रविवार, 25 अप्रैल 2010

सरकार कितना भी सर्व शिक्षा अभियान चलाये किन्तु जब तक हम गरीबो के लिए दो वक़्त की रोटी नहीं मिलती सर्व शिक्षा अभियान अधूरा ही रहेगा.

कालीन नगरी की धार्मिक स्थली सीतामढ़ी [सीता समाहित स्थल]

छोटी सी जिन्दगी का फलसफा

जिन्दगी के बारे में मेरा फलसफा कुछ अलग ही है. मेरी अपनी सोच है की जो जंग प्रेम से जीती जा सकती है वह तलवार से नहीं. हालाँकि हर जगह यह बात लागू भी नहीं होती. समाज में कुछ लोग ऐसे भी होते है जिनके खिलाफ तलवार उठानी ही पड़ती है. पर भाई हम ठहरे पत्रकार लिहाजा "कलम की तलवार" ही उठाते हैं. बीस वर्ष की पत्रकारिता में हमने बहुत से उतार चढाव देखे हैं.  समाज के कई विकृत रूप भी देंखे है, लोग कहते हैं की आईना झूठ नहीं बोलता पर यह गलत है, हमने तमाम जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, अधिकारियों  को देखा है, उनकी बाते सुनी है. जो शुरुवाती दौर में बहुत अच्छे लगे पर गहराई में गया तो लगा की भैया आईना भी झूठ बोलता है. भैया हम तो मस्त मौला आदमी है. जो परिस्थितियां समाज के लिए नासूर हैं उन्हें बदल तो सकते नहीं पर प्रयास जरूर करते है. हा उनके लिए बहुत अधिक चिंतित भी नहीं होते. कहते हैं न चिंता चिता से बढ़कर होती है तो भैया अधिक चिंतित होकर क्यों अपनी चिता तैयार करें. जब तक सांसे है तब तक मस्ती करें जब नहीं रहेंगे तो देखा जायेगा. वैसे आपको बता दे की हम जाति-पाति, उंच-नीच, धर्म आदि जैसी बातों से बहुत दूर रहते हैं. हमारा सोचना है की इस पृथ्वी पर पैदा होने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक ही परमात्मा की संतान है. और आप भी तो यही मानते होंगे, फिर क्यों इन बेतलब के विवादों में पड़े. सभी अपने भाई-बन्धु हैं.  हाँ हम हिन्दू है और हमें हिन्दू होने पर गर्व भी है.  मेरा परिचय बहुत छोटा सा है. 
काशी-प्रयाग के संगम लव-कुश की जन्मस्थली भदोही में एक गरीब किसान परिवार में १५ मार्च १९६९ को पैदा हुआ. शिक्षा-दीक्षा भदोही में ही हुई. साहित्य और लिखने पढने के में रूचि होने  के कारण १९९० से ही पत्रकारिता के क्षेत्र में जुड़ गया. पत्रकारों को फोटो उपलब्ध करवाना मेरा शौक रहा. यही शौक ने पत्रकारिता जैसे बेकार के पचड़े में फंसा दिया,  १९९४ में भदोही से प्रकाशित  हिंदी पाक्षिक "भदोही एक्सप्रेस" में बतौर सह-संपादक जुडा, इसके बाद हिंदी दैनिक तरुनमित्र, कशीप्रयाग  टाइम्स   , स्वतंत्र भारत, हिंदी दैनिक आज, दैनिक जागरण जैसे अखबारों से जुडा रहा. इस दौरान मैंने देखा की, सभी अख़बार एक दुकान खोल कर बैठे है. पत्रकारिता का मूल स्वरूप जो पहले था वह नहीं रहा. मनचाहा समाचार व्यवसाय के चलते  आज पत्रकार नहीं लिख सकता यह मैं वास्तविक रूप में देखा,  जब उब गया तो २००७ में दैनिक जागरण के तहसील प्रभारी पद से इस्तीफ़ा  दे दिया. तत्पश्चात साप्ताहिक अखबार " न्यू कन्तिदूत टाइम्स" में बतौर प्रधान संपादक के पद पर कार्यरत हूँ,  साथ ही  मौजूदा समय में वाराणसी से प्रकाशित  हिंदी दैनिक "आज" में भदोही जनपद से अपराध संवाद दाता भी हू. समय मिला तो ब्लॉग भी लिख लेता हू. बाकी जिन्दगी है कट रही है और कटती रहेगी.बस ईश्वर से यही प्रार्थना है की सभी के दिलों में प्रेम की ऐसी ज्योति जलाये ताकि हर दिल नफरत मिट जाय और एक नए समाज का सृजन हो.


हरीश  सिंह 
अध्यक्ष ..
पूर्वांचल  प्रेस  क्लब
संस्थापक/संयोजक --
भारतीय ब्लॉग लेखक मंच

पूर्वांचल ब्लोगर्स असोसिएसन  
प्रमुख प्रचारक...
आल इण्डिया ब्लोगर्स असोसिएसन
लखनऊ ब्लोगर्स असोसिएसन 


जन्म स्थान--
ग्राम व पोस्ट -- पिपरीस
जनपद -- संत रविदास नगर भदोही 

 उत्तरप्रदेश, भारत 
वर्तमान निवास ..
राजपूत काम्प्लेक्स 
कोतवाली के सामने
स्टेशन रोड, भदोही, उत्तरप्रदेश  
कार्यालय --
४, राजपूत काम्प्लेक्स 
कोतवाली के सामने
स्टेशन रोड, भदोही, उत्तरप्रदेश 
मो. 7860754250 

क्या यही है कंप्यूटर युग

यह कैसी जिन्दगी


सर्व शिक्षा अभियान क्या मेरे लिए नहीं है!