शुक्रवार, 25 मार्च 2011

भारत के सबसे प्रमुख प्रदेशों में से एक है उत्तर प्रदेश


इसका महत्त्व आप इसी से जान सकते हैं की हिन्दुओं के परम आराध्य  भगवान् श्री राम चन्द्र और
पुराण पुरुषोत्तम भगवान् श्री कृष्ण दोनों ने इसी प्रदेश की धरा पर जन्म लिये  और अपनी बाल लीलाएं कीं,
इसी भूमि पर गौतम बुद्ध का जन्म हुआ,
इसी धरा पर चन्द्र शेखर आजाद जैसा भारत पुत्र पैदा हुआ
पर इतनी  महान विभूतियों की जन्मदात्री ये धरा आज गन्दी राजनीति का शिकार हो गई है
यहाँ अब ना केवल अलग अलग धर्म के नाम पर अपितु अलग अलग जातियों के नाम पर भी सियासत हो रही है,
यहाँ संसाधन के नाम पर नेताओं के वादे और प्रपत्रों में बंद आंकड़े हैं जो इतिहास में अभिलेखों की जगह लेने वाले हैं,
इन्ही आंकड़ों को हमारी आने वाली पीढियां पढ़ेंगी और उत्तर प्रदेश के गौरवमय अतीत की सराहना करेंगी,
यहाँ पार्कों पर कई सौ करोड़ मरम्मत में और अपनी मूर्तियाँ लगवाने पर खर्च करने को विकास  बताया जाता है,
कई करोड़ की माला पहनने के लिए पैसे खुद ही उग आते हैं और बिजली, पानी, सड़क, आदि की व्यवस्था के लिए पैसे ही नहीं,
जनता गरीबी और भुखमरी से त्रस्त है और विधायकों की तनख्वाह बधाई जाती है
हर गाँव घर के लिए पैसा पास कराया जाता है और मिल बाँट कर खा लिया जाता है,
नेताओं का जन्मदिन मनाने के लिए दायित्वों  के बोझ तले दबे  मनोज गुप्ताओं से फिरौती की मांग की जाती है और ना देने पर पीट पीट कर मार डाला जाता है,
ग्राम प्रधान की माँ ही गाँव की सबसे गरीब औरत होती है सो उसके नाम पर वृद्धा पेंसन लिया जाता है,
सड़क में गड्ढे बिलकुल नहीं मिलते क्यूंकि सड़क ही पूरी की पूरी गड्ढे में होती है,
दलित नाम पर ही सौगातों की बारिश हो जाती है भले ही दलित करोडपति ही क्यूँ ना हो और
अन्य जातियां मानो कुबेर के खानदान से सम्बन्ध रखती हों की उनके बचे खुचे अधिकार भी मार लिए जाते हैं,
मानो की अन्य जातियों में गरीबी होती ही नहीं है,
हरिजन किसी को मारे या उसका घर फूंक दे, कोई सजा नहीं है और अन्य कोई चाहे अपनी प्राण रक्षा में ही गलती से भी उनको एक भी थप्पड़ मार दे ... लग गया हरिजन एक्ट....
जहाँ ब्राह्मन कर्म से शूद्र का सा आचरण करता है तथापि  समाज का करता धर्ता खुद को ही समझता है,
राम के नाम पर सत्ता हथियाई जाती है और सत्ता पाने के बाद राम को कुर्सी के नीचे की खाली जगह दे दी जाती है,
भगवान् श्री राम की जन्मभूमि पर विदेशी आक्रमणकारी का स्मारक बनाने की मांग की जाती है
निर्दोष बच्चों के साथ निठारी का शर्मनाक काण्ड होता है और नेता गण इसे बहुत छोटी सी घटना करार देते हैं,
निठारी कांड का दोषी वहशी दरिंदा थोड़ी सी सजा पाकर बाइज्जत बरी हो जाता है,
रास्ते में जाती हुई गाडी रुका ली जाती है और चढ़ावा पाने के बाद गाडी के कागज़ की जाँच भी जरूरी नहीं होती है,
न्याय के रखवालों के घर को ही न्याय का कोठा बना दिया जाता है....
क़ानून के रखवाले अपने हिसाब से क़ानून को ढाल लेते हैं......
न्याय का कठोर दंड केवल गरीबों के लिए होता है... अमीर इन सीमाओं से परे होता है.......
भूख से बिलबिलाते बच्चों की तरफ रोटी का एक टुकड़ा भी फेंकना शान के खिलाफ है
और घर का कुत्ता भी १०० रुपये पर किलो वाला खाना खाता है...
स्कूलों में जितने छात्र होते हैं उसके अनुरूप अध्यापक भी नहीं होते हैं......
आरक्षण के बल पर देश की नीव को अनाड़ी शिक्षकों के हाथ सौंप दी जाती है...
बाल श्रम उन्मूलन की बात होती है और हर ढाबे पर उनके हाथ का परोसा खाना खा के चल देते हैं..
वहां ये नजर ही नहीं आता की ये बच्चे भी बाल श्रम अधिनियम में ही आते हैं...
फैशन के नाम पर  माँ बाप तक को अवहेलित किया जाता है...
कर्मचारी अपने ऑफिस को अपनी बपोती समझता है...
ग्राहक या तो चढ़ाव चढ़ाए या जरा से काम को भी १० दिन दौड़ लगाए...

