गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

माफियाओं के चंगुल में ब्लागिंग

क्या इसी सभ्यता पर करेंगे हिंदी का सम्मान [ प्रथम भाग]   
हम बड़े शान से लिखते है की "हिंदी मात्र एक भाषा ही नहीं वरन हमारी मातृभाषा है". जी हाँ हिंदी को बढ़ावा देने की बात हम बड़े गर्व से करते है पर कैसे बढ़ावा देंगे यह कभी सोचा है आपने. जी नहीं आप सोच सकते है पर सोचने की जहमत नहीं उठाते. 
यह बाते हमें काफी दिनों से खटक रही थी पर सोचता था की जाने दीजिये इन विवादित बातो से बचना ही उचित पर आज बड़े भाई प्रवीन शाह के ब्लॉग "सुनिए मेरी बात" पर एक पोस्ट पढ़ी ..... आप भी देंखे.

सलीम खान से डरते हो आप, आपके दिल में भी कोई जगह तक नहीं उसके लिये... इतने छोटे दिल के साथ कैसे ' हमारी वाणी ' कहला सकते हो आप ?

.देखा आपने , मैं प्रवीन जी  पोस्ट पर नहीं  जाता  पर इस पोस्ट में जो कमेट दिए गए हैं, मैं उनकी बात करता हूँ.  जब मैं ब्लॉग लेखन में आया तो  मैं समझा था की यह वही लोग लिखते होंगे जो वास्तव में समाज के बारे में चिंतित होंगे. एक अच्छे विचारक होंगे. येह  पर स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति होगी न की अभिव्यक्ति की ऐसी स्वतंत्रता ......... जी हा स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति से मेरा तात्पर्य है की हमारा समाज जो सदियों से पुराने रीतिरिवाजो से जकड़ा पड़ा है उसे मुक्त कराएँगे. भारतीय परम्पराओ का सम्मान  बढ़ाएंगे पर हो क्या रहा है. इस दौरान मैंने कई ब्लोगों पर भ्रमण किया. और सभी की मानसिकता को जाना ... कुछ ऐसे लोग मिले जो चाहते थे टिप्पणिया हमारे ब्लॉग पर आयें चाहे जैसे आये. भले ही किसी की माँ-बहन करनी पड़े. और कई लोग ऐसे मिले जो लिखने में मगन हैं उनसे यह नहीं मतलब की उनका ब्लॉग कोई पढ़ रहा है या नहीं. यह सब देखने के बाद मेरा यहसास काफी दुखद रहा. कुछ सामुदायिक ब्लॉग भी मिले जो बिना किसी नियम कानून के चल रहे है. साझा ब्लॉग बनाने का कोई भी मकसद नहीं. बस लेखक जुड़े औए जी चाहे जितना पोस्ट करते चले जाय. न कोई मकसद और न कोई सन्देश. बस पोस्ट लिखने है और लिखनी है. चाहे किसी के धर्म की खिल्लिया उड़ाई जाय. चाहे कमेन्ट बॉक्स में किसी की माँ-बहन की जाय. 
हम बात शुरू करते है. अपने ही ब्लॉग से. मैंने एक पोस्ट लगायी थी.

एक ऐसा दृश्य जिसने मानवता का सर शर्म से झुका दिया.

