होगा? कमें दूसरों पर गुस्सा करने से पहले हमारे घर को ठीक से देख लेना चाहिए! इसी में देश की और मानवता की भलाई है! आगे सभी की मर्जी!

PARAM ARYA ने कहा…

डा. मीणा जी से सहमत .
ऋषि दयानंद ने भी अपना सारा जीवन पाखंड का खंडन करने में खपा दिया था और शैव परिवार में जन्म लेने के उपरान्त भी शिव लिंग की पूजा कभी नहीं की . इसमें न कोई सार है और न ही कोई वैज्ञानिकता . उनके बाद भी आर्य समाज ने मनुष्यों को जागरूक करने के उद्देश्य से 'पोपलीला' खोलने वाला साहित्य प्रकाशित करने का क्रम जारी रखा है . शिवलिंग पूजा से सम्बंधित कुछ सामग्री मेरे ब्लॉग पर भी मौजूद है. आप देख सकते हैं कि वाममार्गियों ने हमारे धर्म का स्वरुप कितना विकृत कर दिया है ?
http://vedictoap.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html

शिवलिंग और पार्वतीभग की पूजा की उत्पत्ति पुराणों में
इसकी उत्पत्ति की कथाएं विभिन्न स्थानों पर विभिन्न रूपों में लिखी हुई मिलती हैं , देखिये हम यहां कुछ उदाहरण उन पुराणों से पेश करते हैं , यथा
1- दारू नाम का एक वन था , वहां के निवासियों की स्त्रियां उस वन में लकड़ी लेने गईं , महादेव शंकर जी नंगे कामियों की भांति वहां उन स्त्रियों के पास पहुंच गये ।यह देखकर कुछ स्त्रियां व्याकुल हो अपने-अपने आश्रमों में वापिस लौट आईं , परन्तु कुछ स्त्रियां उन्हें आलिंगन करने लगीं ।उसी समय वहां ऋषि लोग आ गये , महादेव जी को नंगी स्थिति में देखकर कहने लगे कि -‘‘हे वेद मार्ग को लुप्त करने वाले तुम इस वेद विरूद्ध काम को क्यों करते हो ?‘‘यह सुन शिवजी ने कुछ न कहा , तब ऋषियों ने उन्हें श्राप दे दिया कि - ‘‘तुम्हारा यह लिंग कटकर पृथ्वी पर गिर पड़े‘‘उनके ऐसा कहते ही शिवजी का लिंग कट कर भूमि पर गिर पड़ा और आगे खड़ा हो अग्नि के समान जलने लगा , वह पृथ्वी पर जहां कहीं भी जाता जलता ही जाता था जिसके कारण सम्पूर्ण आकाश , पाताल और स्वर्गलोक में त्राहिमाम् मच गया , यह देख ऋषियों को बहुत दुख हुआ । इस स्थिति से निपटने के लिए ऋषि लोग ब्रह्मा जी के पास गये , उन्हें नमस्ते कर सब वृतान्त कहा , तब - ब्रह्मा जी ने कहा - आप लोग शिव के पास जाइये , शिवजी ने इन ऋषियों को अपनी शरण में आता हुआ देखकर बोले - हे ऋषि लोगों ! आप लोग पार्वती जी की शरण में जाइये । इस ज्योतिर्लिंग को पार्वती के सिवाय अन्य कोई धारण नहीं कर सकता । यह सुनकर ऋषियों ने पार्वती की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया , तब पार्वती ने उन ऋषियों की आराधना से प्रसन्न होकर उस ज्योतिर्लिंग को अपनी योनि में धारण किया । तभी से ज्योतिर्लिंग पूजा तीनों लोकों में प्रसिद्ध हुई तथा उसी समय से शिवलिंग व पार्वतीभग की प्रतिमा या मूर्ति का प्रचलन इस संसार में पूजा के रूप में प्रचलित हुआ । - ठाकुर प्रेस शिव पुराण चतुर्थ कोटि रूद्र संहिता अध्याय 12 पृष्ठ 511 से 513

