शनिवार, 29 मई 2010

अमीर का कुत्ता गरीब का बच्चा




है न अजीब सा शीर्षक, भला बताइए अमीर के कुत्ते और गरीब के बच्चे में भी कोई समानता हो सकती है, भाई वो अमीर का कुत्ता है. शानो-शौकत से रहने की उसकी आदत तो होगी  ही, आज सुबह जब मैं सो कर उठा और बाहर निकला तो हमारे गेट के सामने कूड़े के ढेर से कागज उठा एक बच्चा मुझे देखकर सहम गया, जैसे वो कोई चोरी करते हुए पकड़ा गया हो, उसकी आँखों में दया याचना देख मैं खुद ही सिहर उठा,  मैं सोचने लगा अभी हम लोंगो के बच्चे सोकर भी नहीं उठे है और यह बच्चा दो रोटी के जुगाड़ के लिए अपने मासूम कंधो बोरी उठाये रद्दी कागज बीनने निकल पड़ा है. जी हा भदोही कालीन नगरी के रूप में पूरे विश्व में विख्यात है, करोडो के कालीन यहाँ से निर्यात किये जाते हैं, पर उन्ही कालीनो में अपनी कलात्मकता का रंग भरने वाले मजदूर अपने बच्चों के लिए भरपेट भोजन का भी इंतजाम नहीं कर पाते,  सुबह सबेरे रोजाना कालीन नगरी सडको पर तमाम ऐसे बच्चे दिखाई पड़ते हैं जो कूड़े के ढेर पर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते है.  कल एक समाचार पढ़ा था, आँध्रप्रदेश के बाद उत्तरप्रदेश दूसरा राज्य है जहा दलितों पर सबसे अधिक अत्याचार हुए है. अफ़सोस की बात तो यह है की दलितों के नाम पर बनी बसपा सरकार भी इनके दुखो को दूर नहीं कर पाई है. केंद्र व् प्रदेश की सरकारे सर्व शिक्षा अभियान का नारा लगाकर करोडो रूपये पानी की तरह बहा रही है किन्तु यह पैसा कहा जा रहा है कहने की बात नहीं है. आज भी  लाखों बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल का मुह नहीं देख पाए हैं., पिछले दिनों एक किताब के बिमोचन समारोह में मुझे बोलने के लिए बुलाया गया, मैं ऐसे मौको पर बोलने से बहुत घबराता हू क्योंकि झूठ  बोल नहीं सकता और सच बोलने पर लोग नाराज हो जाते है. , फ़िलहाल फंसा तो था ही लिहाजा बोलना पड़ा, जब मैंने कहा की भदोही में करोडपति लोग रहते हैं. गेट के अन्दर जाइये तो  संगमरमर बिछे है. जबकि बाहर नालियां बजबजा रही है. इसके लिए लोग नगर पिलिका की तरफ मुह उठाये रहते है, बस क्या था लोगो को बुरा लग गया, खुसुर फुसुर शुरू हो गयी, लोगो की गुस्से भरी निगाहे मेरे ऊपर उठ गयी,.. बस चुप हो जाता तो ठीक था लेकिन क्या करे दिल मन ही नहीं... फिर बोल उठा नगर में समाज सेवियों की भरमार है लेकिन कितने मरीज सरकारी अस्पताल में इलाज कराते-कराते दम तोड़ देते है. हे भगवान संचालक घूर रहा है हट जाता हूँ........
मैं आपसे पूछता हूँ क्या इन मासूमो को अपना बचपन खेलकर बिताने का हक़ नहीं है, इन्हें स्कूल जाने का हक़ नहीं है? क्या अमीर के कुत्ते को देखकर यह नहीं सोचते होंगे की अगले जनम में................

