गुरुवार, 31 मार्च 2011

क्या हमें शर्म आएगी..............?

आज पूरा देश जीत की खुशियाँ मना  रहा था. लोग मगन थे की पाकिस्तान पर जीत दर्ज कर भारत विश्व-विजय कर लिया. शायद फ़ाइनल के दिन इतने पटाखे न छूटे जितने  आज छुट गए. ११ लोंगो ने  खेल के प्रति जिम्मेदारी दिखाई व इमानदार बने रहे. पूर्णतः १०० प्रतिशत इमानदार, जिसके कारण पूरा भारत इतरा रहा है. नेट पर आया अनवर भाई से बात की फिर "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" द्वारा आयोजित "महाभारत २०११ प्रथम के विजेता की घोषणा की, फिर समाचार देखे तो शर्म के कारण सारी खुशियाँ काफूर हो गयी, भ्रष्टाचार के मामले में भी भारत जीत चूका था, हालाँकि चौथे नंबर पर आने का कष्ट भी रहा, अरे हरामखोरो बेईमानी दिखाई तो ईमानदारी के साथ दिखाते ताकि वहा भी हम नंबर वन रहते.. चलो कोई बात नहीं, हम तो बेशरम ठहरे. कभी न कभी भ्रष्टाचार का कप हमारे यहाँ आएगा ही. आखिर हम भी तो सहयोग कर रहे है. अरे भाई पढ़े लिखे है तभी तो कर रहे है.
जी हाँ हम सही कह रहे हैं आज हमारी वजह से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. ऊपर हम बिठाते है और ऊपर बैठने वाले हमें भूल जाते हैं. 

जरा इस समाचार को पढ़ें.....
सिंगापुर. हांगकांग स्थित प्रमुख बिजनेस कंसल्टेंसी फर्म पीईआरसी के ताजा सर्वे में भारत को एशिया प्रशांत क्षेत्र के 16 देशों की सूची में चौथा सबसे भ्रष्ट देश बताया गया है।

पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक रिस्क कंसल्टेंसी लि. (पीईआरसी) ने भारत को 0 से 10 के स्केल पर 8.67 पर रखा है। इस हिसाब से यह फिलीपींस (8.9), इंडोनेशिया (9.25) और कंबोडिया (9.27) के बाद इस क्षेत्र का सबसे भ्रष्ट देश है।

इस नवीनतम रिपोर्ट में 16 देशों की सूची में थाईलैंड 7.55 के स्केल के साथ 11वें नंबर पर है। उसके बाद चीन (7.93) तथा वियतनाम (8.3) को रखा गया है।

सिंगापुर को सबसे नीचे रखा गया है जिसे 0.37 अंक मिले हैं। पीईआरसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में भ्रष्टाचार का दायरा बढ़ा है और कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में पूरी तरह छाया हुआ है। सरकार टेलीकॉम लाइसेंस से लेकर कॉमनवैल्थ खेलों के आयोजन, सेना की जमीन, सरकारी वित्तीय संस्थानों के लोन घोटालों से घिरी हुई है।

सबसे ज्यादा भ्रष्ट

1. कंबोडिया (9.27)
2. इंडोनेशिया (9.25)
3. फिलीपींस (8.9)
4. भारत (8.67)
5. वियतनाम (8.3)
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सबसे कम भ्रष्ट
1. सिंगापुर (0.37)
2. हांगकांग (1.10)
3. ऑस्ट्रेलिया (1.39)

