बुधवार, 30 जून 2010

आनर किलिंग-माँ ही निकली बेटी की हत्यारिन

भदोही/उत्तरप्रदेश: जनपद के कोइरौना थाना क्षेत्र में गत २३ जून को १६ वर्षीय किशोरी की हत्या का खुलाशा पुलिस ने मंगलवार को कर दिया किन्तु इस घटना ने लोंगो को चौंका कर रख दिया है. माँ ने अपने परिवार का माँ-सम्मान बचाने के लिए अपनी ही बेटी का गला काट डाला.
 ज्ञातव्य हो की थाना क्षेत्र के निबिहा गाव में २३ जून को ब्रिजलाल यादव उर्फ़ कल्लू यादव की पुत्री रेखा [१६] की गला कट कर हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगो के खिलाफ ३०२ के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जाँच कर रही थी. मामले की विवेचना थानाध्यक्ष सुरेश प्रसाद त्रिपाठी व एस ओ जी प्रभारी फरीद अहमद खान कर रहे थे इसी बीच बिल्ली के भाग से छींका टूटा की कहावत चरितार्थ हो गयी और मृतक रेखा की माँ गीता देवी ने खुद ही राज खोल दिए. खुलासे के एक दिन पूर्व रात को उसने अपने बेटे से बताया की उसने खुद ही रेखा का गला काट डाला और गडासा [जिससे हत्या की गयी] छुपा कर रख दिया है. उसने कहा की गुस्से में आकर उसने अपनी बेटी को मार डाला किन्तु अब पुलिस से डर रही है.यह बात उसके बेटे ने अपने पिता को बता दी फिर बात पूरे गाव में फ़ैल गयी और हत्यारिन माँ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया , पूछताछ के बाद यह कहानी प्रकाश में आयी.
    ब्रिजलाल यादव मुंबई में रहकर टैक्सी चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था, घर पर उसकी बेटी और माँ रहती थी, जबकि बेटा पिता के साथ मुंबई में ही रहता था. रेखा जब जवानी की दहलीज पर कदम रखी तो किशोरावस्था की उमंगें उसके मन में भी तरंग पैदा करने लगी और कदम बहकने लगे. इसी बीच उसका अवैध सम्बन्ध पड़ोस के ही चन्द्रबली यादव के पुत्र कैलाश यादव से हो गया. दोनों छुप-छुप कर मिलने लगे. यह जानकारी रेखा की माँ गीता हो गयी, पहले तो उसने समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन बात बनती नजर नहीं आयी, घटना की रात दोनों फिर मिले यह बात रेखा की माँ को नागवार गुजरी. माँ बेटी में इसी बात को लेकर तू-तू मै-मै शुरू हो गयी . रेखा ने कहा की या तो वह उसे मार डाले या खुद ही मर जाय लेकिन वह कैलाश से सम्बन्ध नहीं रखेगी. लिहाजा गुस्से में आकर गीता घर में से गडासा लाई और बेटी का गला काट डाला. फिर घर में जाकर सो गयी. फ़िलहाल पुलिस ने गीता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
  कहा है घटना के खुलाशे में लोच
खैर  रेखा की हत्या का खुलाशा पुलिस ने कर दिया है. गीता के बयान पर फाईल बंद कर दी गयी है किन्तु यह बाते अभी भी खटकने वाली है. हत्या की घटना के बाद गाव में चर्चा थी की रेखा की माँ के सम्बन्ध किसी से थे जिसे लेकर उसकी हत्या की गयी. रेखा के अवैध सम्बन्ध किसी से थे यह बात गावो में छुपती भी नहीं किन्तु गाव में यह बात किसी को पता नहीं थी, गीता का कहना है की इस बात को लेकर माँ बेटी में झगडा होता रहता था किन्तु यह जानकारी गाव वालो को नहीं थी, जिस दिन हत्या हुयी उस दिन भी झगडा हुआ किन्तु गाव के शांत माहौल में भी यह लडाई किसी को सुनाई नहीं दी. पुलिस अपने दामन को बचाने के लिए भले कहानी बंद कर दी किन्तु रेखा के सिर्फ और सिर्फ गले पर लगी यह चोट साफ दर्शाती है की घटना की रात उसकी माँ से कोई विवाद नहीं हुआ और  हत्या सोने के दौरान की गयी. साफतौर पर सुनियोजित दिखाई देने वाली हत्या की गुत्थी इतनी सरल तो नहीं हो सकती. निश्चय ही इस हत्या में कोई और शख्स शामिल है जो परदे के पीछे है. अभी तक रेखा के प्रेमी कैलाश का पता भी पुलिस नहीं लगा पाई है. भले ही हत्या का खुलाशा हो चुका है किन्तु अभी तक कई सवाल अनसुलझे है..