बेनामी ने कहा…

डा. पुरुषोतम मीणा जी.
आप इस ब्लाग पर भी पधारे .यहाँ पर भी वैग्यानिक सच्चाई को सामने लाया जा रहा है .
bhandafodu.blogspot.com

ABHIVYAKTI-अभिव्यक्ति ने कहा…

इतनी टिप्पणियाँ पढ़ने के बाद मैं असमंजस में पड़ गया हूँ। अनवर भाई ने जो लेख दूसरे ब्लॉगर के माध्यम से दिया है उस संदर्भ में अनवर भाई कहते हैं कि वे शिव जी का सम्मान करते हैं लेकिन हिंदू समाज में व्याप्त बुराई को बहस का मुद्दा बनाना चाहते थे। हो सकता है, पर जिस लेखक ने यह लेख लिखा है उसकी नियत निश्चित रूप से वैमनस्यता से भरी है। आज प्रत्येक धर्म में ऐसी अवांछनीय परंपराएँ विद्यमान हैं जो उस धर्म के मूल रूप में शामिल नहीं हैं। हिंदू धर्म भी इसका अपवाद नहीं है। एक समय ऐसा था जब इन परंपराओं को मानना इंसान की विवशता होती थी पर आज परिस्थितियाँ अलग हैं- विशेषकर भारत एवं अन्य ऐसे देशों में जहाँ व्यक्ति की स्वतंत्रता सच में महत्वपूर्ण है। लेकिन यह जरूरी है कि दूसरों की आस्था पर टिप्पणियाँ करने से यथासंभव बचा जाए।

सञ्जय झा ने कहा…

kullam-kul.....nishkarsh......

satya ke liye aashta chahiye.....joki
nihayat hi vyaktigat hota hai........

tathya ke liye tark/praman chahiye..joki samoohik vimarsha se nikalta hai.....

'dharm ki had tabhi toot-ti hai...
jab bhi 'bhai-log'.....prem-paigam ke jad se bahar nikalte hain......

'thora samjhdari dikhao.....bhailog


sadar...

हल्ला बोल ने कहा…

हरीश जी आपने मेरी टिपण्णी हटा दी, मैंने आपके कई लेख पढ़े, आपमें हिंदुत्व है पर थोडा अलग तरीके का, आप धर्म का सम्मान करते हैं, पर आप गलत बातों का विरोध भी करते हैं, आपकी पोस्ट
एक ऐसा दृश्य जिसने मानवता का सर शर्म से झुका दिया. सच लिखा है. क्या यह एक हिन्दू ऐसा कर सकता है, कदापि नहीं, यह एक मुसलमान ही कर सकता है, आप हमारे ब्लॉग हल्ला बोल से जुड़कर देंखे वहा पर क्या गलत होता है, आप यही बताना सबको, आपको न कोई गाली देगा और न ही आपको अपशब्द कहेगा,

Mohinee ने कहा…

ऐसे गलत विचारोको हम दुर्लक्षित करते है!

जाट देवता ने कहा…

बकवास करने दो, कमैंट मत दो?

नारायण भूषणिया ने कहा…

हरीश सिंह जी आप मेरे ब्लॉग में आये धन्यवाद. आपके आग्रह पर किसी अनवर की पोस्ट आपके ब्लॉग पर पढ़ा. बहुत दुःख हुआ. कृपया इस प्रकार की बकवास पढने के लिए अपने अनुशरणकर्ताओं को आग्रह न करें.अनवर की चुराई हुई पोस्ट का प्रचार आपके ब्लॉग से हो यह भी अच्छा नहीं है.कुछ सृजनकारी एवं प्रेरक सामग्री के प्रचार में योगदान करें. नारायण भूषणिया
संपादक "क्रांतिरथ छत्तीसगढ़"
narayanbhushania.blogspot.com

Anti Virus ने कहा…

नारायण नारायण,
कैसी सोच है इन भुष्निया जी की
कहते है :
बलि प्रथा धार्मिक विश्वास से जुडी है, उन आस्थाओं पर प्रहार करना उस धर्म की खिलाफत करना है,उनकी परम्परा, संस्कृति को बिगाड़ना है। जो कतई उचित नहीं है।
(मेरे अखबार "क्रांतिरथ छत्तीसगढ़" के २० अक्टूबर २०१० के अंक में प्रकाशित सम्पादकीय)
http://narayanbhushania.blogspot.com/2010/10/blog-post_24.html