गुरुवार, 27 मई 2010

खोखली हो रही युवा पीढ़ी को कौन दे दिशा

युवा पीढ़ी देश का भाग्य एवं भविष्य है इन्ही के मजबूत कंधो पर रास्ट्र का आधार  अवं विकास सुरक्षित एवं  संरक्षित  है, परन्तु वर्तमान युवा पीढ़ी को घुन लग गया है, ये अन्दर और बाहर दोनों ओर से खोखले होते चले जा रहे हैं इनके भटकते एवं बहकते कदम सोचनीय एवं चिंता का सबब बन गए हैं, सड़क हादसों, हिंसा, नशे से लेकर यौन अपराधो में आकंठ तक डूबे युवाओ से भला कैसी उम्मीद की जाय, एक गहरा प्रश्न है; ११ से १९ वर्ष की अवस्था किशोरावस्था मानी जाती है. इस उम्र में उमंगो की बयार बहती है, सपनो के कोमल संगीत फूटते  हैं, आँखों में उजले भविष्य की नई चमक होती है, ऐसे जीवन के मिशाल थे आजाद,भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, आचार्य शंकर,. अध्यात्मिक दीप ध्रुव, प्रह्लाद,लक्ष्मीबाई,दुर्गावती, जैसी विरंग्नाये. ये देश के प्रदीप्त दीपशिखा थे, किसी को भी इन पर गर्व होना स्वाभाविक था, परन्तु कहा गयी इनकी पीढियां, जिनमे जान पर खेलकर दूसरों को बचाने का जज्बा था. क्या भारत माता की कोख सूनी पड़ गयी है,
          आंकड़ो की माने तो कच्ची उम्र के नौजवानों के व्यवहार और जीवनशैली में तेजी से बदलाव आ रहा है. अपराध के नए नए तरीके अपनाये जा रहे हैं१ हिंसा व् अपराध की यहाँ बाजारवादी  अपसंस्कृति को फ़ैलाने वाले  टीवी चैनल आदि से बह रही है,आंकड़ो के अनुसार जिन घरों में मातापिता के मतान्तर, मतभेद व् मारपीट जैसी स्थिति आती है, उससे बच्चे अत्यंत प्रभावित होते हैं, परेशान मातापिता अपनी निजी आक्रामकता को अपनी संतानों में प्रक्षेपित करते हैं, इनमे ३० % बच्चे इस सामान्य हिंसा से प्रभावित होते हैं,1     ४०%  किशोरियां ऐसी हैं जो अपने संबंधो में कही न कही हिंसक कारनामो को अंजाम दे रही हैं,  कभी शराब को ज़हर मानकर इससे दूर रहनी की सलाह दी जाती थी परन्तु आज फैशन बन गयी है, पीना और पिलाना अब प्रतिस्ठा  मानी जाने लगी है , 
          किशोरों में शराब व् सिगरेट का ही प्रचलन नहीं है बल्कि आत्मघाती drugs का सेवन भी बढ़ा है, इसके साथ विकृत सेक्स की कुवृत्ति भी बढ़ी है. इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी का प्रचलन किसी भी साईट कई गुना बढा है .  मनोवैज्ञानिको की माने तो किशोरावस्था में इस ओर तीब्र आकर्षण होता है,  इस akarsan   को सही दिशा दी जा सकती है, इसके प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान एवं आन्दोलन चलने की आवश्यकता है. यदि इसे न रोका  गया तो हमारा देश रुग्न,अशक्त और निर्वीर्य  युवाओं का गढ़ बन जायेगा  अभिभावकों के साथ  युवा  खुद ही इस चुनौती को स्वीकार करे ओर अपनी  दुर्बलता को तिलांजलि देकर साहस के साथ सत्पथ पर आगे आयें .      



मंगलवार, 25 मई 2010

रुचिका, प्रकरण, कब, क्या, हुआ


-12 अगस्त, 1990: हरियाणा पुलिस के पुलिस महानिरीक्षक व 'हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन' (एचएलटीए) के अध्यक्ष एस.पी.एस. राठौड़ टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिरहोत्रा के साथ अपने कार्यालय में छेड़छाड़ की।

-16 अगस्त, 1990: मुख्यमंत्री हुकम सिंह और गृह सचिव से शिकायत की गई।

-17 अगस्त, 1990: मुख्यमंत्री हुकम सिंह पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर.आर. सिंह को मामले की जांच के आदेश दिए।

-18 अगस्त, 1990: पुलिस ने राठौड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया।

-3 सितंबर, 1990: पुलिस महानिदेशक सिंह ने राठौड़ को प्रथम दृष्टया दोषी पाया। रिपोर्ट सौंपी गई और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा गया। बाद में नए पुलिस महानिदेशक आर.के. हुड्डा और गृह सचिव जे.के. दुग्गल ने राठौड़ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने व आरोप पत्र दाखिल करने की सलाह दी।

-12 मार्च, 1991: गृह मंत्री संपत सिंह ने राठौड़ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की अनुमति दी। मुख्यमंत्री को सिफारिश भेजी गई।

-13 मार्च, 1991: मुख्यमंत्री हुकम सिंह ने प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी।

-22 मार्च, 1991: ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा के नए मुख्यमंत्री बने। चौटाला राजनीतिक संकट और अस्थिरता के बीच केवल 14 दिन के लिए ही मुख्यमंत्री रहे।

-6 अप्रैल, 1991: राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। राज्यपाल धनिक लाल मंडल ने शासन की बागडोर संभाली।

-28 मई, 1991: राष्ट्रपति शासन के दौरान राठौड़ के खिलाफ आरोप पत्र को मंजूरी दी गई।

-23 जुलाई, 1991: भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार बनाई। भजनलाल नौ मई, 1996 तक मुख्यमंत्री रहे। इस अवधि में राठौड़ के कहने पर रुचिका के परिवार के खिलाफ कथित अत्याचार हुआ।

-6 अप्रैल, 1992: रुचिका के भाई आशू के खिलाफ कार चोरी का मामला दर्ज हुआ।

-30 जून, 1992: राठौड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का मामला उठा और हरियाणा के कानूनी सलाहकार आर.के. नेहरू ने राठौड़ के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की।