4. जापान (1.90)     {आभार-दैनिक भास्कर"
सर्वे के मुताबिक भारत के राष्ट्रीय नेता कम भ्रष्ट हैं जबकि छोटे स्तर के अधिकारी व नेता ज्यादा भ्रष्ट हैं। सर्वे में राष्ट्रीय नेताओं को 9.27 प्वाइंट दिए गए हैं जबकि स्थानीय स्तर के नेताओं व अधिकारियों के खाते में 8.97 प्वाइंट गए हैं।
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भारत के राष्ट्रिय नेता कम भ्रष्ट हैं जबकि स्थानीय नेता व अधिकारी अधिक......
जरा सोचिये पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी  का दौरा  हुआ तो. सभी तहसीलों,थानों,विकास भवन व सभी सरकारी भवनों तथा आंबेडकर गावो के दिन लौट आये. अधिकारी रात-दिन जागकर विकास कार्य किये ताकि वे सी एम के कोप का निशान न बने, अब जरा सोचिये लोग चर्चा करते हैं की हर जनपद से एक बंधी बंधाई रकम बसपा प्रमुख को जाता है. जब अधिकारी पैसा ही पहुंचाते थे तो घबराहट क्यों.? इसका सीधा मतलब है की सारा भ्रष्टाचार नीचे से शुरू होता है. जब ऊपर का डर सताता है तो विकास कार्य शुरू अन्यथा चिल्लाते रहो बाप का राज़ है. कोई क्या कर लेगा..
जरा सोचिये..... वोट देना हमारा अधिकार नहीं नैतिक जिम्मेदारी भी है. फिर भी हम अपनी जिम्मेदारी से भागते हैं. वोट हमें देना चाहिए अपने बच्चो,अपने समाज,अपने देश, अपने हित में देखकर. पर क्या हम कभी अपने वोट की कीमत समझते हैं. नहीं हम हमेशा यही सोचते है हमारे एक वोट से क्या होगा. जरा सोंचे ४० प्रतिशत संख्या सरकार बना रही है. और ६० प्रतिशत कोसती है की भ्रष्टाचार है.........? इनमे अधिक संख्या कथित पैसे वाले औए नौकरी वालो की है. कही नौकरी वाले को छुट्टी नहीं मिलती और मिल भी गयी तो वह घर में बैठकर सेलिब्रेट करेगा वाह भाई बीबी के साथ रोमांटिक बात न करे.
और जो ४० पर्तिशत जाते हैं. वे हिन्दू,मुसलमान, ठाकुर,ब्रह्मण,यादव,दलित,बनिया या कुछ और होते हैं उन्हें अपने बच्चो का भविष्य नहीं दिखाई देता, उन्हें अपने जाती व धर्म की ऊँची नाक या मुर्गा-दारू की बोतल दिखाई देती है. जो लोग देश समाज और आने वाली पीढ़ी के भविष्य देखकर जाते है जरा बताएं उनकी संख्या कितनी होगी.
यदि हम सही रूप से व जिम्मेदारीपूर्वक वोट का प्रयोग करें. धर्म, जाती नहीं बच्चो का भविष्य चुने तो पैसे की लड़ाई नहीं होगी चुनाव में, इमानदार आदमी जीतेगा जिसे पैसा नहीं सम्मान प्यारा होगा और वह आपको साथ लेकर अधिकारीयों को इमानदार बनाने की मुहीम छेड़ेगा, आपकी समस्या ऊपर तक पहुंचाएगा.. वह पैसे खर्च नहीं किये तो विकास कार्यो की अनदेखी नहीं करेगा. भारत भ्रष्ट चार में नहीं ईमानदारी में नाम कमाएगा. 

 जी हां, आप इस आरोप से बरी हो सकते हैं. आपने वोट भले ही नहीं दिया, पर घूस को मारिये घूँसा, सूचना के अधिकार का प्रयोग कीजिये, अपने इस अधिकार का यदि ईमानदारी से करें. विकास कार्यो की जाँच अधिकारी ही नहीं आप भी कर सकते हैं. आपके पास पावर है, और यह पावर उन्ही ने दिया है जो भ्रष्टाचार के अंग बने हुए हैं. आप जानते हैं जब देवता,ऋषि मुनि के रूप में ईश्वर खुश होकर किसी राक्षस को अमर होने का वरदान देते थे तो उसकी मौत का कारण भी बता देते थे, भ्रष्टाचार के पोषको ने भ्रस्टाचार रुपी राक्षस को ख़त्म करने का हथियार दिया है तो उसका प्रयोग भी करें. आइये अपनी जिम्मेदारी निभाएं.
{सभी फोटो -- गूगल महराज}

18 टिप्‍पणियां:

बी एस पाबला ने कहा…

बात तो सही है हरीश जी, लेकिन इस क्रिकेटिया आंधी में यह सब कौन-पढ़े समझेगा

Shah Nawaz ने कहा…

वाकई गंभीर विषय और सोचने का समय है.... लेकिन क्या करें आज गंभीर हुआ ही नहीं जा रहा है.......



हुरररररररररे!!!!!! हम जीत गए!!!!!!!!!

बहुत-बहुत मुबारक हो!!! सबको मुबारक हो!!! पाकिस्तान को भी मुबारक हो!!! :-) :-) :-) :-) :-)

सही कह रहे हैं खुशदीप भाई....... हटो, हटो, ऐ श्रीलंका वालों, वर्ल्ड कप अब हमारा है...

धूम-धूम धडाम-धडाम धम्म-धम्म टूंश, फूंश, भड-भड-भड-भड... धिनशा-धिनशा.... फटाक-फटाक... धडाम-धडाम... ठाँ-ठाँ-ठाँ-ठाँ

[यह वोह बम्ब-पठाखे हैं जो रात जलाएं हैं :-) :-) :-) ]

मंगल यादव ने कहा…

हरीश जी आप की बात बिल्कुल सही है.............

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

ईश्वर को साक्षी मानकर कर्म करने से होगा भ्रष्टाचार का खात्मा
1- इस्लाम को फ़ोलो करने वाला कुछ भी ऐब करने के लिए आज़ाद नहीं है।
2- किसी भी गुरू को फ़ोलो करने वाला हिन्दू कोई भी जुर्म करने के लिए आज़ाद नहीं है।

हरेक के पास एक सुनिश्चित अवधारणा और नियम है, जिनकी अवहेलना वे करते हैं जो उनमें अपना विश्वास व्यक्त करते हैं। इसे धार्मिक और आध्यात्मिक होना नहीं कहते बल्कि इसे पाखंडी होना कहते हैं या फिर इसे दुर्बल विश्वास की संज्ञा दी जाएगी। इसे ईमान और यक़ीन की कमज़ोरी कहा जाएगा।
जब अपने मूल्यों और शिक्षाओं पर ईमान और विश्वास ही कमज़ोर होगा तो फिर अमल भी कमज़ोर ही होगा और हरेक कमज़ोरी हमारे लिए हर जगह शिकस्त की वजह बनेगी।
भारत को सशक्त बनाने के लिए हमें अपनी कमज़ोरियां दूर करनी ही होंगी और तब भारत खुद ब खुद ‘अपराधमुक्त और अन्यायमुक्त‘ हो जाएगा।
जिसे मेरी बात में कोई शंका हो वह अपनी शंका व्यक्त कर सकता है क्योंकि मार्गदर्शन के लिए ही मैं वापस आया हूं।
आपके प्यार के बोल अच्छे लगे और हौसला मिला।
मैं आपका शुक्रगुज़ार हूं।
‘अपराधमुक्त और अन्यायमुक्त भारत‘

आशुतोष ने कहा…

हम भावुक लोग है जो भावनाओं में बह जाते है..
भारत विश्व कप जित गया मुझको ख़ुशी है..मगर इससे न तो महंगाई कम हुई न तो भ्रष्टाचार और तो और गिलानी को बुलाकर हमलोग भोजन परोसते है..मनमोहन जी उनका पेट बिरयानी से नहीं हिन्दुस्थानियों के खून से भरता है...
कल के बाद फिर हम टर्र टर्र करेंगे किसी और मुद्दे को ले कर..जो मीडिया दिखता है उसी भावना में बह जातें हैं हम...
इतना जन समर्थन अन्ना हजारे या रामदेव को मिल जाए तो काया कल्प हो जाए इस देश का..

एम सिंह ने कहा…

शर्म तो आनी ही चाहिए। लेकिन आम आदमी के शर्मिंदा होने का क्या फायदा? हां यह सुनकर हमारे नेताओं को जरूर अफसोस हुआ होगा कि हम भ्रष्टाचार के मामले में चौथे नंबर पर हैं। हमें तो नंबर वन होना चाहिए था। अब मंथन के लिए एक बैठक बुलाई जाएगी और सोच विचार किया जाएगा कि आखिर हम अव्वल क्यों नहीं बन सके।
अच्छा लेखन, बधाई।