Anti Virus ने कहा…

चंद्रपुर चंद्रहासिनी देवी के समक्ष बलि दिए जाने का पुरजोर विरोध फिर हुआ। बरसों से चली आ रही बलि प्रथा की खिलाफत कुछ वर्षों से होने लगी है। नवरात्री में देवी के समक्ष पशु बलि धार्मिक परंपरा और आस्था से जुडी है। आधुनिक चश्में से देखने वाले इसे अन्धविश्वास मानें, मगर वे कौन होते हैं किसी धर्म विशेष की परंपरा को ख़त्म करने वाले?
हिन्दू धर्म की मान्यता,परम्परा और उनकी आस्था पर जब तब प्रहार किया जाता रहा है और यह सिलसिला जारी है। देवी के समक्ष बलि का विधान धार्मिक कर्मकांड से जुड़ा है। मनौती मानने वाले बलि देते हैं जो उनके धार्मिक विश्वास से जुड़ा है। चंद्रपुर में बलि प्रथा विरोधी स्वरों के खिलाफ दिलीप सिंह जूदेव ऐसी ही धार्मिक आस्था के साथ उठ खड़े हुए हैं जो हिन्दुओं की अस्मिता, आस्था की रक्षा है।
बलि प्रथा को अंधविश्वास,कुरीतियों का नाम देने वाले कौन हैं?
http://narayanbhushania.blogspot.com/2010/10/blog-post_24.html

हल्ला बोल ने कहा…

क्या आप सच्चे हिन्दू हैं .... ? क्या आपके अन्दर प्रभु श्री राम का चरित्र और भगवान श्री कृष्ण जैसा प्रेम है .... ? हिन्दू धर्म पर न्योछावर होने को दिल करता है..? सच लिखने की ताकत है...? महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवा जी, स्वामी विवेकानंद, शहीद भगत सिंह, मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद जैसे भारत पुत्रों को हिन्दू धर्म की शान समझते हैं, भगवान शिव के तांडव को धारण करते हैं, जरूरत पड़ने पर कृष्ण का सुदर्शन चक्र उठा सकते हैं, भगवान राम की तरह धर्म की रक्षा करने के लिए दुष्टों का नरसंहार कर सकते हैं, भारतीय संस्कृति का सम्मान करने वाले हिन्दू हैं. तो फिर यह साझा ब्लॉग आपका ही है. एक बार इस ब्लॉग पर अवश्य आयें. जय श्री राम

नम्र निवेदन --- यदि आप सेकुलर और धर्मनिरपेक्ष हिन्दू बनते है तो आप जैसे लोग यहाँ पर आकर अपना समय बर्बाद न करें. पर चन्द शब्दों में हमें यह जरूर बताएं की सेकुलर और धर्मनिरपेक्षता का मतलब आपको पता है. यदि पता न हो तो हमसे पूछ सकते हैं. हम आपकी सभी शंकाओ का समाधान करेंगे.
हल्ला बोल-

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

अनवर को कहे की एक बार मां के गर्भ में पुनः जाये और तब पता करे की बाहर आने के लिए शिव लिंग की आवश्यकता पड़ती है या नहीं . बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद १ मुसलमान हा न !

शोभा द्विवेदी मिश्रा ने कहा…

ye astha aur ishwar ke prati vishwas ka sawaal hai ! Anvar ji ka lekh bahut hi nindaniya hai ...