-30 मार्च, 1993: आशू के खिलाफ कार चोरी की एक अन्य प्राथमिकी दर्ज की गई।

-10 मई, 1993: आशू के खिलाफ कार चोरी की एक और प्राथमिकी दर्ज हुई।

-12 जून, 1993: फिर आशू के खिलाफ कार चोरी की एक और प्राथमिकी दर्ज हुई।

-30 जुलाई, 1993: आशू के खिलाफ कार चोरी की एक और प्राथमिकी दर्ज।

-4 सितंबर, 1993: कार चोरी के लिए आशू के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज।

-23 अक्टूबर, 1993: हरियाणा पुलिस आशू को पकड़ती है, उसे लगभग दो महीने तक अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है। उसके खिलाफ कार चोरी के 11 मामले दर्ज होते हैं।

-28 दिसम्बर, 1993: स्वयं के और परिवार के उत्पीड़न का सामना करने में असमर्थ रुचिका ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।

-29 दिसम्बर, 1993: रुचिका की आत्महत्या के एक दिन बाद आशू को छोड़ दिया जाता है।

-अप्रैल, 1994: रुचिका के निधन के महीनों बाद भजनलाल सरकार के कार्यकाल के दौरान राठौड़ के खिलाफ लगाए गए आरोप खारिज कर दिए गए।

-4 नवंबर, 1994: भजनलाल की सरकार ने राठौड़ को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के तौर पर पदोन्नत कर दी।

-11 मई, 1996: बंसीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। वह 23 जुलाई, 1999 तक मुख्यमंत्री रहते हैं।

-5 जून, 1998: एक बंदी के पैरोल मामले से राठौड़ के जुड़े होने पर बंसीलाल सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।

-21 अगस्त, 1998: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने रुचिका छेड़छाड़ मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए।

-3 मार्च, 1999: बंसीलाल सरकार ने राठौड़ की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पद पर बहाली कर दी।

-23 जुलाई, 1999: ओम प्रकाश चौटाला फिर मुख्यमंत्री बने।

-30 सितंबर, 1999: विभागीय जांच में राठौड़ को दोषमुक्त करार दिया गया और उन्हें पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में पदोन्न किया गया। 20 मई, 1999 से यह पदोन्नति प्रभावी होनी थी।

-10 अक्टूबर, 1999: चौटाला सरकार ने राठौड़ को हरियाणा का डीजीपी (राज्य पुलिस प्रमुख) नियुक्त कर दी।

-16 नवंबर, 2000: सीबीआई ने रुचिका छेड़छाड़ मामले में राठौड़ के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दी।

-5 दिसम्बर, 2000: राठौड़ को हरियाणा पुलिस प्रमुख पद से हटाकर अवकाश पर भेज दिया गया।

- मार्च, 2002: राठौड़ सेवानिवृत्त हो गए।

-21 दिसम्बर, 2009: सीबीआई की विशेष अदालत ने रुचिका छेड़छाड़ मामले में राठौर को सजा सुनाई। उन्हें छह महीने कैद और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। मीडिया में राठौड़ को इतनी कम सजा मिलने पर सवाल उठे।

-5 जनवरी, 2010: विभिन्न प्रकार से दबाव बनने के बाद हरियाणा पुलिस ने रुचिका मामले में राठौड़ के खिलाफ तीन नई प्राथमिकी दर्ज की। उन पर रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने, उसके भाई को प्रताड़ित करने, हत्या की कोशिश, आपराधिक धमकी, सबूतों से छेड़छाड़, गलत तरीके से जेल में रखने, झूठे सबूत पेश करने और आपराधिक षडयंत्र के मामले दर्ज किए गए। हरियाणा पुलिस इन ताजा मामलों को सीबीआई को हस्तांतरित करना चाहती है।

-15 जनवरी: राठौर के खिलाफ तीन नए मामले दर्ज होने के बाद सीबीआई की दिल्ली टीम ने रुचिका मामले में जांच शुरू की।

-25 जनवरी: सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए ताजा मामलों में उच्च न्यायालय से राठौड़ को अंतरिम जमानत मिली।

-8 फरवरी: एक अदालती सुनवाई के बाद बाहर आ रहे राठौड़ पर चण्डीगढ़ जिला अदालत परिसर में एक युवक उत्सव शर्मा ने हमला किया। एक चाकू से हुए हमले में राठौड़ के चेहरे व गर्दन पर चोट आई।

-3-11 मई: सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा राठौड़ को मिली कम सजा के विरोध के बाद चण्डीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायालय में उनके खिलाफ सुनवाई जारी है। सीबीआई ने छह महीने की सजा को बढ़ाने की दलील दी।

-25 मई: जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा सीबीआई की विशेष अदालत में सजा के खिलाफ की गई राठौड़ की अपील के खारिज होने के बाद राठौड़ को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने राठौड़ की सजा 18 महीने तक बढ़ा दी।