गुरुवार, 24 जून 2010

किशोरी की गला रेतकर हत्या

भदोही/उत्तरप्रदेश: जनपद के कोइरौना थानान्तर्गत निबिहा गाव में बुधवार की रात एक १५ वर्षीय किशोरी की गला रेतकर हत्या कर दी गयी, गुरुवार की सुबह लोगो ने किशोरी का शव पास के बगीचे में देखा तो हडकंप मच गया, सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जाँच कर रही है.शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया गया  है.
 जानकारी के अनुसार गुरुवार की सुबह लोग शौच के निकले तो पास के बगीचे में देखा ब्रिजलाल यादव की १५ वर्षीय पुत्री रेखा देवी का शव बगीचे में पड़ा था, उसकी गर्दन किसी धारदार हथियार से काती थी जो आंशिक रूप से जुडी थी. शव मिलते ही पूरे गाव में हडकंप मच गया, लोंगो की भीड़ घटना स्थल पर जमा हो गयी. सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस शव को कब्जे में लेकर जाँच में जुट गयी. घटना का खुलासा करने की जिम्मेदारी एस ओ जी प्रभारी फरीद अहमद खान को दी गयी है. अभी तक हुयी जाँच में किशोरी की माँ की आशनाई सामने आयी है. चर्चा है की उसकी माँ की आशनाई किसी से थी. संभवतः रात को वह अपने प्रेमी से मिलने गयी होगी जिसका पीछा किशोरी ने किया होगा, अपना भांडा फूटने के डर से किशोरी की हत्या कर दी गयी. फ़िलहाल गाव में हो रहे इस चर्चे को आधार मानकर भी पुलिस जाँच कर रही है. साथ ही दूसरी सम्भावना पर भी जाँच चल रही है.
बता दें की कोइरौना थाना क्षेत्र में डेढ़ माह के अन्दर यह तीसरी हत्या है. डेढ़ माह पूर्व इंजीनियरिंग के छात्र देवेन्द्र उर्फ़ बाबा सिंह की हत्या आशनाई के चक्कर में गोली मरकर की गयी थी. इसके पूर्व जिला पंचायत सदस्य लालजी पाल की हत्या जमीन विवाद में की गयी है. उसके बाद यह तीसरी घटना है. जिसकी जाँच पुलिस कर रही है. फ़िलहाल अटकलों का बाज़ार गर्म है.

बुधवार, 23 जून 2010

सड़क दुर्घटना में ईट व्यवसायी की मौत

भदोही/उत्तरप्रदेश: बुधवार की भोर में हुयी सड़क दुर्घटना में एक ईट व्यवसायी की दर्दनाक मौत हो गयी, जानकारी के अनुसार जनपद के कोइरौना थाना क्षेत्र के कटरा बाज़ार सीतामढ़ी निवासी नन्दलाल केशरवानी [४०] भोर में तीन बजे अपनी स्कार्पियो गाड़ी से चंदासी जा रहे थे, जब वे कछवा क्षेत्र के रूपापुर गाव के पास पहुंचे तो गाड़ी असंतुलित होकर एक दूसरे वाहन से जा टकराई, जिसमे नन्दलाल की मौत हो गयी, जबकि साथ में बैठा एक व्यक्ति घायल हो गया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया.

विवाहिता की जलकर मौत,मायकेवालो ने लगाया हत्या का आरोप

भदोही/उत्तरप्रदेश: जनपद के भदोही कोतवाली अंतर्गत नई बाज़ार में बुधवार को एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थियों में जलकर मौत हो गयी, मायके वालो ने दहेज़ के लिए जला कर मारने का आरोप लगाया है.पुलिस ने शव को कब्ज़े में लेकर  अन्त्य परिक्षण    के लिए भेज दिया है.
  जानकारी के अनुसार धर्मेन्द्र सिंह पुत्र स्व. बबउ सिंह का विवाह १० मई २००९ को वाराणसी जनपद के चौथापुर रौनापार निवासी छांगुर सिंह की पुत्री अमृता सिंह उर्फ़ गुंजन सिंह के साथ हुआ था, चर्चोओ  की माने तो गुंजन को अपने पति व उसकी भाभी तथा भतीजो से बात करना पसंद नहीं था , इसी बात को लेकर दोनों में अक्सर तकरार होती रहती थी, इसी बात को लेकर बुधवार को भी तकरार हुयी और विवाहिता ने अन्दर से दरवाज़ा बंद कर आग लगा ली, पड़ोसियों ने दरवाज़ा तोड़ के उसे बाहर निकाला  तब तक बुरी तरह जलने से उसकी मौत हो चुकी थी, सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अन्त्य परिक्षण के लिए भेज दिया, उधर, विवाहिता के पिता ने पुलिस को तहरीर देकर दहेज़ के लिए जलाकर मारने का आरोप लगाया है, फ़िलहाल पुलिस ने आरोपी धर्मेन्द्र को हिरासत में लेकर मामले की जाँच कर रही है.

रविवार, 20 जून 2010

है दम तो भेजिए.