और कितनी ही बाते हैं जो हम हर रोज हर जगह हर समय देखते सुनते और सहते हैं पर
हम बड़े सहनशील हैं... ना विरोध करेंगे ना ही मुह से आह निकलेगी
अगर अब ना जगे तो अगला समय हमें नेताओं की थाली का निवाला बनने का है
मित्रों जागो  और उत्तर प्रदेश पर राम राज्य की पुनर्स्थापना करो,

7 टिप्‍पणियां:

RADHAKRISHNA MIRIYALA ने कहा…

THANK YOU !!!
NICE EXPLANATION..........

Patali-The-Village ने कहा…

आप की सभी बातों से सहमत हूँ| अब सवाल यह है कि इनको कुर्सी तक पहुँचाने वाला कौन है?

हरीश सिंह ने कहा…

सबसे अधिक दोषी तो हम सब खुद हैं जनाब, स्वागत

Atish kumar ने कहा…

हरीश जी, सबसे पहले मेरे ब्लॉग http://aaa30kumar.blogspot.com/ पर आने के लिये धन्यबाद। आपके निमंत्रन पर हम आपके ब्लॉग पर आए हैं। आकर बहुत खुशी हुई।उत्तर प्रदेश और बिहार इस समय देश के दूसरे राज्यो के स्वार्थी राजनितिज्ञो के निशाने पर है,वे अपनी समस्याओ के लिए यहाँ से आये हुए लोगो को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं,जबकी उनकी जिन्दगियाँ इन उपेक्षित बिहारियो तथा U.P वासियो की वैशाखियो पर ही रेंग रही है। दूसरी तरफ मायावती, मुलायम,लालू जैसे नेताओ की मार भी इन्हे झेलना पर रहा है।दलित की राजनीति करने वाले खुद दलित महिलाओँ का बलात्कार रहे हैं। जनता की गाढी कमाई को राजनितिज्ञ अपनी शानोशौकत पे खर्च कर रहे है। बेचारे बिहारी और U.P वाले...

