गुरुवार, 17 मार्च 2011

एक ऐसा दृश्य जिसने मानवता का सर शर्म से झुका दिया.

क्या आप कल्पना कर सकते है जिस मार्शल जीप में पिछली सीट पर बमुश्किल १० सवारियां बैठे जाती है. उसी जगह में वध करने के लिए दो गायो और एक बछड़े को ठूंसकर ले जाया जा रहा था जिसे भदोही पुलिस ने पकड़ा. काफी मशक्कत के बाद वहां से पशुओ को उतरा गया तब तक एक गाय ने तड़पकर दम तोड़ दिया , पकडे गए आरोपी नूर मोहम्मद ने बताया की ऐसे कार्य को अंजाम देने वाले जनपद में कई लोग है. मैं नहीं कहता जो लोग पशु मांस को खाते है वह गलत है पर ऐसी क्रूरता कहा तक उचित है...
इस घटना का दृश्य स्वयं देखे और सोचे क्या यह जघन्य अपराध नहीं  है. 








इसी तरह वाहन में ठूंसे गए थे जानवर { ऊपर सभी दृश्य}
आरोपी नूर मोहम्मद
घटना का खुलासा करने वाले एस आइ दयाराम पाल
 क्या सोचा आपने ??????????

30 टिप्‍पणियां:

निरामिष ने कहा…

घृणित क्रूर कार्य!!!



निरामिष: शाकाहार : दयालु मानसिकता प्रेरक

सलीम ख़ान ने कहा…

आज इंसान शैतान बन गया है, जबकि उसे ऊपर वाले ने फ़रिश्ता बनने के लिए इस दुनियां में कायम किया. जानवर को भी उसी ऊपर वाले ने ही बनाया लेकिन जानवर तो नहीं बदला मगर इंसान ज़रूर बदल गया और शैतान को भी अपने पीछे छोड़ दिया. ये बात हर जगह समान लागू है, कुछ अपवाद बचे हैं बस !

जानवर को इतनी छोटी गाड़ी में ले जाना अत्यंत निन्दनीय कार्य है....!

PADMSINGH ने कहा…

उफ़ ! अत्यंत घृणित और जघन्य अपराध है ये... इंसान से नीचे इंसान ही गिर सकता है... छिः

PADMSINGH ने कहा…

दयाराम जी की संवेदनशीलता को सलाम ... वर्ना तो ऐसे कितने कृत्य पैसों के बोझ तले दबा दिए जाते हैं

DR. ANWER JAMAL ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
DR. ANWER JAMAL ने कहा…

एक घृणित और निंदनीय कार्य कई पहलुओं से । क़ानून का कोई डर गोकशी करने वाले इन संगठित मुजरिमों को बिल्कुल भी नहीं है । इन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है कि गाय से कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएँ भी जुड़ी हैं और गोकशी के बाद समाज में बलवा भी हो सकता है , किसी की जान भी जा सकती है और दोनों समुदायों के बीच नफरत और दूरियाँ तो बढ़ती ही हैं। इन्हीं बातों के मद्दे नज़र दारूल उलूम देवबंद ने फ़तवा दिया है कि गोकशी न की जाए लेकिन जो लोग क़ानून और जेल से नहीं डरते वे मुफ़्ती साहब के फ़तवों और अपीलों पर कब ध्यान देते हैं ?
अगर जाँच की जाए तो पता चलेगा कि नूर मौहम्मद को गाय वे बेचते हैं जो कि नूर मौहम्मद नहीं हैं बल्कि गोपाल हैं।
क्या बूढ़ी गाय बेचने वाले गोपालक नहीं जानते कि गोमाता को अब वे कहाँ पहुँचा रहे हैं ?

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

इन तस्‍वीरों में वास्‍तविक पशु तो नूर मोहम्‍मद दि‍ख रहा है। कर्त्‍तव्‍यपालन के लि‍ये दयाराम का धन्‍यवाद आभार।

राजीव नन्दन द्विवेदी ने कहा…

आज से मैं शाकाहारी.

हरीश सिंह ने कहा…

अनवर भाई ने सही कहा यह निंदनीय कार्य करने वाले किसी धर्म विशेष से मतलब नहीं रखते. चंद रुपये की खातिर लोग जाने कैसे कैसे कार्य कर देते है. निश्चय रूप जो भी इन्हें बेचा होगा वह गोपाल भी हो सकता है. दो वर्ष पूर्व हमने एक ट्रक पकड़ी थी जिसमे दो दर्ज़न गाय और बछड़े भूसे की तरह ठूस कर ले जाये जा रहे थे. उसका चालक वही था जिसे गौपालक कहते हैं. यानि एक यादव, ऐसा गन्दा काम करने वाले कोई भी हो सकते हैं जाती धर्म से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है.