यदि आपमें सच लिखने की ताकत है तो अपने दिल में छुपाकर रखा गया सच हमें लिख भेजिए, जो बाते आपको चुभ रही हैं उसे लिख मारिये और भेज दीजिये हमारे पास  उसे हम आपके नाम से इस ब्लॉग पर प्रकाशित करेंगे. एक बात हमेशा याद रहे  धर्म से सम्बंधित कोई भी रचना न भेजे. 
है दम तो भेजिए. 

editor.bhadohinews@gmail.com

स्तरहीन लेख को किसी भी हालत में प्रकाशित नहीं किया जायेगा.   
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मैं कौन हूँ ....



अक्सर रातों की तन्हाई में.
मैं सोचता हूँ.
मैं कौन हूँ.
क्या पतझड़ का वह पत्ता हूँ.
जो वक्त के थपेड़ो से टूटकर.
जमीं पर पड़ा हूँ.
जो हल्के से हवा के झोंके से,
थरथरा जाता हूँ.
या फिर बरसात की वह पहली बूँद हूँ.
जो बादलों से निकलकर
तपती जमीं पर गिरकर
अपना वजूद समाप्त कर देती है
या फिर डाली का वह फूल हूँ
जो सूखकर जमीं पर पड़ा है
और याद कर रहा है
अपने बीते हुए अतीत को
जब फिजा में खुशबू बिखेरता था.
अफ़सोस कर रहा था
अपने बीते हुए लम्हों को याद करके
तभी दिल के किसी कोने से यह आवाज़ उठी
मैं पतझड़ का पत्ता ही सही
जो टूटकर गिरा हूँ
पर आने वाले नए पत्तो को
हरियाली का न्योता दे आया हूँ
मैं बारिश की पहली बूद ही सही
भले ही तपती जमीं पर गिरकर
अपना अस्तित्व खो दिया हूँ
किन्तु आने वाली बारिश का
 सन्देश लेकर आया हूँ
मैं डाली का टूटा फूल ही सही
लेकिन फिज़ाओ को
नई महक देने के लिए
नया राश्ता दिखाकर आया हूँ
शायद मैं जान गया हूँ
मैं कौन हूँ
मैं मिटकर भी अमित हूँ
मैं टूटकर भी अटूट हूँ
मैं गिरकर भी खड़ा हूँ
क्योंकि मैं नए ज़माने का 
सन्देशवाहक हूँ.


मित्रो मैं कविता नहीं लिखता यह मेरा पहला प्रयास है लिहाजा अपनी राय से अवश्य अवगत कराये. टिप्पणी अवश्य दे.








बारात में फायरिंग नर्तकी सहित आधा दर्ज़न घायल

भदोही/उत्तरप्रदेश: शादी विवाह के मौके पर दिनोदिन बढ़ रहा शराब का प्रचलन अक्सर घटनाओ को अंजाम दे रहा है. फिर भी लोग इससे सीख नहीं ले रहे है. ऐसा ही हुआ शनिवार की रात जब आर्केस्टा के समय हुयी फायरिंग में  नर्तकी सहित आधा दर्ज़न लोग घायल ही नहीं हुए बल्कि रंग में भंग पड़ गया और बरातियो को रात में ही भागना पड़ा .
  जानकारी के अनुसार भदोही जनपद के दुरासी बरवा गाव से ब्रह्देव तिवारी के पुत्र की बारात वाराणसी जनपद के सभैपुर लोहता  गयी थी, द्वारपूजा रश्म के बाद बाराती जनवासे में आकर नृत्य का मजा ले रहे थे उसी वक़्त बुलबुल दुबे नामक एक व्यक्ति ने बन्दूक निकलकर फायरिंग करनी शुरू कर दी फिर क्या था रंग में भंग पड़ गया. फायरिंग में दुल्हन के चाचा संतोष पण्डे, एक नर्तकी सहित आधा दर्ज़न लोग घायल हो गए. घराती पक्ष के घायल होने की बात पर लोग भड़क उठे और बारातियों को दौड़ा दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया. लिहाजा बरातियो ने भागकर अपनी जान बचाई .हालाँकि किसी तरह विवाह कार्य सम्पन्न हो गया. पुलिस मामला दर्ज कर छानबीन कर रही है.