सत्य गौतम ने कहा…

मूलचंद जी के लेख से कुछ आगे जारी रखते हुए …….
अभी तो मात्र इतना ही कहा जा सकता है कि स्त्री मर जाती है, स्त्री पैदा होती है लेकिन उसके दुर्गति की शाश्वतता बनी रहती है। इंतजार है नई स्त्री के पैदा होने की जो विद्रोह कर सके। ब्रह्मा, विष्णु और शिव हिन्दू धर्म में ईश्वर की तीन सर्वोच्च प्रतीक हैं। ब्रह्मा उत्पत्ति, विष्णु पालन और शिव संहार के देवता माने गये हैं। इस रूप में ये एक-दूसरे के पूरक दिखते हैं लेकिन वैष्णवों के मध्य हुए संघर्षों से यह सिद्ध होता है कि प्रारम्भ के किसी काल-खंड में शिव और विष्णु एक-दूसरे के विरोधी विचारधारा के पोषक और संवाहक थे। पालक होते हुए भी तथाकथित अधर्मियों का विनाश करने के लिए विष्णु ही बार-बार अवतार लेते हैं। सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती इनकी पत्नियों के नाम हैं। आइये देखें कि यौन-विज्ञान के महारथियों ने इनका किस प्रकार चित्रण किया है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव का सरस्वती, लक्ष्मी और पर्वती के साथ पत्नी के अतिरिक्त अन्य सम्बन्ध का उल्लेख इस लेख के दूसरे खंड में किया जा चुका है। आगे बढ़ने से पूर्व स्त्रियों के प्रति इस वीभत्स काम-कुंठा की अभद्र मानसिकता की एक बानगी देखिये जो ‘खट्टर काका’ के अन्तिम पृष्ठ पर अथर्ववेद के हवाले से उद्धृत किया गया है-यावर्दैीनं पारस्वतं हास्तिनं गार्दभं च यत्‌/यावदश्वस्य वाजिनस्तावत्‌ से वर्धतां पसः। (अथर्व ६/७२/३)
अर्थात्‌ ‘‘कामदंड बढ़कर वैसा स्थूल हो जाय जैसा हाथी, घोड़े या गधे का…।”
इस लम्पट और उद्दंड कामुकता के वेग का प्रभाव ऐसा पड़ा यहाँ के यौनाचार्यों पर कि देवी तक की वंदना करते समय उनके कामांगों का स्मरण करना नहीं भूलते। उदाहरण-वामकुचनिहित वीणाम/वरदां संगीत मातृकां वंदे।
बायें स्तन पर वीणा टिकाये हुए संगीत की देवी की वंदना करते है। (खट्टर काका, पृष्ठ १६६)
स्मरेत्‌ प्रथम पुष्पणीम्‌/रुधिर बिंदु नीलम्बराम्‌/घनस्तन भरोन्नताम्‌/त्रिपुर सुन्दरी माश्रये (खट्टर काका, पृष्ठ १६५)
‘प्रथम पुष्पिता होने के कारण जिनका वस्त्र रक्तरंजित हो गया है, वैसी पीनोन्नतस्तनी त्रिापुर सुन्दरी का आश्रय मैं ग्रहण करता हूँ।
कालतंत्र में काली का ध्यान-घोरदंष्ट्रा करालास्या पीनोन्नतपयोधरा/महाकालेन च समं विपरीतरतातुरा। (वही, पृष्ठ १६६)
कच कुचचिबुकाग्रे पाणिषु व्यापितेषु/प्रथम जलाधि-पुत्री-संगमेऽनंग धाग्नि/ग्रथित निविडनीवी ग्रन्थिनिर्मोंचनार्थं चतुरधिक कराशः पातु न श्चक्रमाणि। (वही, पृष्ठ १६७)
लक्ष्मी के साथ चतुर्भुज भगवान्‌ का प्रथम संगम हो रहा है। उनके चारों हाथ फंसे हुए हैं। दो लक्ष्मी के स्तनों में, एक केश में, एक ठोढ़ी में। अब नीवी (साड़ी की गाँठ खोलें तो कैसे? इस काम के लिये एडीशनल हैंड (अतिरिक्त हाथ) चाहने वाले विष्णु भगवान्‌ हम लोगों की रक्षा करें-पद्मायाः स्तनहेमसद्मनि मणिश्रेणी समाकर्षके/किंचित कंचुक-संधि-सन्निधिगते शौरेः करे तस्करे/सद्यो जागृहि जागृहीति बलयध्यानै र्ध्रुवं गर्जता/कामेन प्रतिबोधिताः प्रहरिकाः रोमांकुरः पान्तु नः।अर्थात्‌ लक्ष्मी की कंचुकी में भगवान का हाथ घुस रहा है। यह देखकर कामदेव अपने प्रहरियों को जगा रहे हैं- उठो, उठो घर में चोर घुस रहा है। प्रहरी गण जागकर खड़े हो गये हैं। वे ही खड़े रोमांकुर हम लोगों की रक्षा करें। पार्वती की वंदना-गिरिजायाः स्तनौ वंदे भवभूति सिताननौ, तपस्वी कां गतोऽवस्थामिति स्मेराननाविव,….अंकनिलीनगजानन शंकाकुल बाहुलेयहृतवसनौ/समिस्तहरकरकलितौ हिमगिरितनयास्तनौ जयतः।(वही, पृष्ठ १६८)तो यह कामांध मस्तिष्क की वीभत्स परिणति जो देवी-देवताओं तक को नहीं छोड़ती लेकिन प्रचार किया जाता है कि देश की महान्‌ संस्कृति स्त्रियों को पूज्य घोषित करती है
http://hindugranth.blogspot.com/2010/10/blog-post.html