यह कोई लेख नहीं एक फोटो  फीचर था. हैरानी हुई यहाँ  पर आये कमेन्ट को देखकर . एक बार दिल कहा की ऐसे कमेन्ट हटा देने चाहिए पर हटाया नहीं क्योंकि हम चाहते है की लोग कमेन्ट के जरिये झलक रही उनके दिल की बात जाने और  किसी ने गलत कहा तो उसकी गलती का यहसास कराएँ, जबकि निश्चित तौर पर मन ही मन कुछ लोग गाली भी दिए होंगे. कुछ लोंगो ने यह भी सोचा  होगा की, हरीश जानबूझकर ऐसी बातो को सुनना चाहता  था, निश्चित है उन बातो की जिम्मेदारी कमेन्ट देने वाले और ब्लॉग मालिक की होती है. देंखे..
-----------------------------------------------------------------------------------------------
निरामिष ने कहा… घृणित क्रूर कार्य!!! 
सलीम ख़ान ने कहा…
आज इंसान शैतान बन गया है, जबकि उसे ऊपर वाले ने फ़रिश्ता बनने के लिए इस दुनियां में कायम किया. जानवर को भी उसी ऊपर वाले ने ही बनाया लेकिन जानवर तो नहीं बदला मगर इंसान ज़रूर बदल गया और शैतान को भी अपने पीछे छोड़ दिया. ये बात हर जगह समान लागू है, कुछ अपवाद बचे हैं बस ! जानवर को इतनी छोटी गाड़ी में ले जाना अत्यंत निन्दनीय कार्य है....! ------------------------------------------------------------ यहाँ पर "निरामिष" इस कार्य की निंदा कर विवादों से पल्ला झाड़ लिया..वही सलीम खान नि घटना की निंदा करते हुए अच्छे विचार व्यक्त किये. पर जब लोग उनकी अंतिम पंक्ति पढ़े होंगे तो यही सोचा होगा. देखिये मुसलमान है इसलिए समर्थन भी कर रहा है. यही बात यदि एक हिन्दू ने कहा होता, तो कोई कुछ भी नहीं सोचता. जबकि उनकी सलाह उचित है. जो लोग जानवर खा रहे है उन्हें मना नहीं किया जा सकता.  हमारे कई ऐसे  मुसलमान दोस्त होंगे  जो भैंस या अन्य जानवरों मांस खाते हैं. पर हम भी उनके यहाँ जाकर क्या मुर्गा या बकरे का मांस नहीं खाते. हम सबको नहीं कह रहे हैं पर जो लोग खाते है. वह लोग भी किसी न जानवर की हत्या का कारण बन रहे हैं.  चाहे भैंस कटे या गाय या फिर बकरा जीव हत्या तो सब है पाप भी है. पर एक बराबर. हमारे जो फोटो थे वे दर्दनाक थे इस तरह किसी भी जानवर को ले जाना क्रूर कार्य है. सलीम ने सही कहा इतने छोटे वाहन में जानवरों को नहीं ले जाना चाहिए. हम भी यही कहना चाहते थे. क्योंकि जब सरकार खुद गाय कटवा रही है तो हम किसी धर्म विशेष को दोषी क्यों ठहराएँ. हम किसी को मांसाहार करने से नहीं रोक सकते. पर कोई भी कार्य तरीके से होना चाहिए. नोट.  जब हम इस पोस्ट को लिखना शुरू किये तो सोचे थे की सिर्फ सलीम, अनवर, हमारीवानी के विवादों से सम्बंधित बात लिखेंगे पर लिखने के दौरान देखा हम अपनी बात उस तरह से नहीं कह प् रहे हैं जैसे कहना चाहिए तो इसे धारावाहिक का रूप दे दिया, शायद बहुत कुछ और बहुत लोंगो के बारे में लिखना है. मेरा मकसद सिर्फ एक अच्छे समाज के निर्माण में सहायक बनना है.}                                                                                             क्रमशः......................

4 टिप्‍पणियां:

akhtar khan akela ने कहा…

hirsh bhaai bhtrin chintan khuda kaa shukr he is mamale men chintan shur ho gyaa he inshaa allaah is gndgi ko hm or aap nikaal kar jldi hi fenk denge . akhtar khan akela kota rajsthan

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आपने अभियान की शुरूआत कर दी है । हम आपके साथ हैं । हमारी वाणी मार्गदर्शक मंडल का प्रमुख एक ब्लॉग माफ़िया को बना दिया गया है जो साझा ब्लॉग को अपने फ़ालतू नियमों में क़ैद कर रहा है और उनके संयोजकों से माफ़ीनामे माँग रहा है ।
इनका पुरज़ोर विरोध होना ही चाहिए ।
वकील साहब का मक़सद हमारी वाणी को बदनाम करके बंद करना है , उनके काम से ऐसा लगता है ।

Dr. shyam gupta ने कहा…

जीव हत्या तो एक घ्रणित कार्य है ही.....पर क्यों हो रही है...खाने के अतिरिक्त --सौन्दर्य-प्रसाधनों, पर्स, बेल्ट, जूते , लिपिस्टिक...सब का उपयोग बन्द होना चाहिये...

सलीम ख़ान ने कहा…

Agree with Dr Shyam !
जीव हत्या तो एक घ्रणित कार्य है ही.....पर क्यों हो रही है...खाने के अतिरिक्त --सौन्दर्य-प्रसाधनों, पर्स, बेल्ट, जूते , लिपिस्टिक...सब का उपयोग बन्द होना चाहिये...