जीवन के लिए घातक बना कालीन नगरी का पानी

- भूगर्भ जल में बहाया जा रहा डाईंग प्लांट का जहरीला पानी 
- प्रदूषित जल के कारण बीमारियों में इजाफा
- जानकारी के बावजूद प्रशासन मौन 
भदोही/ उत्तरप्रदेश :  देश की कालीन नगरी भदोही जो प्रतिवर्ष ३५०० करोड़ रूपये विदेशी मुद्रा सरकार को देती है किन्तु इसी कालीन नगरी के लोग जहरीला पानी पीने को विवश है. जी हा यहाँ का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है की लोगो के जीवन में यह ज़हर घोल रहा है और सरकार अभी तक कोई भी सार्थक कदम इस मामले में नहीं उठाई है . 
      कालीन नगरी में जल प्रदूषण की स्थिति भयावह रूप धारण कर चुकी है. जनपद की आधी आबादी स्वच्छ जल से कोसो दूर है.सबसे भयावह स्थिति भदोही नगर की है, जहा केमिकलयुक्त गन्दा पानी सीधे भूगर्भ जल में प्रवाहित किया जा रहा है. जिसके कारण भूगर्भ जल में खतरनाक केमिकल की मात्रा बढ़ गयी है. पूर्व में केन्द्रीय भूगर्भ जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम नगर के कई स्थानों से पानी का नमूना लिया था जाँच के उपरांत आंकड़ा चौकाने वाला था विशेष रूप से आर्सेनिक व क्रोमियम की मात्रा चौंकाने वाली थी , प्रति लीटर पानी में आर्सेनिक ३.४ मिली. व क्रोमियम २.९ मिली. पाई गयी .
 आइये जानते है की कालीन नगरी के पानी को ज़हर बनाने में किसकी भूमिका अहम् है. कालीन नगरी के शहर में करीब दो दर्ज़न बड़े डाईंग प्लांट लगाये गए है, इसके अलावा दर्जनों की संख्या में कई कूड़ाघर है जिनमे कालीन में प्रयुक्त होने वाली काती की रंगाई की जाती है.आबादी के बीच स्थापित डाईंग प्लांट बिना जल शोधन किये केमिकल्युक्त पानी सीधे बोरिंग कर भूगर्भ जल में प्रवाहित कर रहे है, देंखे तो कालीन निर्माण की प्रक्रिया में एक किलोग्राम काती पर सौ लीटर पानी खर्च होता है. जिससे प्रमाणित होता है की लाखो लीटर भूगर्भ जल का दोहन करने के उपरांत उसे विषैला कर पुनः भूगर्भ जल में मिला दिया जाता है. जिससे उसमे व्याप्त कार्बनिक व अकार्बनिक रसायन का तेजी से आक्सीकरण होता है. जैव आक्सीकरण के कारण जल में उपस्थित घुलित आक्सीज़न की कमी इस हद तक पहुँच सकती है की उससे जलीय प्राणियों की मौत तक हो सकती है. 
  कालीन नगरी में डाईंग प्लांट के जहरीले जल को मिलाये जाने के गंभीर परिणाम सामने आये हैं, कई मुहल्लों में अपाहिज  बच्चे पैदा हुए या फिर पैदा होने के बाद अपाहिज हो गए . जनपद के एक भी स्थान पर  सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है. जबकि नगर के अन्दर इसकी उपलब्धता  काफी मायने रखती है. चिकित्सको का कहना है की पानी में मिले जहरीले तत्व जैसे मैग्नेशियम  एवं सल्फेट की उपस्थिति से आंतो में जलन व खराबी आती है. फ्लोराइड से फ्लोरोसिस एवं नाइट्रेट  से मोग्लोविनेमिया नामक बीमारी हो सकती है. पानी में बढ़ी क्रोमियम,सीसा व कैडमियम से कोम अल्सर, स्नायुमंडल पर दुस्प्रभाव, रक्ताल्पता, सिर व जोड़ो में दर्द अनिद्रा,गुर्दे, फेफड़े व दिल की बीमारी व  बच्चा अपंग पैदा हो सकता है. ज़हर के रूप में तेजी से परिवर्तित हो रहे भूगर्भ जल की चपेट में आकर लोग अपनी जिन्दगी को दांव पर लगा रहे  हो किन्तु प्रशासन इस समस्या से मुह मोड़ कर स्थिति को और भी भयावह बना रहा है. 
भूगर्भ जल को दूषित कर लाखो लोगो की जिन्दगी से खिलवाड़ करने वाले डाईंग प्लाट संचालक मिनरल वाटर या शोधित जल पीकर खुद भले ही सुरक्षित हो किन्तु लाखो गरीब ऐसे है जिन्हें शुद्ध जल भी मयस्सर नहीं है. हालाँकि डाईंग पलट संचालक हमेशा इंकार करते हैं की जहरीला पानी नहीं मिलाया जाता किन्तु सोचना होगा की जहरीला पानी जाता कहा है. गौर करे तो नगर पालिका अंतर्गत जब सीवर का निर्माण हुआ था तो उस समय नगर की जनसँख्या २५ हजार के आसपास थी. उसी मानक के अनुसार सीवर लाईन का निर्माण किया गया . अब नगर की आबादी डेढ़ लाख के आसपास है. अर्थात घर के गंदे पानी को समाहित करने की क्षमता सीवर लाईन में नहीं है. दूसरी तरफ सीवर लाईन में डाईंग प्लांट का पानी बहाने की अनुमति भी नगरपालिका द्वारा  नहीं है. डाईंग प्लांट के आसपास नालियों में निगाह डाले तो उसमे डाईंग प्लांट का पानी दिखाई भी नहीं देता . यदि प्लांट संचालक भूगर्भ जल में पानी प्रवाहित करने से इंकार करते हैं तो लाखो लीटर खर्च होने वाला पानी जाता कहा है. ऐसा नहीं है की प्रदूषण विभाग व प्रशासन इनके कारनामो से अनजान है फिर कार्यवाही क्यों नहीं होती यह सोचनीय विषय है. 