sagar ने कहा…

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना .
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोंस्ता हमारा !
शायद लेखक इन पंक्तियों को भूल कर केवल धर्मे विशेस में कमी निकलकर आपसी प्रेम भावना को कम करने पर उतारू हैं

HINDUSTAN VICHAR ने कहा…

Harish Ji, aapka blog padhkar bahut maza aaya... aapke blog mein jo baat aapne likhi hai woh wakiye vicharniye hai... Shubkamnaye

HINDUSTAN VICHAR ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
किलर झपाटा ने कहा…

आदरणीय मदन शर्मा जी,
जमाल बाबू से आप बहस में ना जीत पायेंगे। कारण ये है कि जमाल जी हिन्दी ब्लॉगजगत में मूर्खता और बेवकूफ़ियों का सबसे बड़ा नगाड़ा हैं। और आप तो न नगाड़ेबाज हो न अखाड़ेबाज, मेरी तरह। ये महाशय सिर्फ़ नगाड़ेबाज और अखाड़ेबाज दो ही लोगों से घबराते हैं। मेरे ब्लॉग पर आप इनकी दीन हीन दशा हमेशा देख सकते हैं। वहीं पर ये अपनी टोपी सहित पट्ट पाये जाते हैं।
शर्मा जी आपको स्मरण कराता हूँ, आपने इनसे मिलती जुलती एकमात्र वस्तु इस असार संसार में देखी होगी। मालुम क्या ? ही ही

बिल्ली का गू ।
हा हा
जो ना लीपने का होता है ना ही पोतने का। एम आय राँग ?


लो जमाल जी लो धोबी पछाड़।
आप कहते हो:-
(@ Rajpurohit ji ! हनुमान जी को भगवान तो मेरे पूर्वज श्री रामचंद्र जी ने भी नहीं माना भाई .)

जवाब:-
रामजी, आप जैसे बेसिरपैर दिमाग वालों के पूर्वज कहाँ से हो गये ? आप या आपके पूर्वज कन्वर्टेड याने मार मार मुसलमान बनाये गये थे क्या ?
और सुनो जब राम ने कहा कि तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई तब ही वो भगवान हो गये क्योंकि भगवान का भाई भगवान अण्डर्स्टुड।
आपके यहाँ तो अल्ला मियाँ सण्ड मुसण्ड याने सिंगल माने जाते हैं शायद। अब जब उनकी खुद किसी से रिश्तेदारी नहीं तो बताइये आप से क्या होगी यू टोपीबाज मामूली इंसान ?
इसीलिये शायद अल्ला मियाँ से निराश होकर आप भगवान राम को अपना पूर्वज बतलाने लग पड़े हैं। हो जाता है अक्सर निराशा में ऐसा। मैं और मदन शर्मा जी आपका यह दुख समझ सकते हैं।

जमाल जी नं २,
आप कहते हो:-
(मदन शर्मा जी ! भगवान का जो अर्थ आप बता रहे हैं उसे आप संस्कृत के किसी शब्दकोष में तो दिखा नहीं सकते , आप जैसे लोग खुद ही किसी भी चीज़ को भगवान बना लेते हो और किसी भी शब्द का कुछ भी अर्थ घोषित कर देते हो. आपको अपनी बात के पक्ष में प्रमाण देना चाहिए. आपकी बात सही होगी तो मैं आपकी बात मान लूँगा.)

यार जमाल बाबू, आप शब्दकोष (लुगत) भी मुसलमानी मोहल्ले के मीना बाजार से खरीदते हो। वहाँ कहाँ मिलेगा इसका अर्थ। अरे जब सारी की सारी Earth ही आप जैसे व्यर्थ (टोपीबाज मुल्लों) जो दर‍असल यह छुपाने के लिये पहनी जाती है कि इस टोपी के नीचे कोई खोपड़ी (दिमाग) ही नही है) लोगों से भरी पड़ी हो तो तब ऊपरवाले पर बह्स करने का क्या अर्थ ?
हा हा और आपने जब अपने वालिद की बात नहीं मानी कि बेटा और कोई भले पैदा हो तो तू मत पैदा हो जाना, तब भी आप पैदा हो ही गये, तो शर्मा जी का दिया कोई भी प्रमाण क्या मानेंगे ?
ही ही।

जमाल बाबू नं ३
आप कहते हो:-
(@ मदन शर्मा जी ! आप संधि-विच्छेद करके जो अर्थ जबरन निकाल रहे हैं उसका आधार और स्रोत क्या है ?
किसी ग्रन्थ का हवाला तो दीजिये)


देखो जी, संधि-विच्छेद (खतना) के मास्टर तो आप ही लोग हो इसलिये इसका और स्रोत वही समझ लीजिये और रही बात ग्रन्थ की तो वो इस्लाम में होता है क्या ? आय डोण्ट थिंक सो।
हा हा

जमाल बेकाबू नं ४
आप कहते हो:-
(@ शर्मा जी ! आपके पास समय नहीं है तो हम तो आपको बुलाने नहीं गए थे . हमारे पास आये थे तो सोचकर आते कि अब वो ज़माने नहीं रहे कि जब लोग पंडत की बात इसलिए मान लेते थे कि पंडत जी कह रहे हैं . लोगों के इसी भोलेपन का फायदा उठाकर आपने जानवरों को इंसानों का भगवान घोषित कर दिया . घोर पाप किया पंडत जी आप जैसे लोगों ने.)

इसके जवाब में एक शेर ही काफ़ी है

शैख ने मस्जिद बना मिस्मार बुतखाना किया
तब तो एक सूरत भी थी अब साफ़ वीराना किया

जमाल बाबू नं ५
आप कहते हो:-
(विधवाओं की दुर्दशा के पीछे भी यही कारण है , जो कि इस पोस्ट का विषय है . लेकिन इस्लाम के प्रभाव में आकर विधवाओं की सोच काफी बदल गयी है. अब वे भी जीना चाहती हैं .
अगली बार जब आप आयें तो समय निकलकर और प्रमाण ढूंढ कर ज़रूर लायें)

सही कहा आपने इस्लाम के प्रभाव में आकर विधवाओं की सोच काफ़ी बदल गई है याने वो विधवा की जगह बेवा हो गई हैं है ना ?
आपकी वो मीना बाजार वाली लुगत में देखना जरा ?
हा हा।
और सुनिये लोग तो आप को ही समय से निकाल देने के मूड में हैं। अब मत पगलाओ डॉ. साहब, ऐसे में तबियत और फ़ितरत और किस्मत सब की सब बिगाड़ लोगे। आपका सबसे अजीज दोस्त हूँ तो इतना ही कहता हूँ कि मेरी टिप्पणियाँ मिटाने की जगह उन्हें दिल और मन लगाकर पढ़ डालो तुम्हारी जिंदगी तर जायेगी और ये नजर के पर्दों की धूल अपने आप झड़ जायेगी।
अपने नाम को भी उसी लुगत में देख लेना और फिर सोचना कि क्या तुम्हारे काम का भी वही अर्थ है जो तुम्हारे नाम का होना चाहिये ?
चलता हूँ।
बाय बाय भाय

हल्ला बोल ने कहा…

क्या आप सच्चे हिन्दू हैं .... ? क्या आपके अन्दर प्रभु श्री राम का चरित्र और भगवान श्री कृष्ण जैसा प्रेम है .... ? हिन्दू धर्म पर न्योछावर होने को दिल करता है..? सच लिखने की ताकत है...? महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवा जी, स्वामी विवेकानंद, शहीद भगत सिंह, मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद जैसे भारत पुत्रों को हिन्दू धर्म की शान समझते हैं, भगवान शिव के तांडव को धारण करते हैं, जरूरत पड़ने पर कृष्ण का सुदर्शन चक्र उठा सकते हैं, भगवान राम की तरह धर्म की रक्षा करने के लिए दुष्टों का नरसंहार कर सकते हैं, भारतीय संस्कृति का सम्मान करने वाले हिन्दू हैं. तो फिर यह साझा ब्लॉग आपका ही है. एक बार इस ब्लॉग पर अवश्य आयें. जय श्री राम
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जरा सोचिये उपरोक्त सारी बाते आपका दिल स्वीकार करता है. पर हिन्दू खुद को हिन्दू कहने में डरता है, वह सोचता है की कही उसके ऊपर सांप्रदायिक होने का आरोप न लग जाय, जबकि हिन्दू धर्म है संप्रदाय नहीं. हमारे इसी डर ने हमें कमजोर बनाया है.
जरा सोचे -- कश्मीर में हमारी माँ बहनों की अस्मिता लूटी जा रही है. हम चुप हैं.
रामजन्मभूमि पर हमले हो रहे हैं........ हम चुप हैं.
हमारे धार्मिक स्थल खतरे में हैं और हम चुप हैं..
इस्लाम के नाम पर मानवता का खून बह रहा है . हम चुप हैं.
हम आतंकी खतरे के साये में हैं..... हम चुप हैं..
मुस्लिम बस्तियों में हिन्दू सुरक्षित नहीं हैं. हम चुप हैं..
दुर्गापूजा, दशहरा, गणेश पूजा सहित सभी धार्मिक जुलुस, त्यौहार आतंक के साये में मनाये जाते हैं और हम चुप है.
क्या यह कायरता हमें कमजोर नहीं कर रही है.
जागिये, नहीं तो जिस तरह दिन-प्रतिदिन अपने ही देश में हम पराये होते जा रहे हैं. एक दिन भारत माता फिर बाबर और लादेन के इस्लाम की चंगुल में होगी.
हमारी कायरता भरी धर्मनिरपेक्षता भारत को इस्लामिक राष्ट्र बना देगी.
धर्म जोड़ता है, आप भी जुड़िये.
भारतीय संस्कृति की आन-बान और शान और हिंदुत्व की रक्षा के लिए अपने अन्दर के डर को निकालिए.
आईये हमारे इस महा अभियान में कंधे से कन्धा मिलाकर दिखा दीजिये, हम भारत माँ के सच्चे सपूत हैं.. हम राम के आदर्शों का पालन करते हैं. गीता के उपदेश को मानते हैं.
स्वामी विवेकानंद ने विदेश में जाकर अकेले हिंदुत्व का डंका बजा दिया... हम भी तो हिन्दू हैं.
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नम्र निवेदन --- यदि आप धर्मनिरपेक्ष हिन्दू बनते है तो यहाँ पर आकर अपना समय बर्बाद न करें. पर चन्द शब्दों में हमें यह जरूर बताएं की सेकुलर और धर्मनिरपेक्षता का मतलब आपको पता है. यदि पता न हो तो हमसे पूछ सकते हैं. हम आपकी सभी शंकाओ का समाधान करेंगे.
इनका अपराध सिर्फ इतना था की ये हिन्दू थे

बेनामी ने कहा…

इन दुष्ट धर्मोन्मादी मुस्लिम ब्लॉगरों की मैया की चूत में हाथी का लौड़ा।

तीसरी आंख ने कहा…

बात चाहे बेसलीका ही सही, कहने का सलीका चाहिए