Patali-The-Village ने कहा…

शर्म तो आएगी ही और अफसोस भी होगा कि हम चौथे नंबर पर हैं|

sureshTamrakar ने कहा…

पता नहीं यह भ्रष्टाचार का सिलसिला कब थमेगा। आपने अच्छा आलेख लिखा। इसमें शब्द व मात्राओं की त्रुटियाँ क्यों रह जाती हैं। अगर इन्हें भी सुधार सकें तो अति उत्तम हो।
-सुरेश ताम्रकर

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

बहुत ही सार्थक और सामयिक लेख ....
हम जहां भी , जिस भी क्षेत्र में हों यदि भ्रष्टाचार से दूर रहने का संकल्प ले लें तो भ्रष्टाचार को हटाना थोडा आसान जरूर हो जायेगा |

सारा सच ने कहा…

मेरी लड़ाई Corruption के खिलाफ है आपके साथ के बिना अधूरी है आप सभी मेरे ब्लॉग को follow करके और follow कराके मेरी मिम्मत बढ़ाये, और मेरा साथ दे ..

G.N.SHAW ( B.TECH ) ने कहा…

एक तरफ उस दिन जंतर - मंतर पर कोई आमरण अनशन पर था..उसका सुध लेने वाला कोई नहीं था ! बड़े से बड़े पदाधिकारी इस मैच में मस्त ! गरीबो को क्या मिला ! एक भिखारी से मैंने दुसरे दिन पूछा - कौन जीता मालूम है ! उसने कहा -मुझे क्या पता ? ..हाँ मै तो मरा जरुर !

Kailash C Sharma ने कहा…

भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं है. जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी भ्रष्टाचार समाप्त करना केवल एक दिवास्वप्न रहेगा.

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

दिन मैं सूरज गायब हो सकता है

रोशनी नही

दिल टू सटकता है

दोस्ती नही

आप टिप्पणी करना भूल सकते हो

हम नही

हम से टॉस कोई भी जीत सकता है

पर मैच नही

चक दे इंडिया हम ही जीत गए

भारत के विश्व चैम्पियन बनने पर आप सबको ढेरों बधाइयाँ और आपको एवं आपके परिवार को हिंदी नया साल(नवसंवत्सर२०६८ )की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

आपका स्वागत है
"गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका!"
और
121 करोड़ हिंदुस्तानियों का सपना पूरा हो गया

आपके सुझाव और संदेश जरुर दे!

Patali-The-Village ने कहा…

नवसंवत्सर २०६८ की हार्दिक शुभकामनाएँ|

शिखा कौशिक ने कहा…

नवसंवत्सर २०६८ की हार्दिक शुभकामनाएँ

शिखा कौशिक ने कहा…

aapke blog ka ullekh ''ye blog achchha laga '' par kiya hai .aap aayen v apne vicharon se avgat karayen .

शालिनी कौशिक ने कहा…

hareesh ji aaj bhrashtachar kee baten keval khushi kafoor nahi karti balki gussa bhi jaga deti hain kintu iske liye matr neta ya adhikari ko doshi kahna galat hai kyonki ye to thode se log hain jyada bhrasht to janta hai jise ye hai ki kisi bhi tarah hamara kam ban jaye aur chahe iske liye hakdar ka haq mar jaye.janta ki sankhya ya kahen ki taqat hamesha se jyada rahi kintu janta ka lalach aur dar use hamesha se dabata raha hai aaj bhi janta jag nahi rahi hai balki jo rishvat nahi bhi lete unke peechhe dodkar unke lalach ko jaga rahi hai.vote dene janta jati hai aur ve bhi janta me se hi hain jo ek apni vote to dalte hain sath hi jin ki koi pahchan nahi milti unki vote bhi apni bana kar dalne jate hain.chunav ladne aaj janta khadi ho rahi hai to matr is liye ke theke lekar paise kamayege.apne natedaron rishte daron ko pad dilvayenge.vibhinna trust par dabangayee dikhakar kabja karenge.
isliye jab tak janta nahi sudhregi netaon adhikaroyon ke sudharne kee aasha nahi kee ja sakti..

सारा सच ने कहा…

nice कृपया comments देकर और follow करके सभी का होसला बदाए..