आशुतोष ने कहा…

नूर मोहम्मद जैसे जघन्य गद्दार &^@#$$ कातिलों व उनके आकाओं के लिए एक पंक्ति याद आई मेरी कविता की
........................................
ये नर मुंडो की मस्जिद मे खूनी नमाज को पढ़ते है.
अपने पापों का प्रश्चित भी गोहत्या करके करते है |
.........................................
इन कुत्ते की औलादों(माफ़ करे गलत शब्द इस्तेमाल करने के लिए) को जिन्दा दफ़न कर देना चाहिए..

akhtar khan akela ने कहा…

bhut khtrnaak maamla he snkln ke liyen mubark ho aese logon ko to szaa honaa hi chahaiye hr kaam mryadit aachrn se kiya jaana chahaiye agr yeh tsviren pulis ke khe mutaabiq shi he to fir aese log chhutnaa nhin chaahiyen . akhtar khan akela kota rajsthan

ROHIT ने कहा…

जो भी राक्षस गाय काटते है. खाते है
उन सबको कोढ़ हो जाये. और उस कोढ़ मे भयंकर खुजली हो जाये
उनके खानदान नष्ट हो जाये.
पूरे शरीर मे कीड़े पड़ जाये. सारे शरीर के अंग भंग हो जाये
तड़प तड़प कर उनकी मौत हो. और कुत्ते उनके शरीर को नोच नोच कर खाये. ऐसी मेरी बदुआ है.

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

हममें ही तो हैवान भी होते हैं, अप किस किस कि बात करेंगे ये तो जानवर है बिना जुबान वाले उनके साथ कुछ भी कर लीजिये. जब यही क्रूरता मानव जाती के साथ होती है तब किसको दोष दें? ये तो हमारे अन्दर का वहशी इंसान है तो हमें शर्मसार कर देता है. ऐसे मामले को सामने लाने के लिए धन्यवाद.

Dilbag Virk ने कहा…

dukhdayi

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

यह पशु मांस खाने का मामला नहीं है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

क्रूरतम कृत्य ...इंसान जानवर बन गया है

Dr. shyam gupta ने कहा…

पशु मांस खाने के लिये ही तो काटी जा रही हैं....मांस खाना ही तो अमानवीय क्रित्य है जिसके लिये सारे अमानवीय कर्म किये जाते हैं...

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

वीभत्स कृत्य । जितनी नींदा की जावे कम है ।

Rakesh Kumar ने कहा…

उफ़! दर्दनाक ,अति खौफनाक ,घृणित और निंदनीय .
होली पर आपको और सभी ब्लोगर जन को हार्दिक शुभ कामनाएँ.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बहुत क्रूरतापूर्ण और दुखद घटना.
होली की हार्दिक शुभकामनायें.

Babli ने कहा…

बहुत ही दर्दनायक, निंदनीय और दुखद घटना है!
आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!

kshama ने कहा…

Uf! Dil dahal gaya!
Harishji,mere blog"Bikahare Sitarepe" aapne diya hua aamantran saharsh sweekar hai.Batayen,kya karna hoga.Prateeksha hai jawab kee.
Mera email ID hai:
kshamasadhana8@gmail.com

हरीश सिंह ने कहा…

aap sabhi ko dhanywad..
भारतीय ब्लॉग लेखक मंच

kirti hegde ने कहा…

एक घृणित और निंदनीय कार्य कई पहलुओं से

poonam singh ने कहा…

घृणित क्रूर कार्य!!!

एम सिंह ने कहा…

ये गायें उन भोले लोगों से खरीदी जाती हैं, जिन्हें इनके हश्र का पता नहीं होता। ऐसे में जिम्मेदार गोपाल न होकर नूर मोहम्मद ही है। गांवों के बहुत से लोगों को इस बारे में मालूम भी नहीं है कि गौकशी की जाती है।
बेहद अफसोसजनक

चन्द्रकांत दीक्षित ने कहा…

इंसानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य.

क्रांतिकारी हिन्दोस्तानी देशभक्त ने कहा…

इस नूर मुहम्मद को इतना पीटो की ये कभी इस तरह का कारनामा सपने में भी ना सोचा पाए

kase kahun? ने कहा…

ghrunit apradh..aise doshiyon ko sakht aur jald se jald saj honi chahiye...

Mirchi Namak ने कहा…

aare bhai is harami ke pure khandan ko ushi marshal jeep mein laad ke katlkhane bhej do halal hone ke liye baki uska maans "meat" kutte kha lenge.