फादर्स डे- बाबू जी से पापा तक

करीब ३०-३२ साल पहले प्रत्येक रविवार को एक कडकती सी आवाज़ सुनाई देती थी " कहा हए कुलि मिला चल आपन-आपन किताब लेके बाहर निकल " और यह आवाज़ सुनकर हमें पसीना छूट  जाता था, बदन कांपने लगता था,आँखों में आंसू छलकने लगते थे, जी हा यह आवाज़ होती थी हमारे  पिताजी की जिन्हें हम बाबूजी कहते थे.
     उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद के एक गाव पिपरिस में मैं १९६९ में पैदा हुआ, वही पला बढ़ा, गाव के ही प्राथमिक विद्यालय में मेरा तथा मेरे तीन भाइयों का नाम लिखाया गया था, मुझे याद नहीं है की कभी हमारे बाबूजी ने हमें गोद में लेकर दुलार किया था, पूरे सप्ताह हम लोग बड़े सहमकर रहा  करते थे, रविवार को हम लोंगो का दिन क़यामत का दिन होता था जी हा क़यामत का, क्योंकि उस दिन सुबह ही हम लोंगो की क्लास लगती थी बारी बारी से गिनती पहाडा आदि पूछे जाते थे और तब तक जब तक हमसे गलतिया न हो जाय, बस एक गलती और पिटाई का दौर .
    शायद उसी का परिणाम हैकि आज भी पिताजी से डर लगता है, हिम्मत नहीं पड़ती की उनके सामने कभी ऊँची आवाज़ में बात कर ले, बाहर रहकर भी उनके प्रति यह डर बना रहता है की कोई शिकायत उनके कानो तक न पहुंचे और हमें डांट सुननी पड़े,
  उस समय गाव में पिता को पिताजी कहना भी बहुत बड़ी बात थी, बाबु जी कहते थे हम, आज हम कितने धडल्ले से कह देते यह मेरा बेटा-बेटी है, स्कुल में दाखिला भी बाबूजी करने नहीं जाते थे शायद गाव के परिवेश में अपने बड़े  बुजुर्गो के सामने अपने बेटे को लेकर घूमना भी जोखिम भरा काम था. अपनी किताब "नंगातलाई का गाव " में गुरूजी विश्वनाथ त्रिपाठी  ने अपने पिता का जिक्र किया है, उस दौर के पिता के मिसाल  थे वह, उन्होंने शायद ही कभी विश्वनाथ को अपने बिस्तर पर सुलाया हो, शायद ही कभी प्यार किया हो, कभी दुलराया हो, अपनी थाली में खाना खिलाया हो, कभी तारीफ की हो, शाबाशी दी हो, हा कभी कभी इतना जरुर कहते " पढ़ही लिखिही नाही ता भीख मंगिही ससुरे" बिलकुल वैसे ही है हमारे पिताजी.

वह जमाना पिता के तौर पर सर्वशक्तिमान किस्म के पिता का जमाना  था, कम से कम अपने परिवार में तो था ही, उस समय पिताजी बोलते कम थे, हा आदेश ज्यादा देते थे. सारी बाते माँ से ही की जाती थी, अपने बच्चो से सहज होने की बात पिता कभी सोच ही नहीं पाते थे.
  आज का पिता अब पापा बन चुका है, पापा अपने बच्चो से बहुत ही सहज है, वह अपने बच्चो के साथ हँसता है, खेलता है, बात करता है, उनकी बातो को गंभीरता से लेता है,उनकी पढाई रहन सहन, समय से तैयार होना , स्कूल पहुँचाना , बच्चो की एक-एक बातो का ख्याल रखना पिता के दिनचर्या में शुमार है, पिता ने शायद पहली बार इतिहास में बच्चो के साथ बच्चा बनकर जीना सीखा है. पिता बनकर वह बच्चो के पास  नहीं जाता. वह तो बच्चा बनकर उनके साथ जीता है, इसीलिए वह उनके साथ खेल सकता है, दौड़ सकता है, गप्प लड़ा सकता है, टहल कर आ सकता है, दौड़ सकता है, आदि-आदि.
  आज के अच्छे पिता का मतलब नहीं हैकि वह अपना पूरा समय अपने परिवार को देता है बल्कि तब के पिता से अधिक व्यस्त है, उसकी अपनी प्रोफेशनल  जिन्दगी भी है, किन्तु दोनों में तालमेल बिठाकर प्राथमिकता अपने परिवार को देता है, सही बात तो यह हैकि आज का पिता "कभी-कभी" के शशि कपूर की तरह है जो बेटे का अफेयर को देखकर झूम उठता है और कहता है.... हा.हा..हा. मेरे बेटे को प्यार हो गया हा....हा....हा.....आज का पिता अपने बेटे को वह सब देना चाहता है जो उसे अपने बचपन में नहीं मिल पाया...
  सबसे महत्वपूर्ण बात बात यह है की सबकुछ देने के बाद भी शायद वह संस्कार नहीं दे पा रहा है, बल्कि उसे एकदम व्यवसायिक  बना रहा है, वास्तव में तब के पिता से आज का पापा अच्छा है. किन्तु संस्कार, अनुशाशन  भी आवश्यक  है जो शायद नहीं दे पा रह है, हमारा भी बड़ा बेटा बीसीए कर रहा है, हम भी अपेक्षा  करते है पढ़  लिखकर वह नाम कमाए किन्तु हमारे संस्कारो को न भूले, हमारी संस्कृति को न भूले.

आइये हम सभी पापा आज फादर्स  डे पर एक प्रण अवश्य ले की अपने बच्चो को दोस्त बनाकर रखे किन्तु इतनी छुट   न दे कि वह हमारी संस्कृति, हमारे संस्कारो  को भूल जाये, आधुकनिकता की दौड़ में उसे इतना आगे न कर दे की कल हमें पछताना पड़े.


शनिवार, 19 जून 2010

‘हेलो... मैं विजय मिश्रा बोल रहा हूं

‘हेलो... गुरु जी प्रणाम! मैं विजय मिश्रा  बोल रहा हूं... ’ सत्ता की हनक, बाहुबल की चमक  और रुपए की दमक के बीच गूंजने वाला यह शब्द अब पूरी तरह थम गया है। उत्‍तर प्रदेश में कानून का राज कायम होने के साथ जरायम (अपराध) की दुनिया की नकेल कसे जाने के बाद अपराध की दुनिया की हलचल से लंबे समय तक अशांत रहने वाला भदोही जिला अब शांत हो चुका है। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कालीन नगरी भदोही अब विकास के रास्ते पर अग्रसर है, सियासत यहां नई करवट ले चुकी है और इसी के साथ शुरू हो चुका है भदोही के सियासी अखाड़े का एक नया अध्याय।

हम बात कर रहे हैं, एक दशक से भदोही की फिजां में कायम सियासी समर के बीच ही एक ऐसे सियासतदां की, जिसका नाम विजय मिश्र है। विजय मिश्रा मूलतः इलाहाबाद जनपद के हन्डिया कोतवाली क्षेत्र के खपटिहा गांव के मूल निवासी हैं। एक साधारण किसान परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मिश्रा ने भदोही जिले के डीघ ब्लॉक से ब्लाक प्रमुख के रूप में सियासत का सफर शुरू किया और एक के बाद एक की तर्ज पर प्रमुख चुने जाते रहे। भदोही जनपद के सृजन के बाद जिला पंचायत के प्रथम चुनाव में उन्हें डीघ से ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. श्यामधर मिश्र के भाई पंडित गुलाबधर मिश्र से हार का सामन करना पड़ा। लेकिन, इसके बाद इस शख्‍स ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

जिला पंचायत अध्‍यक्ष निर्वाचित होने के बाद विजय मिश्र ने ग्यानपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर एक नहीं, बल्कि दो बार जीत दर्ज की। इस दौरान तमाम सियासी दलों का कथित रूप से उत्पीड़न भी हुआ, जिसकी वजह से भी सपा विधायक लगातार चर्चा में बने रहे। लेकिन, सूबे में बसपा की सरकार बनने के बाद भदोही में भी कानून के राज की हनक दिखी। भदोही विधान सभा उपचुनाव में बसपा की हार और सपा की जीत की नायक बने विजय मिश्रा के बनवास का सफर भी यहीं से शुरू हो गया।

लोकसभा चुनव में बसपा ने काफी जद्दोजहद के बाद विजय मिश्र के जानी दुश्मन कहे जाने वाले ग्यानपुर के चर्चित पूर्व विधायक गोरखनाथ पांडे को लोकसभा चुनाव के मैदान में उतार दिया। विजय मिश्र भी चुप कैसे रहते, उन्होंने भी रामरती बिन्द का टिकट कटवाकर छोटेलाल बिन्द को चुनाव मैदान में उतार दिया। सियासी महाभारत शुरू हो गई, किन्तु सियासी बिसात पर एक गलत चाल से सब कुछ उल्टा पड़ गया। और, यह थी, प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में गोलीकांड। गोलियों की तड़तड़ाहट जा पहुंची कानून के राज की चौखट तक। बैलेस्टिक जांच में पता चला कि गोलियां सपा विधायक के गनर के असलहे से निकली थीं। फिर क्या था, कस गया शिकंजा और गायब हो गए विजय मिश्रा... थम गई ‘हेलो गुरु जी प्रणाम ...मैं विजय मिश्र बोल रहा हूं’ की आवाज ...

आइये पुलिस की क्राइम डायरी पर नजर फेरते हैं। सपा विधायक मिश्र पर करीब पांच दर्जन अर्थात 60 के लगभग मुकदमे दर्ज हैं। वर्तमन समय में कई मामलों में स्टे भी हासिल हैं, बावजूद इसके कई मामलों में पुलिस को तलाश है विजय मिश्र की, किन्तु फरार हैं विधायक। पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। लखनऊ, नोएडा, इलाहाबाद, भदोही सहित कई स्थानों पर उनकी करोडों की सम्पत्ति सीज की जा चुकी है। आखिर कहां हैं विजय मिश्र? इस सवाल का जवाब उनके समर्थक ही दे सकते हैं।

काबिले गौर यह है कि सपा विधायक के सियासी बनवास के बाद उनका सियासी किला भी ढहता जा रहा है। कल तक उनकी चौखट चूमने वाले आज उनके दुश्मनों के घर हाजिरी लगा रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि विधायक का किला ढहता जा रहा है। फिलहाल अभी आगे है पंचायत चुनाव, जिसमें होगी असली जंग। दोनों तरफ से खिंचेंगी तलवारें.. क्या होगी तस्वीर ... यह बहुत कुछ आने वाले वक्‍त पर ही निर्भर है। लेकिन, आज की तारीख में फोन पर गूंजने वाली यह आवाज ... ‘हेलो गुरु जी प्रणाम ...मैं विजय मिश्र बोल रहा हूं’ गुजरे जमाने की कहानी बनती नजर आ रही है।

उद्योग के लिये खतरा बना सिंथेटिक कालीन

सिंथेटिक कालीन परम्‍परागत भारतीय कालीनों के लिए खतरे की घंटी
भदोही, उत्तरप्रदेशः चीन व मध्य एशिया के देशों से भारत में आयात हो रहे सिंथेटिक कालीनों से भारत के परम्परागत कालीनों पर खासा असर पड़ने की आशंका प्रबल हो गई है। हाथ से बुने गए भारतीय कालीनों के मुकाबले सिंथेटिक कालीन सब्जी के भाव बिक रहे हैं। कालीन निर्यातकों का कहना है कि यदि इसे इसी तरह बढ़ावा मिलता रहा, तो इस उद्योग में लगे लाखों बुनकरों को रोजी-रोटी के लिए मोहताज होना पडेगा।

अपनी कला के बल पर पूरे विश्व में पहचान बना चुका भारतीय कालीन उद्योग का अस्तित्व मुगल काल से ही है। कार्पेट एक्‍सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (सीईपीसी) के अनुसार कालीन का निर्यात जहां 1980 में 800 करोड़ रुपए का था, वहीं आज 3500 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा है। भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी व कश्मीर के बाद हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली तक अपना पांव पसार चुके इस उद्योग में मंदी का ही असर है कि धीरे-धीरे लोग सस्ती क्वालिटी की ओर मुखातिब हो रहे हैं। सबसे पहले तिब्बती, गाबे, टफ्टेड, सुमैक, हैण्डलूम व शैगी ने बाजार को बनाये रखने में मदद की। इन कालीनों की खास बात यह रही कि भले ही ये सस्ते थे, किन्तु इनके उत्पादन की जिम्मेदारी भारतीय श्रमिकों पर ही रही, इससे छोटे-बड़े सभी श्रमिकों का पेट भरता रहा।

जबसे विश्व में मन्दी का दौर शुरु हुआ, हर तरफ सस्ते कालीनों की मांग होने लगी। इसमें सिंथेटिक कालीनों ने सभी को पछाड़ दिया। हाथ से बुने कालीनों के आगे यह कालीन सब्जी के भाव बिक रहा है। प्रमुख कालीन निर्यातक शाहिद हुसैन अंसारी ने बताया कि सिंथेटिक कालीनों की माग बढ़ी, तो इसका लाभ सबसे पहले चीन ने उठाया। इसी का नतीजा है कि पिछले एक-दो सालों में चीन व मध्य एशिया से सिंथेटिक कालीनों का आयात बढ़ा है। उन्‍होंने कहा कि ये सस्ते कालीन भारत के मेट्रो शहरों सहित बडे शहरों के मॉल्स व शापिंग सेंटर में खूब बिक रहे हैं।

भारतीय कालीन उद्योग से वर्तमान में 15-20 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी चल रही है, किन्तु सिंथेटिक कालीनों का बढ़ता आयात हमारे मजदूरों के लिये बहुत बडे खतरे का संकेत है। अंसारी ने कहा कि पूरी तरह मशीन से निर्मित यह कालीन पलक झपकते ही तैयार हो जाता है, लिहाजा भविष्‍य में लाखों गरीब मजदूरों का रोजगार छिन जाने की आशंका प्रबल हो गई है। लाखों मजदूरों के भविष्‍य का ध्यान रखते हुए यदि केन्द्र सरकार ने कोई गम्भीर कदम नही उठाए तो आने वाले समय में यह समस्या और भी गम्भीर हो जायेगी।

शुक्रवार, 11 जून 2010

मेरी बिटिया से अच्छी कुतिया



मैं मीडिया मंच .कॉम पढ़ रहा था उसी दौरान मेरी निगाह इस फोटो पर पड़ी. मैं यह देखकर आश्चर्य चकित रह गया रह गया की आज के आधुनिक युग में लोग अपने बच्चो को गोद में लेकर बाहर निकलने में भले ही परहेज करे किन्तु कुत्तो को लेकर निकलने गर्व की अनुभूति करते हैं. जरा ध्यान से देखिये इस फोटो को एक माँ कैसे शान से अपने कुत्ते को कंधे पर बैठा कर ले जा रही है. जबकि उसी माँ की मासूम बच्ची पैदल चलने को मजबूर है. अब जरा कंधे पर बैठे महाशय के चेहरे पर नजर डालिए कैसी शानदार अदा में फोटो खिंचा रहे है. 

असंतुलित ट्रक ने पांच को रौंदा






उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर भदोही जनपद के चौरी  थाना क्षेत्र अंतर्गत बरदाहा  गाँव स्थित पाल चौराहा के पास एक असंतुलित ट्रक ने पांच मुसहरों को रौंद डाला जिसमे वे बुरी तरह घायल हो गए. घटना के बाद  वाहन सहित चालक फरार हो गया. हृदयविदारक घटना यह रही की एक मुसहर का  एक  पैर काटकर ट्रक में जा फंसा जो जो लगभग ढाई किमी दूर रोतहा  गाँव के पास मिला . संवेदनहीन हो चुकी पुलिस  घटना के ६ घंटे  बाद भी घायलों की सुधि लेने नहीं पहुंची.
  जानकारी  के अनुसार  अमवाँ खुर्द निवासी. रामजीत मुसहर अपनी पत्नी लक्ष्मीना  पुत्र चन्दन व आकाश  तथा पडोसी
             


जवाहिर को ठेले पर बिठाकर ट्रेन पकड़ने जा रहा था तभी वाराणसी की तरफ से आ रही एक ट्रक ठेले में जोरदार टक्कर मार दी, जिसमे सभी दूर जा गिरे . घटना में जवाहिर का पैर कट गया. सूचना पाकर जिला पंचायत सदस्य रमेश सिंह मौके पर पहुँच गए और घायलों का इलाज कराया. इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी किन्तु कोई भी मौके पर जाना मुनासिब नहीं समझा. घटना  में पांचो बुरी तरह घायल हुए है.

गुरुवार, 3 जून 2010

पांच बच्चो की माँ ने प्रेमी से शादी रचाई

भदोही/३ जून - कोतवाली क्षेत्र के सर्रोई में अपने प्रेमी के मोहपास में  फंसी पांच बच्चो की माँ ने अपने घर परिवार को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ रहने का फैसला करते हुए शादी रचा ली.
जानकारी के अनुसार बिहार प्रान्त के सीतामढ़ी जनपद निवासी अकबर पुत्र फरमान अली सर्रोई में रहकर कालीन बुनाई का कार्य करता है. इसी बीच उसका प्रेम वही पर रहने वाली विधवा चंदा नामक युवती से हो गया. काफी दिनों से दोनों छुप छुप कर मिला करते थे किन्तु इश्क और मुश्क  छुपाये कहा छुपता है. जब लोंगो को इसकी जानकारी हो गयी तो दोनो ने शादी रचा ली. यह मामला क़स्बा चौकी पर पहुंचा जहाँ प्रेमिका  अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी रही. अंततः दोनों के प्रेम आगे लोग झुक गए और मामला सुलझा लिया गया. तत्पश्चात दोनों बिहार रवाना   हो गए.

बुधवार, 2 जून 2010

बिजली को लेकर चक्का जाम

उत्तर प्रदेश के संत रविदासनगर भदोही जनपद के मुख्य नगर के अजीमुल्लाह चौराहे पर पिछले एक सप्ताह से बिजली कटौती से परेशानी झेल रहे आक्रोशित नागरिको ने चक्काजाम कर यातायात बाधित कर दिया , जिसके कारण नागरिको को काफी परेशानी झेलनी पड़ी, हालाँकि इन सबसे बेखबर अधिकारी तहसील दिवस में व्यस्त रहे, बताया जाता है की पिछले एक सप्ताह से ट्रांसफार्मर जलने के कारण विद्युत् आपूर्ति बाधित है, जिससे लोग काफी परेशान हैं, बिद्युत अधिकारी लोगो  को काफी दिनों से  केवल दौड़ा रहे  थे, समाचार लिखे जाने तक यातायात बाधित था.