kirti hegde ने कहा…

उत्तरप्रदेश देश का सिरमौर है हुजुर

poonam singh ने कहा…

आप की सभी बातों से सहमत हूँ|

akhtar khan akela ने कहा…

ब्लोगिंग के हर दिल अज़ीज़ हरीश सिंह छा रहे हें इन दिनों
दोस्तों सबसे पहले तो में सभी भाइयों से क्षमा प्रार्थी हूँ ,क्षमा प्रार्थी इस लियें के मेरा अपना स्व्भाव हे अपनी सोच हे और मेरी संस्क्रती मेरी शिक्षा यही हे के किसी के बारे में अगर कोई आदर्श कोई अच्छाई देखो तो उसे उजागर करो और कोई कमी देखो तो उसे छुपा कर रखो . इसी आदत इसी शिक्षा से में मजबूर हूँ , पिछले दिनों ब्लोगिंग में खूब उलट पुलट आरोप प्रत्यारोप का दोर चला किसी की खूबियाँ अगर गिनाई गयीं तो उसे चापलूसी और चम्चेवाद का दोर कहा गया, लेकिन दोस्तों किसी से कुछ अर्जित करने के लियें किसी नालायक की तारीफ हो तो शायद चमचागिरी उसी का नाम हे ,जबकि हमारी ब्लोगर दुनिया में एक से एक हीरो एक से एक पारंगत अज़ीम हस्तियाँ हें जिनके बारे में सच लिखना हर ब्लोगर की मजबूरी होना चाहिए और इसीलियें कुछ दिन ठिठकने के बाद फिर से में भाई हरीश सिंह जी की लेखनी ,मिलनसारी,और अपनेपन से प्रभावित होकर यह पोस्ट लिखने पर मजबूर हुआ हूँ और में यह क्रम जारी रखूंगा .
दोस्तों उत्तरप्रदेश की काशी प्रयाग लवकुश नगरी यानी लवकुश की जन्म स्थली भदोही में भाई हरीश ने १५ मार्च १९६९ को जन्म लिया और इनका प्रारम्भिक अध्ययन का कार्य भदोही में ही रहा वहां इस धार्मिक नगरी लवकुश जन्मस्थली ने भाई हरीश सिंह को ऐसे संस्कार दिए के सच का सामना करना, पीड़ितों को न्याय दिलाना ,सच बोलना और सच लिखना ,समाजसेवा करना इनकी आदत में आ गया और यही वजह रही के भाई हरीश जी ने पढाई के साथ साथ ही समाजसेवा और पत्रकारिता का काम शुरू कर दिया था .
हरीश जी १९९० में पत्रकारिता से जुड़ गये कई लेख दुसरे छोटे बढ़े समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए खोजी पत्रकारिता में हरीश जी ने काफी नाम कमाया और १९९४ में हरीश जी पाक्षिक समाचार से जुड़े फिर देनिक समाचार पत्रों से लगातार जुड़े रहने के बाद इन अख़बारों की और मालिकों की हकीक़त जब हरीश जी ने समझी तो यह अख़बारों से अलग हो गये और खुद का एक पाक्षिक अख़बार निकाल लिया, इन दिनों हरीश जी देनिक आज अख़बार में क्राइम रिपोर्टिंग भी कर रहे हें , पत्रकारिता के जूनून ने हरीश जी को सच का सामना करने ,सच के लियें लढने का साहस दिया और फिर हरीश जी ब्लोगिंग की दुनिया के अँधेरे को दूर करने आ गये ,
हरीश जी ने ब्लोगिंग की दुनिया में खुद को आलू की तरह एडजस्ट किया हालात यह रहे के जेसे आलू सभी सब्जियों के साथ अच्छा लगता हे ऐसे ही भाई हरीश सभी ब्लोगरों के साथ सम्बन्ध स्थापित करते रहे इनका स्वभाव रहा, सभी से दोस्ती करो किसी से दुश्मनी या नाराजगी इनके स्वभाव में शामिल नहीं हे और इसीलियें यह दोस्त के भी दोस्त और दुश्मन के भी दोस्त बनते चले गये आज भाई हरीश जी के लेखनी के सभी तलबगार हे और यह जनाब हें के ब्लोगिंग के इस अखाड़े में जब कुछ लोग एक दुसरे को चुनोती दे रहे हें एक दुसरे को पछाड़ने की तय्यारी में हे तब यह जनाब सभी गुट के मुखियाओं के साथ खड़े मुस्कुराते हें उनकी इस मुस्कुराहट में एक प्यार का संदेश अपनेपन का संदेश छुपा होता हे और इसीलियें भाई सलीम ब्लोगर ने हरीश सिंह को लखनऊ ब्लोगरएसोसिएशन का गुरु हनुमान कहा हे और खुबसुरत मधुर अल्फाजों में उन्हें अपने ब्लॉग पर नवाज़ा भी हे,हरीश सिंह अपनी पत्रकारिता की रूचि के चलते पूर्वांचल प्रेसक्लब के अध्यक्ष भी हे और इसीलियें यह सभी ब्लोगों पर अपने पराये का भेद मिटाकर कोई न कोई टिप्पणी छोड़ने की कोशिश जरुर करते हें और इनके इसी स्वभाव के कारण वोह आज ब्लोगिंग की दुनिया में अखाड़ेबाजी के बाद भी सभी दिशाओं ,सभी विपरीत विचारधाराओं के ब्लोगरों के आपसी मतभेद होने पर भी सभी ब्लोगर्स के हर दिल अज़ीज़ बन गये हें . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान