गुरुवार, 27 मई 2010

खोखली हो रही युवा पीढ़ी को कौन दे दिशा

युवा पीढ़ी देश का भाग्य एवं भविष्य है इन्ही के मजबूत कंधो पर रास्ट्र का आधार  अवं विकास सुरक्षित एवं  संरक्षित  है, परन्तु वर्तमान युवा पीढ़ी को घुन लग गया है, ये अन्दर और बाहर दोनों ओर से खोखले होते चले जा रहे हैं इनके भटकते एवं बहकते कदम सोचनीय एवं चिंता का सबब बन गए हैं, सड़क हादसों, हिंसा, नशे से लेकर यौन अपराधो में आकंठ तक डूबे युवाओ से भला कैसी उम्मीद की जाय, एक गहरा प्रश्न है; ११ से १९ वर्ष की अवस्था किशोरावस्था मानी जाती है. इस उम्र में उमंगो की बयार बहती है, सपनो के कोमल संगीत फूटते  हैं, आँखों में उजले भविष्य की नई चमक होती है, ऐसे जीवन के मिशाल थे आजाद,भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, आचार्य शंकर,. अध्यात्मिक दीप ध्रुव, प्रह्लाद,लक्ष्मीबाई,दुर्गावती, जैसी विरंग्नाये. ये देश के प्रदीप्त दीपशिखा थे, किसी को भी इन पर गर्व होना स्वाभाविक था, परन्तु कहा गयी इनकी पीढियां, जिनमे जान पर खेलकर दूसरों को बचाने का जज्बा था. क्या भारत माता की कोख सूनी पड़ गयी है,
          आंकड़ो की माने तो कच्ची उम्र के नौजवानों के व्यवहार और जीवनशैली में तेजी से बदलाव आ रहा है. अपराध के नए नए तरीके अपनाये जा रहे हैं१ हिंसा व् अपराध की यहाँ बाजारवादी  अपसंस्कृति को फ़ैलाने वाले  टीवी चैनल आदि से बह रही है,आंकड़ो के अनुसार जिन घरों में मातापिता के मतान्तर, मतभेद व् मारपीट जैसी स्थिति आती है, उससे बच्चे अत्यंत प्रभावित होते हैं, परेशान मातापिता अपनी निजी आक्रामकता को अपनी संतानों में प्रक्षेपित करते हैं, इनमे ३० % बच्चे इस सामान्य हिंसा से प्रभावित होते हैं,1     ४०%  किशोरियां ऐसी हैं जो अपने संबंधो में कही न कही हिंसक कारनामो को अंजाम दे रही हैं,  कभी शराब को ज़हर मानकर इससे दूर रहनी की सलाह दी जाती थी परन्तु आज फैशन बन गयी है, पीना और पिलाना अब प्रतिस्ठा  मानी जाने लगी है , 
          किशोरों में शराब व् सिगरेट का ही प्रचलन नहीं है बल्कि आत्मघाती drugs का सेवन भी बढ़ा है, इसके साथ विकृत सेक्स की कुवृत्ति भी बढ़ी है. इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी का प्रचलन किसी भी साईट कई गुना बढा है .  मनोवैज्ञानिको की माने तो किशोरावस्था में इस ओर तीब्र आकर्षण होता है,  इस akarsan   को सही दिशा दी जा सकती है, इसके प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान एवं आन्दोलन चलने की आवश्यकता है. यदि इसे न रोका  गया तो हमारा देश रुग्न,अशक्त और निर्वीर्य  युवाओं का गढ़ बन जायेगा  अभिभावकों के साथ  युवा  खुद ही इस चुनौती को स्वीकार करे ओर अपनी  दुर्बलता को तिलांजलि देकर साहस के साथ सत्पथ पर आगे आयें .      



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