शनिवार, 19 जून 2010

‘हेलो... मैं विजय मिश्रा बोल रहा हूं

‘हेलो... गुरु जी प्रणाम! मैं विजय मिश्रा  बोल रहा हूं... ’ सत्ता की हनक, बाहुबल की चमक  और रुपए की दमक के बीच गूंजने वाला यह शब्द अब पूरी तरह थम गया है। उत्‍तर प्रदेश में कानून का राज कायम होने के साथ जरायम (अपराध) की दुनिया की नकेल कसे जाने के बाद अपराध की दुनिया की हलचल से लंबे समय तक अशांत रहने वाला भदोही जिला अब शांत हो चुका है। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कालीन नगरी भदोही अब विकास के रास्ते पर अग्रसर है, सियासत यहां नई करवट ले चुकी है और इसी के साथ शुरू हो चुका है भदोही के सियासी अखाड़े का एक नया अध्याय।

हम बात कर रहे हैं, एक दशक से भदोही की फिजां में कायम सियासी समर के बीच ही एक ऐसे सियासतदां की, जिसका नाम विजय मिश्र है। विजय मिश्रा मूलतः इलाहाबाद जनपद के हन्डिया कोतवाली क्षेत्र के खपटिहा गांव के मूल निवासी हैं। एक साधारण किसान परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मिश्रा ने भदोही जिले के डीघ ब्लॉक से ब्लाक प्रमुख के रूप में सियासत का सफर शुरू किया और एक के बाद एक की तर्ज पर प्रमुख चुने जाते रहे। भदोही जनपद के सृजन के बाद जिला पंचायत के प्रथम चुनाव में उन्हें डीघ से ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. श्यामधर मिश्र के भाई पंडित गुलाबधर मिश्र से हार का सामन करना पड़ा। लेकिन, इसके बाद इस शख्‍स ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

जिला पंचायत अध्‍यक्ष निर्वाचित होने के बाद विजय मिश्र ने ग्यानपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर एक नहीं, बल्कि दो बार जीत दर्ज की। इस दौरान तमाम सियासी दलों का कथित रूप से उत्पीड़न भी हुआ, जिसकी वजह से भी सपा विधायक लगातार चर्चा में बने रहे। लेकिन, सूबे में बसपा की सरकार बनने के बाद भदोही में भी कानून के राज की हनक दिखी। भदोही विधान सभा उपचुनाव में बसपा की हार और सपा की जीत की नायक बने विजय मिश्रा के बनवास का सफर भी यहीं से शुरू हो गया।

लोकसभा चुनव में बसपा ने काफी जद्दोजहद के बाद विजय मिश्र के जानी दुश्मन कहे जाने वाले ग्यानपुर के चर्चित पूर्व विधायक गोरखनाथ पांडे को लोकसभा चुनाव के मैदान में उतार दिया। विजय मिश्र भी चुप कैसे रहते, उन्होंने भी रामरती बिन्द का टिकट कटवाकर छोटेलाल बिन्द को चुनाव मैदान में उतार दिया। सियासी महाभारत शुरू हो गई, किन्तु सियासी बिसात पर एक गलत चाल से सब कुछ उल्टा पड़ गया। और, यह थी, प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में गोलीकांड। गोलियों की तड़तड़ाहट जा पहुंची कानून के राज की चौखट तक। बैलेस्टिक जांच में पता चला कि गोलियां सपा विधायक के गनर के असलहे से निकली थीं। फिर क्या था, कस गया शिकंजा और गायब हो गए विजय मिश्रा... थम गई ‘हेलो गुरु जी प्रणाम ...मैं विजय मिश्र बोल रहा हूं’ की आवाज ...

आइये पुलिस की क्राइम डायरी पर नजर फेरते हैं। सपा विधायक मिश्र पर करीब पांच दर्जन अर्थात 60 के लगभग मुकदमे दर्ज हैं। वर्तमन समय में कई मामलों में स्टे भी हासिल हैं, बावजूद इसके कई मामलों में पुलिस को तलाश है विजय मिश्र की, किन्तु फरार हैं विधायक। पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। लखनऊ, नोएडा, इलाहाबाद, भदोही सहित कई स्थानों पर उनकी करोडों की सम्पत्ति सीज की जा चुकी है। आखिर कहां हैं विजय मिश्र? इस सवाल का जवाब उनके समर्थक ही दे सकते हैं।

काबिले गौर यह है कि सपा विधायक के सियासी बनवास के बाद उनका सियासी किला भी ढहता जा रहा है। कल तक उनकी चौखट चूमने वाले आज उनके दुश्मनों के घर हाजिरी लगा रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि विधायक का किला ढहता जा रहा है। फिलहाल अभी आगे है पंचायत चुनाव, जिसमें होगी असली जंग। दोनों तरफ से खिंचेंगी तलवारें.. क्या होगी तस्वीर ... यह बहुत कुछ आने वाले वक्‍त पर ही निर्भर है। लेकिन, आज की तारीख में फोन पर गूंजने वाली यह आवाज ... ‘हेलो गुरु जी प्रणाम ...मैं विजय मिश्र बोल रहा हूं’ गुजरे जमाने की कहानी बनती नजर आ रही है।

कोई टिप्पणी नहीं: